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Bhadohi News: उगापुर हवाईपट्टी की जमीन से हटेगा अतिक्रमण

Sun, 19 Mar 2023 12:20 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 19 Mar 2023 12:20 AM IST
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Encroachment will be removed
ज्ञानपुर। जिले के कालीन व्यापारियों की ओर से औराई के उगापुर स्थित हवाईपट्टी पर कार्गो टर्मिनल सेवा शुरू करने की मांग को लेकर अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है, लेकिन उगापुर हवाई पट्टी पर अतिक्रमण को लेकर जिला प्रशासन गंभीर हो गया है। पांच हजार एकड़ में बनी हवाई पट्टी की पचास फीसदी से अधिक भूमि पर अतिक्रमण कर लिया गया है। अब अतिक्रमण हटाने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। अंग्रेजी हुकूमत में करीब पांच हजार एकड़ में उगापुर हवाई पट्टी बनी थी। हवाईपट्टी की 50 फीसदी से अधिक जमीन पर अवैध कब्जा हो चुका है। उड्डयन विभाग के अफसरों ने अतिक्रमण हटवाकर चहारदीवारी बनवाई, लेकिन उसके बाद फिर कब्जा हो गया। दिल्ली के ओखला मैदान पर सीईपीसी की ओर से आयोजित 44वें कालीन मेले में जिले के कालीन निर्यातकों ने व्यापार सलाहकार और हस्तशिल्प आयुक्त शुभ्रा से उगापुर हवाईपट्टी से कार्गो टर्मिनल सेवा शुरू करने की मांग की थी। इस पर उन्होंने विचार किए जाने का आश्वासन दिया था। इधर जिला प्रशासन भी उगापुर हवाई पट्टी पर अतिक्रमण को लेकर गंभीर हो गया है। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने बताया कि हवाईपट्टी जिले की राजकीय संपत्ति है। औराई तहसील प्रशासन को पत्र भेजकर भौगोलिक स्थिति की रिपोर्ट मांगी जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद अतिक्रमण हटवाने की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।
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औराई के उगापुर हवाई पट्टी की जिम्मेदारी उड्डयन विभाग पर है। सात साल पहले ही उड्डयन विभाग ने हवाई पट्टी के चारों ओर बाउंड्री वाल बनाकर उसे अपने कब्जे में ले लिया था, लेकिन अतिक्रमणकारियों ने उसे ढहाकर हवाई पट्टी की आधे से अधिक जमीन पर कब्जा जमा लिया है।
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आजादी से पूर्व 1942 में अंग्रेजी सरकार ने सामान ढोने के लिए उगापुर गांव में हवाईपट्टी का निर्माण कराया था। करीब पांच हजार एकड़ में बनी हवाईपट्टी ढाई किमी लंबी और 55 मीटर चौड़ी थी। उस दौर में माधोसिंह स्टेशन से हवाईपट्टी तक आठ किमी लंबी रेल लाइन भी बिछ़ी थी। वहां से प्रतिदिन निर्माण संबंधित सामग्री की ढुलाई होती थी। पांच साल तक मालवाहक एवं सामान्य जहाज यहां उतरते थे। देश की आजादी के बाद इस हवाईपट्टी पर दो हवाई जहाज तकनीकी खराबी के कारण उड़ान नहीं भर सके था। अंग्रेज अफसरों ने विमान का आयल निकाल कर उसे आग के हवाले कर दिया था। उसका मलबा वर्षों तक हवाईपट्टी पर ही पड़ा रहा। बाद में उड्डयन विभाग ने मलबे को अपनी सुपुर्दगी में ले लिया। उसी दौरान हवाईपट्टी से कुछ दूर शुकुलपुर चकबीरा, नकटापुर और गरौली गांव में सुरक्षा कर्मियों एवं कर्मचारियों के लिए आवास भी बने, लेकिन वह भी खंडहर बन चुके हैं। सात साल पूर्व उड्डयन विभाग ने हवाईपट्टी की भूमि के चहुंओर चहारदीवारी बनाकर सुरक्षित किया, लेकिन दुबारा अतिक्रमण हो गया।
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