सुरियावां। क्षेत्र की सीमा से होकर बह रही वरुणा नदी में बाढ़ के पानी से किसानों राहत नहीं मिल पा रही है। बलीपुर और मर्दनशाहपुर किसानों को अधिक हानि का सामना करना पड़ रहा है। अब तक नदी में आई बाढ़ से सैकड़ों एकड़ धान और दलहनी-तिलहनी फसलें बर्बाद हो जाने से किसानों की बची-खुची आस पर कंडो रोड पानी फेरने का काम कर रहा है। वहीं कृषि विभाग मात्र मृदा परीक्षण, तकनीकी खेती जैसी योजनाओं के नाम पर सरकारी धन को लुटाने तक ही सीमित हो चुका है। समय रहते नदी के पानी की चपेट में आ चुकी धान की फसलों को नहीं बचाया जा सका तो किसान कहीं के नहीं रह जाएंगे। बता दें कि अक्तूबर माह के शुरुआती दौर में भारी बारिश होने के कारण पूरा जनपद पानी-पानी हो उठा था। गांव के गांव जलमग्न होकर बर्बादी के कारण बने थे, जिसका खामियाजा आज भी सुरियावां क्षेत्र के किसानों को उठाना पड़ रहा है। कीर्तिपुर, चकजीतराय, अभिया वन, पुरेमनोहर, तुलापर बहादुरान, छतमा, तिलकनाथ, कैड़ा, बहुता, भीमसेनपुर, अबरना, हरिहरपुर, बलीपुर, मर्दनशाहपुर, पुरेबदल, सांडा, बिसापुर, बिसही, गोदमा, चौगना, गोपीपुर, सुजानपुर, करियांव के किसानों की कमर टूट चुकी है। किसान रामधारी सिंह का तीन एकड़, धर्मराज यादव का दो बीघा, कैलाश यादव का तीन बीघा, जितेंद्र यादव का पांच एकड़, अनिल कुमार सिंह का पांच बीघा, रामशिरोमणि का एक बीघा, अशोक कुमार, माणिक चंद के तीन-तीन बीघे, रामखेलावन के तीन बीघा तो नदी के किनारे रहने वाले हरिश्चंद्र, लालमणि, रामलोचन, मिंतला देवी, सूबेदार, रामअकबाल, मूलचंद, आशाराम, रामनिहोर, मातादयाल, लालता यादव आदि को काफी नुकसान हुआ है। किसानों ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि पानी में डूब कर नष्ट हुई फसल की क्षतिपूर्ति और बची धान की फसल में रोगों के प्रकोप से बचाने के लिए कृषि विभाग से स्थलीय निरीक्षण कराकर दवाओं का छिड़काव कराने की आवश्यकता महसूस की।