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डोमोटेक्स-2022
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भदोही। कोविड के चलते गत जनवरी में हनोवर (जर्मनी) में होने वाला डोमोटेक्स रद होने के बाद पूरे दो वर्ष बाद आगामी 13 जनवरी से एक बार फिर से वहां हस्तनिर्मित कॉलीनों और वाल हैंगिंग उत्पादों की प्रदर्शनी लगेगी। व्यावसायिक दृष्टि से इससे भारतीय कालीन निर्माताओं विशेषकर भदोही के निर्यातकों की बड़ी उम्मीदें लगी रहती हैं। यही कारण है कि डोमोटेक्स की तिथियां घोषित होते ही निर्यातक अपने उत्पादों को नए सिरे से तराशने में लग गए हैं।
उल्लेखनीय है कि अंतिम बार जनवरी 2020 में डोमोटेक्स फेयर हो सका था। इसके ठीक बाद कोविड का प्रकोप हो गया था। जिसके बाद से अब तक कोई भी व्यवसाय हो उबरने के लिए प्रयासरत है। यही बात कालीन उद्योग के लिए भी कही जा सकती है। एक वर्ष बाद जनवरी 2021 में तिथियां घोषित होने के बाद अंतत: फेयर को रद करना पड़ा था। और तभी से भारतीय कालीन मंदी के दौर से गुजर रहा है। वर्तमान में देखा जाए तो सैकड़ों व्यावसाइयों वाले इस उद्योग में कुछ दर्जन लोगों के पास ही आपूर्ति के लिए आर्डर हैं।
एक प्रकार से देखा जाए तो पूरे दो वर्ष के बाद डोमोटेक्स में फिर से प्रदर्शनी लगेगी। लेकिन उसमे किस हद तक खरीदारों की भागीदारी होगी इसमे अभी संशय है। हलांकि कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के चेयरमैन उमर हमीद को अब कोई संशय नहीं है। उन्होंने कहा कि डोमोटेक्स में हमारे पवैलियन के लिए 90 प्रतिशत तक बुकिंग हो चुकी है। इसमे अधिकतर लोग भदोही-मिर्जापुर के हैं। उन्होने बताया कि इस प्रदर्शनी भारतीय निर्यातकों की भागीदारी को लेकर दुनिया भर के बायर्स उत्सुक हैं। वे हमसे बार बार पूछ रहे हैं कि भारतीय निर्यातकों की भागीदारी हो रही है या नहीं।
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चेयरमैन ने बताया कि भारतीय निर्यातकों को फायदा हो इसके लिए हम और भी तरीके अपना रहे हैं। दुनियां भर के आयातकों से संपर्क साधा जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि भारतीय कालीन निर्यातक इस बार अपने विशिष्ट उत्पाद के साथ प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए आ रहे हैं।
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कालीन निर्यातकों की प्रतिक्रियाएं--
भारतीय कालीन उद्यमियों में भरपूर उत्साह है। यही कारण है कि सीईपीसी पवेलियन लगभग फूल हो चुका है। डोमोटेक्स के आयोजन में कोई संशय नहीं है। बाजार खुला है आयातकों को पसंद आने पर कीमत मिलना तय है। इम्तीयाज अंसारी, प्रशासनिक सदस्य, सीईपीसी (फोटो-52)
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डोमोटेक्स होगा इसमे संशय नहीं है लेकिन प्रदर्शनी में अमरीका, ब्राजील जैसे देशों के बायरों का आना महत्वपूर्ण है। इन दोनो देशों में कोविड का हाल बहुत अच्छा नहीं है। इसलिए फेयर की सफलता पर यह भी निर्भर करेगा। प्रभात बरनवाल (फोटो-53)
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कपड़ों के फैशन की तरह वाल हैंगिंग, दरियों और कालीनों में फैशन बदल रहा है। हम पूरी उम्मीद के साथ डोमोटेक्स के लिए तैयारी कर रहे हैं। इस प्रदर्शनी से आगामी वर्षों में कालीन उद्योग की चाल को भी समझने में आसानी होगी। श्याम नारायण यादव (फोटो- 54)
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विदेशियों की नई पीढ़ी जिसने काम संभाला है वह यूज एंड थ्रों में विश्वास करने लगी है। इसलिए उन्हें सस्ते कालीन, दरियां पसंद हैं। हम भी महंगे से महंगा और सस्ते से सस्ता उत्पाद तैयार कर रहे हैं ताकि बाजार में बने रहें। जयप्रकाश गुप्ता (फोटो-55)
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हालात चाहे जैसे भी हों। यदि डोमोटेक्स हुआ तो निश्चित रूप से हमें जाना है क्योंकि जब तक अपने उत्पाद बाजार में नहीं उतारेंगे तब तक आपको कोई जनेगा नहीं। दुआ है कि फेयर हो और दुनियां भर से खरीदार वहीं जुटें। हामिद अंसारी (फोटो-56)
