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जीवित्पुत्ररेका व्रत आज, जमकर हुई खरीदारी
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ज्ञानपुर। पुत्र की सलामती की कामना को लेकर रखा जाने वाला कठोर जीवित्पुत्रिका व्रत और पूजा रविवार को होगी। इसके लिए शनिवार को देर शाम तक सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया। तमाम महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पुत्र की प्राप्ति और उनकी सलामती के लिए जीवित्पुत्रिका माता से आशीर्वाद प्राप्त करेंगी।
जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर शनिवार को जिले के बाजारों में पूरे दिन फल और पूजा के सामान की खरीदारी का दौर चला। फल मंडियों में खरीदारों की भारी भीड़ रही। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। त्योहार को देखते हुए फल मंडियों में पूजा के फलों पर महंगाई का असर देखा गया। फलों की कीमतों में 20 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। नाशपाती और संतरा की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कल तक 30 रुपये किलो बिकने वाली नाशपाती इस समय 100 रुपये किलो बिक रही है। 30 से 40 रुपये दर्जन के रेट से मिलने वाला केला शनिवार को 50 रुपये दर्जन बिक रहा था। गोपीगंज, भदोही समेत जिले के अन्य बाजारों में भी जीवित्पुत्रिका को लेकर खरीदारी का दौर चलता रहा। उधर पूजा को लेकर मंदिरों और सार्वजनिक महत्व के अन्य धार्मिक स्थलों पर भी जीवित्पुत्रिका की तैयारी की गईं। मंदिरों में साफ-सफाई और सरोवरों के किनारे बेदियां बनाने के लिए तैयारी की जा रही थी। ज्ञानपुर नगर के हृदयस्थल हरिहरनाथ धाम के ज्ञान सरोवर की सीढ़ियां और चबूतरे की साफ-सफाई की गई। यहां महिलाएं गोंठ बनाकर जीवित्पुत्रिका पूजन करतीं हैं। साथ ही जीमूतवाहन के महात्म्य से जुड़ी कथाएं कही-सुनी जाती हैं।
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फल- रेट पहले- रेट अब
केला- 30 से 40 - 50
अनार- 60 से 80- 120
पपीता- 30 - 80
नाशपाती- 30- 100
संतरा- 40 से 50- 100
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23 सितंबर को होगा पारण
जीवित्पुत्रिका व्रत का पारण 23 सितंबर को अष्टमी तिथि के समापन के बाद होगा। डुहियां के आचार्य पं. दीनानाथ शुक्ल ने कहा कि काशी से प्रकाशित महावीर पंचांग के अनुसार जीवित्पुत्रिका का व्रत माताएं 22 सितंबर को करेंगी, जबकि पारण 23 को होगा। जिउतिया का व्रत करने से पुत्र दीर्घायु और सुरक्षित रहता है।
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जीवित्पुत्रिका व्रत का महात्म्य
सनातनी परंपरा में मान्यता है कि जीवित्पुत्रिका व्रत के साथ गंधर्वों के राजकुमार जीमूतवाहन की कथा जुड़ी है। आश्विन मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के प्रदोषकाल में पुत्रवती महिलाएं जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। कैलाश पर्वत पर भगवान शिव माता पार्वती को कथा सुनाते हुए बताते हैं कि आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन उपवास रखकर जो स्त्री सायं प्रदोषकाल में जीमूतवाहन की पूजा करती हैं और कथा सुनने के बाद आचार्य को दक्षिणा देती हैं, वह पुत्र-पौत्रों का पूर्ण सुख प्राप्त करती हैं। व्रत का पारण दूसरे दिन अष्टमी तिथि की समाप्ति के पश्चात किया जाता है। यह व्रत अपने नाम के अनुरूप फल देने वाला है।
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जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर शनिवार को जिले के बाजारों में पूरे दिन फल और पूजा के सामान की खरीदारी का दौर चला। फल मंडियों में खरीदारों की भारी भीड़ रही। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। त्योहार को देखते हुए फल मंडियों में पूजा के फलों पर महंगाई का असर देखा गया। फलों की कीमतों में 20 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। नाशपाती और संतरा की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कल तक 30 रुपये किलो बिकने वाली नाशपाती इस समय 100 रुपये किलो बिक रही है। 30 से 40 रुपये दर्जन के रेट से मिलने वाला केला शनिवार को 50 रुपये दर्जन बिक रहा था। गोपीगंज, भदोही समेत जिले के अन्य बाजारों में भी जीवित्पुत्रिका को लेकर खरीदारी का दौर चलता रहा। उधर पूजा को लेकर मंदिरों और सार्वजनिक महत्व के अन्य धार्मिक स्थलों पर भी जीवित्पुत्रिका की तैयारी की गईं। मंदिरों में साफ-सफाई और सरोवरों के किनारे बेदियां बनाने के लिए तैयारी की जा रही थी। ज्ञानपुर नगर के हृदयस्थल हरिहरनाथ धाम के ज्ञान सरोवर की सीढ़ियां और चबूतरे की साफ-सफाई की गई। यहां महिलाएं गोंठ बनाकर जीवित्पुत्रिका पूजन करतीं हैं। साथ ही जीमूतवाहन के महात्म्य से जुड़ी कथाएं कही-सुनी जाती हैं।
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फल- रेट पहले- रेट अब
केला- 30 से 40 - 50
अनार- 60 से 80- 120
पपीता- 30 - 80
नाशपाती- 30- 100
संतरा- 40 से 50- 100
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23 सितंबर को होगा पारण
जीवित्पुत्रिका व्रत का पारण 23 सितंबर को अष्टमी तिथि के समापन के बाद होगा। डुहियां के आचार्य पं. दीनानाथ शुक्ल ने कहा कि काशी से प्रकाशित महावीर पंचांग के अनुसार जीवित्पुत्रिका का व्रत माताएं 22 सितंबर को करेंगी, जबकि पारण 23 को होगा। जिउतिया का व्रत करने से पुत्र दीर्घायु और सुरक्षित रहता है।
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जीवित्पुत्रिका व्रत का महात्म्य
सनातनी परंपरा में मान्यता है कि जीवित्पुत्रिका व्रत के साथ गंधर्वों के राजकुमार जीमूतवाहन की कथा जुड़ी है। आश्विन मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के प्रदोषकाल में पुत्रवती महिलाएं जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। कैलाश पर्वत पर भगवान शिव माता पार्वती को कथा सुनाते हुए बताते हैं कि आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन उपवास रखकर जो स्त्री सायं प्रदोषकाल में जीमूतवाहन की पूजा करती हैं और कथा सुनने के बाद आचार्य को दक्षिणा देती हैं, वह पुत्र-पौत्रों का पूर्ण सुख प्राप्त करती हैं। व्रत का पारण दूसरे दिन अष्टमी तिथि की समाप्ति के पश्चात किया जाता है। यह व्रत अपने नाम के अनुरूप फल देने वाला है।