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सिर पर झूल रही मौत, जिम्मेदार अंजान
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ज्ञानपुर/सुरियावां। ग्रामीण अंचलों में बिजली आपूर्ति बेहतर करने के लिए भले ही सरकार ने करोड़ों खर्च कर दिए, लेकिन धरातल पर हकीकत अलग ही है। अब भी सिर पर जर्जर-लटकते मौत रूपी तार लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। जिम्मेदार सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हैं। कई घटनाएं होने के बाद भी अफसरों की अफसरों की आंखें नहीं खुल रही हैं।
करीब 20 लाख की आबादी वाले जिले में 561 ग्राम पंचायतें और सात नगर निकाय हैं। जिले के दो उपखंडों के 22 उपकेंद्रों और 80 से अधिक फीडरों के माध्यम से बेहतर बिजली आपूर्ति की जाती है। एक दशक में बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना, प्रधानमंत्री सहज जन बिजली योजना के माध्यम से हर घर को रोशन करने पर करोड़ों रुपये खर्च हो गए, लेकिन आज भी ग्रामीण इलाकों में बांस और बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है। डीघ ब्लॉक के दरवांसी, गोधना, बसही समेत कई ऐसे गांव हैं, जहां बस्तियों में लकड़ी के सहारे करंट दौड़ाया जा रहा है। हवा और बारिश के चलते बांस-बल्ली के सहारे लगे तार काफी नीचे लटक रहे हैं। अक्सर हो रही दुर्घटनाओं के बाद भी जर्जर और लटकते तारों को नहीं हटाया गया। कमोबेश यही हाल नगरीय इलाकों की है।
सुरियावां के नेतानगर, मुख्य चौराहा आदि क्षेत्र में भी जमीन से पांच फीट ऊपर तक तार लटक रहे। ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही, सुरियावां जैसे बाजारों में अंडरग्राउंड वायरिंग का दावा तो किया गया, लेकिन अब तक वह कागजों में ही रह गया। हर जगह लटकते जर्जर तार आम आदमी की मुसीबत को बढ़ाता है। सुविधाओं के नाम पर लाखों खर्च करने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत दावों को खोखला साबित कर रही है। अधिशासी अभियंता ज्ञानपुर मनोज कुमार सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना से सभी बस्तियों में खंभे लग चुके हैं। कुछ मजरे कोविड-19 के कारण पूर्ण नहीं हो सके। बारिश के बाद उसे करा दिया जाएगा।
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एक सप्ताह में चार बेजुबानों की गई जान
ज्ञानपुर। जर्जर-लटकते तारों के अधिकतर शिकार बेजुबान होते हैं। मोढ़, चौरी, डीघ और सुरियावां में पिछले एक सप्ताह में चार मवेशियों की मौत हो चुकी है। सभी स्थानों पर लटकते तार उनके लिए मुसीबत बने। करीब एक साल पूर्व ज्ञानपुर से सटे अछवर गांव में एक युवक की मौत भी लटकते तार के कारण हो चुकी है।
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करीब 20 लाख की आबादी वाले जिले में 561 ग्राम पंचायतें और सात नगर निकाय हैं। जिले के दो उपखंडों के 22 उपकेंद्रों और 80 से अधिक फीडरों के माध्यम से बेहतर बिजली आपूर्ति की जाती है। एक दशक में बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना, प्रधानमंत्री सहज जन बिजली योजना के माध्यम से हर घर को रोशन करने पर करोड़ों रुपये खर्च हो गए, लेकिन आज भी ग्रामीण इलाकों में बांस और बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है। डीघ ब्लॉक के दरवांसी, गोधना, बसही समेत कई ऐसे गांव हैं, जहां बस्तियों में लकड़ी के सहारे करंट दौड़ाया जा रहा है। हवा और बारिश के चलते बांस-बल्ली के सहारे लगे तार काफी नीचे लटक रहे हैं। अक्सर हो रही दुर्घटनाओं के बाद भी जर्जर और लटकते तारों को नहीं हटाया गया। कमोबेश यही हाल नगरीय इलाकों की है।
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सुरियावां के नेतानगर, मुख्य चौराहा आदि क्षेत्र में भी जमीन से पांच फीट ऊपर तक तार लटक रहे। ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही, सुरियावां जैसे बाजारों में अंडरग्राउंड वायरिंग का दावा तो किया गया, लेकिन अब तक वह कागजों में ही रह गया। हर जगह लटकते जर्जर तार आम आदमी की मुसीबत को बढ़ाता है। सुविधाओं के नाम पर लाखों खर्च करने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत दावों को खोखला साबित कर रही है। अधिशासी अभियंता ज्ञानपुर मनोज कुमार सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना से सभी बस्तियों में खंभे लग चुके हैं। कुछ मजरे कोविड-19 के कारण पूर्ण नहीं हो सके। बारिश के बाद उसे करा दिया जाएगा।
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एक सप्ताह में चार बेजुबानों की गई जान
ज्ञानपुर। जर्जर-लटकते तारों के अधिकतर शिकार बेजुबान होते हैं। मोढ़, चौरी, डीघ और सुरियावां में पिछले एक सप्ताह में चार मवेशियों की मौत हो चुकी है। सभी स्थानों पर लटकते तार उनके लिए मुसीबत बने। करीब एक साल पूर्व ज्ञानपुर से सटे अछवर गांव में एक युवक की मौत भी लटकते तार के कारण हो चुकी है।