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सीडीपीओ डीघ की बढ़ी मुश्किलें, कार्रवाई की संस्तुति
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ज्ञानपुर। बाल विकास परियोजना अधिकारी डीघ की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दलित महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के उत्पीड़न के मामले में डीएम राजेंद्र प्रसाद ने उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए प्रमुख सचिव बाल विकास एवं पुष्टाहार को पत्र लिख दिया है। जांच में मामला सही मिलने के बाद डीएम की ओर से कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है।
डीघ ब्लॉक के सरायजगदीश गांव निवासी मुन्नालाल पुत्र अर्जुन प्रसाद ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में प्रार्थना पत्र भेजकर गुहार लगाई थी। कहा था कि उसकी पत्नी सुमित्रा देवी सरायजगदीश आंगनबाड़ी केंद्र तृतीय पर कार्यकर्ता है। पत्र में सीडीपीओ डीघ सुजीत कुमार पर आरोप लगाया था कि वह 10 हजार की रिश्वत मांग रहे थे। न देने पर उसकी पत्नी का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। राजू सिंह नामक एक फर्जी व्यक्ति से शिकायत कर आए दिन मानसिक रूप से परेशान किया गया। आयोग से पत्र आने के बाद डीएम राजेंद्र प्रसाद ने प्रकरण की जांच कराई। इसमें सीडीपीओ की ओर से गाली गलौज के साक्ष्य तो नहीं मिले, लेकिन फर्जी शिकायत कराकर उत्पीड़न की बात सच निकली। उनकी तरफ से शासकीय नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से कार्य किया गया। इससे बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की छवि धूमिल हुई है। जांच आख्या मिलने पर डीएम राजेंद्र प्रसाद ने सीडीपीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। वहीं दूसरी ओर बाल विकास परियोजना अधिकारी डीघ सुजीत कुमार सिंह ने कहा कि महिला फर्जी तरीके से नौकरी कर रही थी। सेवा समाप्ति की नोटिस जारी होने के बाद उसने मेरे खिलाफ आरोप लगाए।
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डीघ ब्लॉक के सरायजगदीश गांव निवासी मुन्नालाल पुत्र अर्जुन प्रसाद ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में प्रार्थना पत्र भेजकर गुहार लगाई थी। कहा था कि उसकी पत्नी सुमित्रा देवी सरायजगदीश आंगनबाड़ी केंद्र तृतीय पर कार्यकर्ता है। पत्र में सीडीपीओ डीघ सुजीत कुमार पर आरोप लगाया था कि वह 10 हजार की रिश्वत मांग रहे थे। न देने पर उसकी पत्नी का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। राजू सिंह नामक एक फर्जी व्यक्ति से शिकायत कर आए दिन मानसिक रूप से परेशान किया गया। आयोग से पत्र आने के बाद डीएम राजेंद्र प्रसाद ने प्रकरण की जांच कराई। इसमें सीडीपीओ की ओर से गाली गलौज के साक्ष्य तो नहीं मिले, लेकिन फर्जी शिकायत कराकर उत्पीड़न की बात सच निकली। उनकी तरफ से शासकीय नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से कार्य किया गया। इससे बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की छवि धूमिल हुई है। जांच आख्या मिलने पर डीएम राजेंद्र प्रसाद ने सीडीपीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। वहीं दूसरी ओर बाल विकास परियोजना अधिकारी डीघ सुजीत कुमार सिंह ने कहा कि महिला फर्जी तरीके से नौकरी कर रही थी। सेवा समाप्ति की नोटिस जारी होने के बाद उसने मेरे खिलाफ आरोप लगाए।
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