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चढ़ते पारे से गेहूं की खेती पर संकट
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ज्ञानपुर। तापमान में उतार-चढ़ाव से मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। जनवरी की शुरुआत में ही अधिकतम पारा चढ़कर 27 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। इसे गेहूं की खेती के लिहाज से खतरे की घंटी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं के लिए कम तापमान चाहिए। यही स्थिति बनी रही तो पैदावार 20 से 25 फीसदी तक प्रभावित हो सकती है।
दिसंबर में शुरू हुई ठंड मकर संक्रांति से पहले ही जाती दिख रही है। दो दिनों से मौसम में आए परिवर्तन ने किसानों के साथ-साथ मौसम विशेषज्ञ भी भौचक हैं। दो दिनों से अधिकतम तापमान 27 जबकि न्यूनतम 14-15 डिग्री सेल्सियस के बीच रह रहा है। इससे गेहूं की फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। दो दिन पूर्व तक गर्म कपड़े पहनने वाले लोग दिन में सिर्फ एकाध कपड़े पर दिखे। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि बढ़ा तापमान चिंताजनक है। अगर एक सप्ताह से अधिक समय तक यही स्थिति बनी रही तो पैदावार 22 से 25 फीसदी तक प्रभावित हो सकती है। क्योंकि गेहूं की फसल के लिए मौसम में ठंडक रहनी चाहिए।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी के मुताबिक जनवरी के अंतिम चरण तक गेहूं की फसल के लिए अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक मुफीद माना जाता है। न्यूनतम जितना कम रहे, उतना बेहतर। बताते चलें कि जिले में 50 हजार हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई है। इसमें एक लाख 60 हजार एमटी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। मौसम ने अगर साथ न दिया तो 40 हजार एमटी उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
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40 फीसदी बढ़ा सरसों की खेती का रकबा
ज्ञानपुर। सरसों तेल पर महंगाई का असर दिखने लगा है। कोरोना काल के साथ शुरू हुई तेल पर महंगाई से किसानों ने खेती का रकबा बढ़ा दिया है। इस बार सात हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती की जा रही है। जबकि पिछले वर्ष पांच हजार हेक्टेयर रकबे में खेती की गई थी। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि इस साल किसानों ने सरसों की खेती में अधिक दिलचस्पी दिखाई है। इसके पीछे महंगाई मुख्य कारण माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि 40 फीसदी सरसों का रकबा बढ़ गया है। उपज अच्छी हो गई तो तेल के दाम पर प्रभाव पड़ सकता है।
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दिसंबर में शुरू हुई ठंड मकर संक्रांति से पहले ही जाती दिख रही है। दो दिनों से मौसम में आए परिवर्तन ने किसानों के साथ-साथ मौसम विशेषज्ञ भी भौचक हैं। दो दिनों से अधिकतम तापमान 27 जबकि न्यूनतम 14-15 डिग्री सेल्सियस के बीच रह रहा है। इससे गेहूं की फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। दो दिन पूर्व तक गर्म कपड़े पहनने वाले लोग दिन में सिर्फ एकाध कपड़े पर दिखे। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि बढ़ा तापमान चिंताजनक है। अगर एक सप्ताह से अधिक समय तक यही स्थिति बनी रही तो पैदावार 22 से 25 फीसदी तक प्रभावित हो सकती है। क्योंकि गेहूं की फसल के लिए मौसम में ठंडक रहनी चाहिए।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी के मुताबिक जनवरी के अंतिम चरण तक गेहूं की फसल के लिए अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक मुफीद माना जाता है। न्यूनतम जितना कम रहे, उतना बेहतर। बताते चलें कि जिले में 50 हजार हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई है। इसमें एक लाख 60 हजार एमटी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। मौसम ने अगर साथ न दिया तो 40 हजार एमटी उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
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40 फीसदी बढ़ा सरसों की खेती का रकबा
ज्ञानपुर। सरसों तेल पर महंगाई का असर दिखने लगा है। कोरोना काल के साथ शुरू हुई तेल पर महंगाई से किसानों ने खेती का रकबा बढ़ा दिया है। इस बार सात हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती की जा रही है। जबकि पिछले वर्ष पांच हजार हेक्टेयर रकबे में खेती की गई थी। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि इस साल किसानों ने सरसों की खेती में अधिक दिलचस्पी दिखाई है। इसके पीछे महंगाई मुख्य कारण माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि 40 फीसदी सरसों का रकबा बढ़ गया है। उपज अच्छी हो गई तो तेल के दाम पर प्रभाव पड़ सकता है।