किसान आंदोलन : हसुवा, कुदाल लेकर सड़क पर बैठीं महिलाएं, 20 साल बाद गरमाया 'सेज' मामला; घंटों चली पंचायत
Bhadohi News : भदोही के लक्षापूर बाजार में सैकड़ों किसानों ने अपनी नाराजगी जताई। उनसे बातचीत करने के लिए एडीएम न्यायिक, एएसपी और तहसील प्रशासन के लोग जुटे हुए थे। वहीं, किसान अपनी बात पर अड़े रहे। भदोही-वाराणसी सीमा कंधिया फाटक के पास 208 हेक्टेयर जमीन पर 2003 में एस्पेशल इकोनॉमिक जोन (सेज) बनाए जाने की कार्ययोजना पास की गई थी।
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भदोही-वाराणसी सीमा पर प्रस्तावित स्पेशल इकोनॉमिक जोन (सेज) के लिए जमीन अधिग्रहण का मामला फिर से गर्म हो गया। 20 सालों से चल रहे इस मामले के निपटारे को लेकर बुधवार को मुआवजा प्राप्त कर चुके किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच लक्षापुर पंचायत भवन में चार घंटे तक बातचीत हुई।
मैराथन बातचीत के बाद भी कोई हल नहीं निकल सका। उधर, कंधिया फाटक पर करीब 150 किसान और वहां से दो किमी पहले लक्षापुर के पास भारी पुलिस के साथ अधिकारी तैनात रहे।
भदोही वाराणसी सीमा कंधिया फाटक के पास 208 हेक्टेयर जमीन पर 2003 में एस्पेशल इकोनॉमिक जोन (सेज) बनाए जाने की कार्ययोजना पास की गई थी। कार्यदायी संस्था यूपीएसआईडीसी को यह कार्य सौंपा गया। इसमें 110 हेक्टेयर जमीन किसानों की अधिग्रहित की जा चुकी है, लेकिन बाकी 98 हेक्टयेर जमीन को लेकर किसान जमीन न देने पर अड़ गए और मामला उच्च न्यायालय में पहुंच गया।
इस बीच, किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच दर्जनों बार बातचीत हुई, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। इसी तरह 15 वर्ष गुजर गए और सेज निर्माण की अवधि भी समाप्त हो गई। यूपीएसआइडीसी का मामला खत्म होने के बाद अब यूपीसीडा ने यहां पर डेवलपमेंट के लिए 115 हेक्टेयर जमीन प्रस्ताव रखा हुआ है। जिससे सेज की जमीन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
माैके पर पहुंचे सैकड़ों किसान, किया प्रदर्शन
बुधवार को एडीएम न्यायिक और एएसपी की मौजूदगी में तहसील प्रशासन, फायर ब्रिगेड, पीएसी और तीन थानों की पुलिस फोर्स 10 बजे लक्षापूर बाज़ार में पहुंची। उधर, डीएम से वार्ता होने की खबर पाकर सैकड़ों महिला व पुरुष किसान कंधिया फाटक के पास जमा हो गए। बताया जा रहा है मुआवजा ले चुके कुछ किसानों को बुलाकर लक्षापुर पंचायत भवन में करीब दो बज तक वार्ता चली।
खेत बड़ी संख्या में जमे किसान ने बताया कि तहसीलदार व यूपीसीदा के अधिकारी मौके पर जरूर आये, लेकिन मुआवजा लेने वालों से वार्ता के लिए लक्षापूर बुलाना चाह रहे थे। बताया कि यहां पर सभी किसान बिना मुआवजा वाले ही थे। जिसके बाद अधिकारी वापस लौट गए। बड़ी संख्या में पहुंची महिला किसान हाथों हसुवा लिए जमीन न देने की आवाज भी बुलन्द कर रही थी।
क्या है किसानों की समस्या
सेज के लिए अधिग्रहित हुए जमीन का मुआवजा की सहमति जताने वाले किसानों ने मुआवजा न मिलने और किसानों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग दोहरायी। इसके अलावा 20 वर्ष पहले यूपीएसआईडीसी को जमीन देने व अब यूपीसीडा द्वारा नए रेट में मुआवजा लेने की भी बात रखी।
बोले अधिकारी
मुआवजा प्राप्त कर चुके किसानों को बुलाकर बातचीत की गयी है। कुछ कम किसानों के आने के कारण अभी कोई निष्कर्म नहीं निकाला गया है। जिसके कारण एक और बैठक सोमवार को रखी गयी है। जहां किसानों की बातों को सुना जाएगा। - शिव नारायण सिंह, एडीएम, न्यायिक, भदोही।