फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   culture

जीवित्पुत्ररेका व्रत आज, जमकर हुई खरीदारी

Sun, 22 Sep 2019 12:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2019 12:09 AM IST
विज्ञापन
culture
ज्ञानपुर। पुत्र की सलामती की कामना को लेकर रखा जाने वाला कठोर जीवित्पुत्रिका व्रत और पूजा रविवार को होगी। इसके लिए शनिवार को देर शाम तक सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया। तमाम महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पुत्र की प्राप्ति और उनकी सलामती के लिए जीवित्पुत्रिका माता से आशीर्वाद प्राप्त करेंगी।
विज्ञापन

जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर शनिवार को जिले के बाजारों में पूरे दिन फल और पूजा के सामान की खरीदारी का दौर चला। फल मंडियों में खरीदारों की भारी भीड़ रही। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। त्योहार को देखते हुए फल मंडियों में पूजा के फलों पर महंगाई का असर देखा गया। फलों की कीमतों में 20 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। नाशपाती और संतरा की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कल तक 30 रुपये किलो बिकने वाली नाशपाती इस समय 100 रुपये किलो बिक रही है। 30 से 40 रुपये दर्जन के रेट से मिलने वाला केला शनिवार को 50 रुपये दर्जन बिक रहा था। गोपीगंज, भदोही समेत जिले के अन्य बाजारों में भी जीवित्पुत्रिका को लेकर खरीदारी का दौर चलता रहा। उधर पूजा को लेकर मंदिरों और सार्वजनिक महत्व के अन्य धार्मिक स्थलों पर भी जीवित्पुत्रिका की तैयारी की गईं। मंदिरों में साफ-सफाई और सरोवरों के किनारे बेदियां बनाने के लिए तैयारी की जा रही थी। ज्ञानपुर नगर के हृदयस्थल हरिहरनाथ धाम के ज्ञान सरोवर की सीढ़ियां और चबूतरे की साफ-सफाई की गई। यहां महिलाएं गोंठ बनाकर जीवित्पुत्रिका पूजन करतीं हैं। साथ ही जीमूतवाहन के महात्म्य से जुड़ी कथाएं कही-सुनी जाती हैं।
विज्ञापन

...
फल- रेट पहले- रेट अब
केला- 30 से 40 - 50
अनार- 60 से 80- 120
पपीता- 30 - 80
नाशपाती- 30- 100
संतरा- 40 से 50- 100
--
23 सितंबर को होगा पारण
जीवित्पुत्रिका व्रत का पारण 23 सितंबर को अष्टमी तिथि के समापन के बाद होगा। डुहियां के आचार्य पं. दीनानाथ शुक्ल ने कहा कि काशी से प्रकाशित महावीर पंचांग के अनुसार जीवित्पुत्रिका का व्रत माताएं 22 सितंबर को करेंगी, जबकि पारण 23 को होगा। जिउतिया का व्रत करने से पुत्र दीर्घायु और सुरक्षित रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-
जीवित्पुत्रिका व्रत का महात्म्य
सनातनी परंपरा में मान्यता है कि जीवित्पुत्रिका व्रत के साथ गंधर्वों के राजकुमार जीमूतवाहन की कथा जुड़ी है। आश्विन मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के प्रदोषकाल में पुत्रवती महिलाएं जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। कैलाश पर्वत पर भगवान शिव माता पार्वती को कथा सुनाते हुए बताते हैं कि आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन उपवास रखकर जो स्त्री सायं प्रदोषकाल में जीमूतवाहन की पूजा करती हैं और कथा सुनने के बाद आचार्य को दक्षिणा देती हैं, वह पुत्र-पौत्रों का पूर्ण सुख प्राप्त करती हैं। व्रत का पारण दूसरे दिन अष्टमी तिथि की समाप्ति के पश्चात किया जाता है। यह व्रत अपने नाम के अनुरूप फल देने वाला है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed