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जिला जेल : जर्जर दीवारों के बीच क्षमता से अधिक कैदी

Sat, 15 May 2021 05:10 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 15 May 2021 05:10 PM IST
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District Jail: prisoners over capacity between dilapidated walls
ज्ञानपुर। नगर में स्थित जिला जेल को जिला कारागार का दर्जा भले ही मिल चुका है लेकिन अंदर की स्थिति अभी उप कारागार की तरह ही है। जर्जर दीवारों के बीच क्षमता से अधिक बंदी भरे पड़े हैं। आलम यह है कि बंदियों की मौत से यहां दो बार बवाल हो चुका है तो वहीं चोरी के आरोप में निरुद्ध बंदी मुसवा दीवार फांद कर प्रशासन को चुनौती भी दे चुका है।
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ढाई दशक पूर्व जनपद सृजन के बाद अभी तक जिला कारागार उपेक्षा का शिकार होने के कारण बंदी रक्षकों एवं अन्य कर्मियों की कमी की समस्या से जूझ रहा है। कर्मियों की अनुपलब्धता के कारण कारागार में कानून व्यवस्था को मुकम्मल बनाए रखना जेल अधीक्षक और कर्मचारियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। जिला कारागार में लचर सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहा पर 114 कैदियों को रखने की क्षमता है, जबकि वर्तमान में 326 कैदी यहां पर रखे गए हैं। ऐसे में सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि जेल के अंदर की स्थिति क्या होगी। वरिष्ठ पदों को छोड़ दिया जाय, तो प्रबंधन की रीढ़ माने जाने वाले बंदीरक्षक, वरिष्ठ बंदीरक्षक, सफाईकर्मी आदि के पद रिक्त हैं।
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नियमानुसार प्रति पांच कैदियों पर एक बंदी रक्षक होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में बंदी रक्षकों का स्वीकृत पद 41 है और यहां पर 20 बंदी रक्षक तैनात हैं। दो साल पूर्व बंदी की मौत से गुस्साए अन्य बंदियों ने दो बार जेल के अंदर बवाल कर चुके हैं। सिंगल बाउंड्री वाले इस कारागार की दीवार को फांद कर भी बंदी फरार हो चुके हैं। वर्तमान में जिला जेल की हकीकत यह है कि जनपद सृजन के पूर्व यहां पर एक- दो दिनों के लिए बंदियों को रखने की व्यवस्था थी।
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दरअसल जनपद सृजन के बाद इसे जिला कारागार का दर्जा दे दिया गया है जबकि यहां पर अफसरों और कर्मचारियों का पद उप कारागार के बराबर है। नियमानुसार जिला जेल में दो बाउंड्रीवाल होते हैं। जिला जेल के लिए जिले से प्रस्ताव भेजा जा चुका है। भूमि भी जेल के नाम दर्ज हो चुकी है। शासन से अब तक बजट न मिलने से निर्माण भी शुरू नहीं हो सका है। क्षमता से अधिक कैदी होने से बैरक में ही सामाजिक दूरी का पालन मुश्किल हो चुका है। जेलर राजेश कुमार ने कहा कि नए जेल का बजट अप्रैल में आना था, लेकिन नहीं आ सका। कोरोना संक्रमण के कारण 18 कैदी अंतरिम बेल पर छोड़े गए हैं। नया कारागार बनने से ही कैदियों की समस्या खत्म होगी।
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