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नामांतरण नहीं होने से किसान परेशान, कार्यालय का लगा रहे चक्कर

Mon, 27 Jun 2022 12:39 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jun 2022 12:39 AM IST
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Farmers upset due to non-translation, circling the office
गोरखपुर जाने वाली गैस पाइप लाइन परियोजना में जमीन देने वाले 500 किसानों का मुआवजा फंस गया है। तहसील प्रशासन की ओर से नामांतरण में विलंब किए जाने से किसान नाराज हैं। अधिग्रहण से प्रभावित किसानों ने चेतावनी दी जल्द ही नामांतरण नहीं किया गया तो वे आंदोलन के लिए विवश होंगे।
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केंद्र सरकार ने 24 फरवरी 2019 को परियोजना की आधारशिला रखकर 2757 किमी में बिछने वाली गैस पाइप लाइन के लिए लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। जिले की तहसील ज्ञानपुर और औराई के 42 गांवों के लगभग 2400 काश्तकारों की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भूमि अध्याप्ति विभाग ने शुरू की। तकनीकी पेच फंसते ही परियोजना की कमान कार्यदाई संस्था केजीपीएल के कर्मचारियों यो ने खुद ही संभाल ली। हालांकि काम करीब दो साल विलंब से शुरू हुआ। अधिगृहीत जमीन के मामले में तीन बार काश्तकारों से आपत्तियां लेकर निस्तारित करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अब भी पांच सौ काश्तकारों का नामांतरण भू अभिलेख में नहीं हो सका है। गत दिनों अधिग्रहण से प्रभावित काश्तकारों ने विरोध-प्रदर्शन कर राजस्व कर्मचारियों पर सुविधा शुल्क मांगने और कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों पर खाते में अधिक धनराशि भेजकर वापस लेने का आरोप लगाया था। ज्ञानपुर तहसील के कनकपुर निवासी काश्तकार बनवारीलाल, बैजू बिंद, अमरनाथ बिंद, जेठू बिंद, रामलाल, राजमणि बिंद ने बताया कि पिता का निधन होने पर वे लोग नामांतरण के लिए दौड़भाग कर रहे हैं, लेकिन तहसील कर्मियों की मनमानी के कारण काम नहीं हो पा रहा है। नामांतरण होने पर ही उन्हें मुआवजे की रकम मिलेगी। तहसीलदार ज्ञानपुर विजय यादव ने कहा कि नामांतरण के लिए लेखपालों को निर्देश दिया जा चुका है। शेष गांव भदोही तहसील में पड़ते हैं। उधर, गैस परियोजना की पाइप लाइन बिछाने के लिए अधिगृहीत कृषि भूमि पर गड्ढे खोदे जाने से काश्तकारों के कृषि कार्य पर असर पड़ा है। इस कार्य के लिए छोटी-बड़ी सड़कें काट दिए जाने से आवागमन भी प्रभावित हुआ है। अभोली-गड़ौरा मार्ग से प्रयागराज जा रहे बाइक सवार रामनाथ ने बताया कि गैस पाइप लाइन की परियोजना देश हित में है, लेकिन सड़क काटने के बाद उसका निर्माण भी कराया जाना चाहिए। लगभग छह फीट जमीन के अंदर पाइप लाइन बिछने पर ऊपर खेती कराई जा सकती है। काश्तकार जगदीश, पहटू, विनोद ने कार्यदाई संस्था से खेतों में खोदे गए गड्ढों को पाटने की मांग की है।
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