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जिले में डीएपी और यूरिया का संकट गहराया
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ज्ञानपुर। रबी सीजन की प्रमुख गेहूं फसल की बोआई शुरू हो चुकी है। इसी के साथ उर्वरक (डीएपी) और यूरिया को लेकर संकट गहराने लगा है। साधन सहकारी समितियों पर उर्वरक की उपलब्धता को लेकर भले ही तमाम दावे हो रहे हैं, लेकिन हकीकत में अधिकतर समितियां खाली हैं। डीएपी और यूरिया की लक्ष्य के सापेक्ष कम आमद होने से किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। किसान समितियों का चक्कर काटने के साथ खुले बाजार से महंगे दर पर डीएपी लेने को विवश हो रहे हैं। किसानों को खाद-बीज की सुविधा देने के लिए जिले में कुल 52 साधन सहकारी समितियों की स्थापना की गई है। इसमें से 12 समिति विभिन्न कारणों से बंद हैं तो 40 को संचालित किया जा रहा है।
समितियों से उर्वरक वितरण के लिए तय लक्ष्य और उपलब्धता देखी जाए तो रबी अभियान में 2766 मीट्रिक टन डीएपी वितरण का लक्ष्य है। जबकि अभी 2208 मीट्रिक टन डीएपी की ही आमद हो सकी है। ऐसे में कई समितियां खाली पड़ी हैं। किसान समितियों का चक्कर लगाकर निराश होकर वापस लौट रहे हैं। इससे बोआई का कार्य प्रभावित होने के किसान चिंतित हैं। इसी तरह यूरिया के तय लक्ष्य 7459 के सापेक्ष 2030 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी है।
- इन दिनों गेहूं की बोआई का दौर शुरू हो चुका है। डीएपी को लेकर किल्लत है। समितियों पर डाई खाद उपलब्ध न होने से किसानों को प्राइवेट दुकानों का सहारा लेना पड़ा है। जहां महंगी कीमत ली जा रही है तो डीएपी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़ा रहता है। सरकार को ध्यान देकर पर्याप्त व समय से डीएपी की आपूर्ति करानी चाहिए।- निर्भय सिंह, दरवांसी
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- समितियों पर डीएपी नहीं मिल रही है। कई दिन से परेशान हैं। इसी तरह अन्य किसान भी दर-दर भटक रहे हैं। खुले बाजार से महंगे दर पर डीएपी की बिक्री हो रही है। मजबूरी में किसान खरीद रहे हैं।- शिवपूजन, दरवांसी
- किसानों को डीएपी के लिए परेशान नहीं होने दिया जाएगा। 1500 एमटी की रैक मिर्जापुर में फंसी है। वहां पर वाहन लेने के लिए भेजा गया है। जल्द ही और डीएपी आएगी, जिसे समितियों पर भेजकर वितरित कराया जाएगा। खुले बाजार में महंगे दर पर डीएपी और यूरिया वितरण की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। रविद्र मिश्रा, सहायक निबंधक, सहकारी समितियां।
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समितियों से उर्वरक वितरण के लिए तय लक्ष्य और उपलब्धता देखी जाए तो रबी अभियान में 2766 मीट्रिक टन डीएपी वितरण का लक्ष्य है। जबकि अभी 2208 मीट्रिक टन डीएपी की ही आमद हो सकी है। ऐसे में कई समितियां खाली पड़ी हैं। किसान समितियों का चक्कर लगाकर निराश होकर वापस लौट रहे हैं। इससे बोआई का कार्य प्रभावित होने के किसान चिंतित हैं। इसी तरह यूरिया के तय लक्ष्य 7459 के सापेक्ष 2030 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी है।
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- इन दिनों गेहूं की बोआई का दौर शुरू हो चुका है। डीएपी को लेकर किल्लत है। समितियों पर डाई खाद उपलब्ध न होने से किसानों को प्राइवेट दुकानों का सहारा लेना पड़ा है। जहां महंगी कीमत ली जा रही है तो डीएपी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़ा रहता है। सरकार को ध्यान देकर पर्याप्त व समय से डीएपी की आपूर्ति करानी चाहिए।- निर्भय सिंह, दरवांसी
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- समितियों पर डीएपी नहीं मिल रही है। कई दिन से परेशान हैं। इसी तरह अन्य किसान भी दर-दर भटक रहे हैं। खुले बाजार से महंगे दर पर डीएपी की बिक्री हो रही है। मजबूरी में किसान खरीद रहे हैं।- शिवपूजन, दरवांसी
- किसानों को डीएपी के लिए परेशान नहीं होने दिया जाएगा। 1500 एमटी की रैक मिर्जापुर में फंसी है। वहां पर वाहन लेने के लिए भेजा गया है। जल्द ही और डीएपी आएगी, जिसे समितियों पर भेजकर वितरित कराया जाएगा। खुले बाजार में महंगे दर पर डीएपी और यूरिया वितरण की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। रविद्र मिश्रा, सहायक निबंधक, सहकारी समितियां।