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डोमोटेक्स में भागीदारी के लिए बुकिंग हो चुकी है। जनवरी 2020 का फेयर नहीं हो सका था। इसलिए प्रदर्शित करने के लिए उत्पादों की श्रृंखली बड़ी है। उद्योग का आगामी वर्ष इसी फेयर पर टिका होगा। इसलिए उम्मीद है बेहतर होगा। शारिक अंसारी (फोटो-57)
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उल्लेखनीय है कि अंतिम बार जनवरी 2020 में डोमोटेक्स फेयर हो सका था। इसके ठीक बाद कोविड का प्रकोप हो गया था। जिसके बाद से अब तक कोई भी व्यवसाय हो उबरने के लिए प्रयासरत है। यही बात कालीन उद्योग के लिए भी कही जा सकती है। एक वर्ष बाद जनवरी 2021 में तिथियां घोषित होने के बाद अंतत: फेयर को रद करना पड़ा था। और तभी से भारतीय कालीन मंदी के दौर से गुजर रहा है। वर्तमान में देखा जाए तो सैकड़ों व्यावसाइयों वाले इस उद्योग में कुछ दर्जन लोगों के पास ही आपूर्ति के लिए आर्डर हैं।
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एक प्रकार से देखा जाए तो पूरे दो वर्ष के बाद डोमोटेक्स में फिर से प्रदर्शनी लगेगी। लेकिन उसमे किस हद तक खरीदारों की भागीदारी होगी इसमे अभी संशय है। हलांकि कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के चेयरमैन उमर हमीद को अब कोई संशय नहीं है। उन्होंने कहा कि डोमोटेक्स में हमारे पवैलियन के लिए 90 प्रतिशत तक बुकिंग हो चुकी है। इसमे अधिकतर लोग भदोही-मिर्जापुर के हैं। उन्होने बताया कि इस प्रदर्शनी भारतीय निर्यातकों की भागीदारी को लेकर दुनिया भर के बायर्स उत्सुक हैं। वे हमसे बार बार पूछ रहे हैं कि भारतीय निर्यातकों की भागीदारी हो रही है या नहीं।
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चेयरमैन ने बताया कि भारतीय निर्यातकों को फायदा हो इसके लिए हम और भी तरीके अपना रहे हैं। दुनियां भर के आयातकों से संपर्क साधा जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि भारतीय कालीन निर्यातक इस बार अपने विशिष्ट उत्पाद के साथ प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए आ रहे हैं।
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कालीन निर्यातकों की प्रतिक्रियाएं--
भारतीय कालीन उद्यमियों में भरपूर उत्साह है। यही कारण है कि सीईपीसी पवेलियन लगभग फूल हो चुका है। डोमोटेक्स के आयोजन में कोई संशय नहीं है। बाजार खुला है आयातकों को पसंद आने पर कीमत मिलना तय है। इम्तीयाज अंसारी, प्रशासनिक सदस्य, सीईपीसी (फोटो-52)
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डोमोटेक्स होगा इसमे संशय नहीं है लेकिन प्रदर्शनी में अमरीका, ब्राजील जैसे देशों के बायरों का आना महत्वपूर्ण है। इन दोनो देशों में कोविड का हाल बहुत अच्छा नहीं है। इसलिए फेयर की सफलता पर यह भी निर्भर करेगा। प्रभात बरनवाल (फोटो-53)
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कपड़ों के फैशन की तरह वाल हैंगिंग, दरियों और कालीनों में फैशन बदल रहा है। हम पूरी उम्मीद के साथ डोमोटेक्स के लिए तैयारी कर रहे हैं। इस प्रदर्शनी से आगामी वर्षों में कालीन उद्योग की चाल को भी समझने में आसानी होगी। श्याम नारायण यादव (फोटो- 54)
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विदेशियों की नई पीढ़ी जिसने काम संभाला है वह यूज एंड थ्रों में विश्वास करने लगी है। इसलिए उन्हें सस्ते कालीन, दरियां पसंद हैं। हम भी महंगे से महंगा और सस्ते से सस्ता उत्पाद तैयार कर रहे हैं ताकि बाजार में बने रहें। जयप्रकाश गुप्ता (फोटो-55)
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हालात चाहे जैसे भी हों। यदि डोमोटेक्स हुआ तो निश्चित रूप से हमें जाना है क्योंकि जब तक अपने उत्पाद बाजार में नहीं उतारेंगे तब तक आपको कोई जनेगा नहीं। दुआ है कि फेयर हो और दुनियां भर से खरीदार वहीं जुटें। हामिद अंसारी (फोटो-56)
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डोमोटेक्स में भागीदारी के लिए बुकिंग हो चुकी है। जनवरी 2020 का फेयर नहीं हो सका था। इसलिए प्रदर्शित करने के लिए उत्पादों की श्रृंखली बड़ी है। उद्योग का आगामी वर्ष इसी फेयर पर टिका होगा। इसलिए उम्मीद है बेहतर होगा। शारिक अंसारी (फोटो-57)