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तमाम कोशिशों के बाद भी बढ़ रहा कुपोषण का आंकड़ा
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कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को पोषित करके उन्हें स्वस्थ बनाने, कुपोषण को मात देने के लिए गांव से लेकर शहर तक तमाम अभियान चलाए जा रहे हैं, इसके बावजूद कालीन नगरी में कुपोषण का आंकड़ा बढ़ रहा है। कहीं आंगनबाड़ी केंद्रों पर ठीक से देखभाल न होने तो कहीं परिवार के लोगों द्वारा ही ठीक से ध्यान न दिए जाने के कारण बढ़ रही संख्या चिंता बढ़ा रही है। हालांकि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग का दावा है कि कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ने का असली कारण जांच में बढ़ोत्तरी है।
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो करीब एक साल पहले दिसंबर-जनवरी के महीने में कुपोषित बच्चों की संख्या सात हजार 600 से कुछ ज्यादा और अति कुपोषित बच्चों की संख्या तीन हजार तीन सौ से कुछ ज्यादा थी। वहीं मई महीने में कुपोषित बच्चों की संख्या पांच हजार सात सौ और जून में छह हजार पांच सौ हो गई। अति कुपोषित बच्चों की संख्या मई में 2700 और जून में तीन हजार हो गई। बीते माह यानी नवंबर में कराए गए वजन दिवस में जो आंकड़ा सामने आया है वह चिंता बढ़ा रहा है। जिले में कुल 5873 बच्चे अति कुपोषित और 10 हजार 704 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में हैं। गंभीर अति कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए महाराजा चेत सिंह जिला अस्पताल में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) बना है। यहां एक प्रभारी और एक न्यूट्रिशियन समेत चार स्टॉफ नर्स रखे गए है। यहां महज दस बेड ही हैं। यहां इसके अलावा केयर टेकर, कुक, केयर टेकर की भी मौजूदगी है। अप्रैल से लेकर अब तक 115 कुपोषित बच्चों का इलाज हो चुका है। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी मंजू वर्मा का कहना है कि जिले में 5873 बच्चे अति कुपोषित और 10704 बच्चे कुपोषित हैं। वजन दिवस में बच्चों की लंबाई व वजन जांच कर चिह्नित किया जाता है। हालांकि कुपोषित बच्चों की संख्या पहले की अपेक्षा बढ़ी है। संख्या बढ़ने की वजह यह है कि पहले आंगनबाड़ी केंद्रों पर मशीन कम थी, इसलिए जांच कम हो रही थी। अब जब जांच बढ़ी है तो संख्या भी बढ़ी है।
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विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो करीब एक साल पहले दिसंबर-जनवरी के महीने में कुपोषित बच्चों की संख्या सात हजार 600 से कुछ ज्यादा और अति कुपोषित बच्चों की संख्या तीन हजार तीन सौ से कुछ ज्यादा थी। वहीं मई महीने में कुपोषित बच्चों की संख्या पांच हजार सात सौ और जून में छह हजार पांच सौ हो गई। अति कुपोषित बच्चों की संख्या मई में 2700 और जून में तीन हजार हो गई। बीते माह यानी नवंबर में कराए गए वजन दिवस में जो आंकड़ा सामने आया है वह चिंता बढ़ा रहा है। जिले में कुल 5873 बच्चे अति कुपोषित और 10 हजार 704 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में हैं। गंभीर अति कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए महाराजा चेत सिंह जिला अस्पताल में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) बना है। यहां एक प्रभारी और एक न्यूट्रिशियन समेत चार स्टॉफ नर्स रखे गए है। यहां महज दस बेड ही हैं। यहां इसके अलावा केयर टेकर, कुक, केयर टेकर की भी मौजूदगी है। अप्रैल से लेकर अब तक 115 कुपोषित बच्चों का इलाज हो चुका है। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी मंजू वर्मा का कहना है कि जिले में 5873 बच्चे अति कुपोषित और 10704 बच्चे कुपोषित हैं। वजन दिवस में बच्चों की लंबाई व वजन जांच कर चिह्नित किया जाता है। हालांकि कुपोषित बच्चों की संख्या पहले की अपेक्षा बढ़ी है। संख्या बढ़ने की वजह यह है कि पहले आंगनबाड़ी केंद्रों पर मशीन कम थी, इसलिए जांच कम हो रही थी। अब जब जांच बढ़ी है तो संख्या भी बढ़ी है।
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