फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   Crisis on wheat cultivation due to rising mercury

चढ़ते पारे से गेहूं की खेती पर संकट

Thu, 07 Jan 2021 11:14 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 07 Jan 2021 11:14 PM IST
विज्ञापन
Crisis on wheat cultivation due to rising mercury
ज्ञानपुर। तापमान में उतार-चढ़ाव से मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। जनवरी की शुरुआत में ही अधिकतम पारा चढ़कर 27 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। इसे गेहूं की खेती के लिहाज से खतरे की घंटी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं के लिए कम तापमान चाहिए। यही स्थिति बनी रही तो पैदावार 20 से 25 फीसदी तक प्रभावित हो सकती है।
विज्ञापन

दिसंबर में शुरू हुई ठंड मकर संक्रांति से पहले ही जाती दिख रही है। दो दिनों से मौसम में आए परिवर्तन ने किसानों के साथ-साथ मौसम विशेषज्ञ भी भौचक हैं। दो दिनों से अधिकतम तापमान 27 जबकि न्यूनतम 14-15 डिग्री सेल्सियस के बीच रह रहा है। इससे गेहूं की फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। दो दिन पूर्व तक गर्म कपड़े पहनने वाले लोग दिन में सिर्फ एकाध कपड़े पर दिखे। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि बढ़ा तापमान चिंताजनक है। अगर एक सप्ताह से अधिक समय तक यही स्थिति बनी रही तो पैदावार 22 से 25 फीसदी तक प्रभावित हो सकती है। क्योंकि गेहूं की फसल के लिए मौसम में ठंडक रहनी चाहिए।
विज्ञापन

जिला कृषि रक्षा अधिकारी के मुताबिक जनवरी के अंतिम चरण तक गेहूं की फसल के लिए अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक मुफीद माना जाता है। न्यूनतम जितना कम रहे, उतना बेहतर। बताते चलें कि जिले में 50 हजार हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई है। इसमें एक लाख 60 हजार एमटी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। मौसम ने अगर साथ न दिया तो 40 हजार एमटी उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

40 फीसदी बढ़ा सरसों की खेती का रकबा
ज्ञानपुर। सरसों तेल पर महंगाई का असर दिखने लगा है। कोरोना काल के साथ शुरू हुई तेल पर महंगाई से किसानों ने खेती का रकबा बढ़ा दिया है। इस बार सात हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती की जा रही है। जबकि पिछले वर्ष पांच हजार हेक्टेयर रकबे में खेती की गई थी। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि इस साल किसानों ने सरसों की खेती में अधिक दिलचस्पी दिखाई है। इसके पीछे महंगाई मुख्य कारण माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि 40 फीसदी सरसों का रकबा बढ़ गया है। उपज अच्छी हो गई तो तेल के दाम पर प्रभाव पड़ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed