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कागजों में विशेषज्ञ, अनट्रेंड चला रहे अल्ट्रासाउंड सेंटर
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जिले में संचालित कई अल्ट्रासाउंड केंद्र और पैथालॉजी सेंटर अनट्रेंड लोग चला रहे हैं। जिससे मरीजों को सही रिपोर्ट न मिलने से बेहतर उपचार नहीं मिल पाता। इससे उन्हें आर्थिक और शारीरिक रूप से नुकसान उठाना पड़ता है। संचालक रेडियोलाजिस्ट की डिग्री और फोटो लगाकर पंजीकरण तो करा लेते हैं, लेकिन उसके बाद विशेषज्ञ नहीं दिखते। सर्दी, खांसी, बुखार से लेकर अन्य गंभीर बीमारियों में दवा देने से पूर्व चिकित्सक जांच कराते हैं। इसमें अल्ट्रासाउंड, पैथालॉजी संग अन्य दूसरी जांच कराई जाती है। जिससे पता चल सके कि मरीज को कौन सी बीमारी है।
अल्ट्रासाउंड और पैथालॉजी सेंटर संचालित करने के लिए पंजीकरण स्वास्थ्य विभाग करता हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में 34 अल्ट्रासाउंड केंद्र और 24 पैथालाजी सेंटर पंजीकृत हैं, हालांकि इनकी संख्या कहीं अधिक है। अल्ट्रासाउंड के रजिस्ट्रेशन के लिए रेडियोलॉजिस्ट संग एक सहायक की तैनाती जरूरी होती है। संचालक प्रमाणपत्र लगाकर पंजीकरण तो करा लेता है, लेकिन उसके बाद अप्रशिक्षित या सहायक के सहारे ही केंद्रों का संचालन करता है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की गाइड लाइन का भी पालन नहीं होता। जिससे जांच कराने वाले मरीजों को सही रिपोर्ट नहीं मिल पाती और वह इलाज के चक्रव्यूह में फंसकर परेशान हो जाता है। नथईपुर निवासी संतोष कुमार ने बताया कि पेट में दर्द होने पर एक माह पूर्व उन्होंने ज्ञानपुर के एक अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जांच कराई। जिसमें पथरी होना बताया गया। वाराणसी में दूसरे केंद्र पर जांच कराने पर पता चला कि सिर्फ गैस की शिकायत थी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक ने कहा कि विशेषज्ञ की मौजूदगी जरूरी है। ऐसे केंद्रों को चिन्हित कर कार्रवाई होगी।
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अल्ट्रासाउंड और पैथालॉजी सेंटर संचालित करने के लिए पंजीकरण स्वास्थ्य विभाग करता हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में 34 अल्ट्रासाउंड केंद्र और 24 पैथालाजी सेंटर पंजीकृत हैं, हालांकि इनकी संख्या कहीं अधिक है। अल्ट्रासाउंड के रजिस्ट्रेशन के लिए रेडियोलॉजिस्ट संग एक सहायक की तैनाती जरूरी होती है। संचालक प्रमाणपत्र लगाकर पंजीकरण तो करा लेता है, लेकिन उसके बाद अप्रशिक्षित या सहायक के सहारे ही केंद्रों का संचालन करता है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की गाइड लाइन का भी पालन नहीं होता। जिससे जांच कराने वाले मरीजों को सही रिपोर्ट नहीं मिल पाती और वह इलाज के चक्रव्यूह में फंसकर परेशान हो जाता है। नथईपुर निवासी संतोष कुमार ने बताया कि पेट में दर्द होने पर एक माह पूर्व उन्होंने ज्ञानपुर के एक अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जांच कराई। जिसमें पथरी होना बताया गया। वाराणसी में दूसरे केंद्र पर जांच कराने पर पता चला कि सिर्फ गैस की शिकायत थी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक ने कहा कि विशेषज्ञ की मौजूदगी जरूरी है। ऐसे केंद्रों को चिन्हित कर कार्रवाई होगी।
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