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अंग्रेजी माध्यम स्कूल: नाम बड़े और दर्शन छोटे

Sun, 22 Sep 2019 12:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2019 12:12 AM IST
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ज्ञानपुर/दुर्गागंज। नाम बड़े और दर्शन छोटे। यह कहावत इन दिनों अंग्रेजी माध्यम स्कूलों पर सटीक बैठ रही है। योगी सरकार ने कान्वेंट की तर्ज पर प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाई के लिए अंग्रेजी माध्यम के स्कूल तो खुलवा दिया, लेकिन शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन की व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। शिक्षकों के चयन में आवेदक न होने से शिक्षा विभाग भी ऐसे स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षकों को तैनात करने में लाचार दिख रहा है। आलम यह है कि 200 से अधिक शिक्षकों कमी सरकार की मंशा को धरातल पर नहीं उतरने दे रहा है।
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शुरुआती शिक्षा को बेहतर करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से तमाम योजनाएं चल रही हैं। 2017 में सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर ही प्राइमरी को आधुनिक किया गया। तीन साल में करीब 80 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का चयन किया गया। इन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले शिक्षकों का ही चयन होना था। दो साल के अंदर तीन बार साक्षात्कार किया गया, लेकिन स्कूलों की सीटें पूरी नहीं हो सकीं। एक साल से अधिक का समय गुजर चुका है, लेकिन अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में 200 शिक्षकों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है। सरकार की गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की मंशा पूरी नहीं होती दिख रही है। इससे अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में एडमिशन कराने वाले अभिभावक अब चिंतित होने लगे हैं।
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केस.1- अभोली ब्लॉक के इंग्लिश मीडियम प्राइमरी स्कूल आनंदडीह में छात्र-छात्राओं की संख्या 280 है। मानक के अनुसार यहां आठ सहायक अध्यापकों की जरूरत है, लेकिन केवल दो सहायक अध्यापकों पर पांच कक्षाएं चलाने की जिम्मेदारी है। प्रधानाध्यापक डॉ. शैलेंद्र यादव ने बताया कि शिक्षकों की कमी को लेकर अभिभावक नाराज रहते हैं। 90 प्रतिशत उपस्थिति है, लेकिन ड्रेस का पैसा 280 के सापेक्ष महज 150 बच्चों का ही आया है।
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केस.2- प्राथमिक विद्यालय भिड़िउरा भी अंग्रेजी माध्यम का स्कूल है। दो साल पूर्व इस विद्यालय का चयन किया गया। स्कूल को आधुनिक कर दिया गया, लेकिन यहां शिक्षकों की कमी से पढ़ाई नहीं हो पा रही है। ग्राम प्रधान मुन्ना पांडेय ने डीएम और बीएसए को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन अब तक किसी की तैनाती नहीं हो सकी।

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अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती के लिए तीन बार साक्षात्कार हुआ, लेकिन अभ्यर्थी कम होने से सीट खाली रह जाती है। जल्द ही विज्ञप्ति निकालकर शिक्षकों का चयन किया जाएगा।
अमित कुमार, बीएसए
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