मोढ़। क्षेत्र के विरभद्रपुर करियांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को वाराणसी से आए पंडित आनंद पांडेय ने सृष्टि, जीव के बंधन, अवतारों और भक्ति व आत्मज्ञान से मुक्ति का सुंदर वर्णन किया। बताया कि हिरण्याक्ष दैत्य ने पृथ्वी को रसातल में छिपा दिया था। भगवान वराह ने अवतार लिया। उन्होंने हिरण्याक्ष का वध कर देवताओं को भयमुक्त किया। कहा कि भगवान की भक्ति और सत्संग परम कल्याण का मार्ग है।
उन्होंने कहाकि यह प्रसंग सिखाता है कि संकट में भगवान रक्षा करते हैं। उन्होंने बताया कि कपिल भगवान ने माता देवहूति को संसार, जीव, प्रकृति और आत्मा-परमात्मा का ज्ञान दिया। उन्होंने बताया कि विषयों की आसक्ति बंधन का कारण है, जबकि सत्संग, भक्ति और आत्मज्ञान मुक्ति का मार्ग हैं। उन्होंने बताया कि सृष्टि का मूल भगवान हैं और जीव का वास्तविक स्वरूप आत्मा है। संसार के प्रति आसक्ति बंधन का कारण है, जबकि भगवान की भक्ति और सत्संग परम कल्याण का मार्ग है। कपिल भगवान ने विशेष रूप से भक्ति की महिमा बताई। मुख्य यजमान अभिषेक पांडेय ने व्यासपीठ की आरती उतारी। इस दौरान पंडित दिनेश पांडेय, विशाल दुबे शास्त्री आदि मौजूद रहे।