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डॉक्टर न उपकरण, अस्पताल हो गया हैंडओवर
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ज्ञानपुर/दुर्गागंज। आम आदमी की सुविधा के लिए पांच करोड़ 46 लाख रुपये की लागत से निर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानीपुर दो दिन पहले हैंडओवर जरूर हो गया, लेकिन अभी वह आम आदमी की पहुंच से दूर ही है। उपकरण और डॉक्टर न होने से सीएचसी में ताला लटका है। विभाग का मानना है कि जल्द ही ओपीडी शुरू हो जाएगी।
अभोली ब्लॉक में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी होने से वर्ष 2012 में 100 शैय्या के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वीकृति मिली थी। करीब सात साल के लंबे इंतजार के बाद पिछले दिनों अस्पताल बनकर तैयार हुआ। भवन निर्माण से लेकर अन्य कार्यों की तकनीकी जांच कराए बिना ही नौ जनवरी को सीएचसी हैंडओवर कर दिया गया। जिले के प्रभारी मंत्री जेपी निषाद ने लोकार्पण कर अस्पताल को आम जनता के लिए भले ही समर्पित कर दिया, लेकिन अब भी अस्पताल में ताला लटक रहा है। खास बात यह है कि सीएचसी के लिए न तो डॉक्टर की नियुक्ति हो पाई और न ही उपकरण आए। इससे वहां कोई मरीज अपना उपचार नहीं करा सकता। फिर अस्पताल को हैंडओवर करने का क्या मतलब। अस्पताल का भवन सफेद हाथी साबित होने लगी है। सूत्रों की माने तो कार्यदायी संस्था से तालमेल बैठाकर जिले के एक बड़े अधिकारी ने प्रभारी मंत्री के माध्यम से अस्पताल भवन को हैंडओवर करा दिया। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग एवं संबंधित अधिकारी के बीच सामंजस्य न बैठने की बात भी सामने छनकर आ रही है। प्रकरण में डीएम ने सीएमओ से रिपोर्ट मांग ली है, जिसमें कहा गया है 8कि जब व्यवस्था ही मुकम्मल नहीं हो सकी है तो अस्पताल हैंडओवर कैसे किया गया।
सीएचसी में स्वीकृत पद
ज्ञानपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानीपुर में एक चिकित्साधिकारी, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, रेडियोलाजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, दंत शल्यक, तीन स्टाफ नर्स, दो फार्मासिस्ट, एक लैब टेक्नीशियन, एक्सरे टेक्नीशियन, लिपिक और सहायक शामिल हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की तरफ से भवन को हैंडओवर की तैयारी नहीं थी। अचानक सभी पक्रियाएं की गईं। उपकरण और डॉक्टर के लिए पत्र शासन को भेजा गया है। जल्द ही ओपीडी शुरू करा दी जाएगी।
डॉ. लक्ष्मी सिंह, सीएमओ भदोही
जिले में जो-जो प्रोजेक्ट पूर्ण हो गए थे, उन्हें प्रभारी मंत्री से हैंडओवर कराया गया। डीएम ने स्वास्थ्य विभाग से ओपीडी चालू कराने के लिए निर्देश दिया था। इसमें दूसरे अस्पतालों से दो डॉक्टर और नर्स कुछ दिनों के लिए रखने चाहिए। तीन से चार दिन में अस्पताल शुरू हो जाएगा।
विवेक त्रिपाठी, सीडीओ भदोही
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अभोली ब्लॉक में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी होने से वर्ष 2012 में 100 शैय्या के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वीकृति मिली थी। करीब सात साल के लंबे इंतजार के बाद पिछले दिनों अस्पताल बनकर तैयार हुआ। भवन निर्माण से लेकर अन्य कार्यों की तकनीकी जांच कराए बिना ही नौ जनवरी को सीएचसी हैंडओवर कर दिया गया। जिले के प्रभारी मंत्री जेपी निषाद ने लोकार्पण कर अस्पताल को आम जनता के लिए भले ही समर्पित कर दिया, लेकिन अब भी अस्पताल में ताला लटक रहा है। खास बात यह है कि सीएचसी के लिए न तो डॉक्टर की नियुक्ति हो पाई और न ही उपकरण आए। इससे वहां कोई मरीज अपना उपचार नहीं करा सकता। फिर अस्पताल को हैंडओवर करने का क्या मतलब। अस्पताल का भवन सफेद हाथी साबित होने लगी है। सूत्रों की माने तो कार्यदायी संस्था से तालमेल बैठाकर जिले के एक बड़े अधिकारी ने प्रभारी मंत्री के माध्यम से अस्पताल भवन को हैंडओवर करा दिया। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग एवं संबंधित अधिकारी के बीच सामंजस्य न बैठने की बात भी सामने छनकर आ रही है। प्रकरण में डीएम ने सीएमओ से रिपोर्ट मांग ली है, जिसमें कहा गया है 8कि जब व्यवस्था ही मुकम्मल नहीं हो सकी है तो अस्पताल हैंडओवर कैसे किया गया।
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सीएचसी में स्वीकृत पद
ज्ञानपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानीपुर में एक चिकित्साधिकारी, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, रेडियोलाजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, दंत शल्यक, तीन स्टाफ नर्स, दो फार्मासिस्ट, एक लैब टेक्नीशियन, एक्सरे टेक्नीशियन, लिपिक और सहायक शामिल हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की तरफ से भवन को हैंडओवर की तैयारी नहीं थी। अचानक सभी पक्रियाएं की गईं। उपकरण और डॉक्टर के लिए पत्र शासन को भेजा गया है। जल्द ही ओपीडी शुरू करा दी जाएगी।
डॉ. लक्ष्मी सिंह, सीएमओ भदोही
जिले में जो-जो प्रोजेक्ट पूर्ण हो गए थे, उन्हें प्रभारी मंत्री से हैंडओवर कराया गया। डीएम ने स्वास्थ्य विभाग से ओपीडी चालू कराने के लिए निर्देश दिया था। इसमें दूसरे अस्पतालों से दो डॉक्टर और नर्स कुछ दिनों के लिए रखने चाहिए। तीन से चार दिन में अस्पताल शुरू हो जाएगा।
विवेक त्रिपाठी, सीडीओ भदोही