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कॉलेजों ने बना दी छात्रों की फर्जी ई-मेल आईडी
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यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों की गूगल पर बनने वाली ई-मेल आईडी में जिले के कॉलेजों ने खेल कर दिया है। करीब दो हजार से अधिक छात्रों की फर्जी आईडी बनाकर उन्हें बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। एक मोबाइल नंबर पर कई आईडी जनरेट की गई है। छात्रों की यह आईडी काम नहीं कर रही हैं तो बोर्ड सख्त हो गया है। शिक्षा विभाग ने चिह्नित कॉलेजों का सत्यापन शुरू करा दिया है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कक्षा नौ से लेकर 12 वीं तक के छात्रों की ई-मेल आईडी बनाने के निर्देश दिया है। छात्रों को प्रवेश, परीक्षा परिणाम, पाठ्यक्रम एवं परीक्षा संबंधित सभी जानकारियां ई-मेल पर दी जानी हैं। महीने भर पूर्व से छात्रों की आईडी बनाने का काम चल रहा है। शुरूआत में कॉलेजों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई, लेकिन जब विभागीय सख्ती बढ़ी तो कुछ कॉलेजों ने फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड कर दिया। वह आईडी अब कार्य नहीं कर रही है। जिले में कुल 183 राजकीय, वित्तपोषित और वित्तविहीन विद्यालय संचालित हैं। जिसमें एक लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। वर्ष 2022 की बोर्ड परीक्षा में 49 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विभागीय दबाव के कारण डीघ, सुरियावां, अभोली और ज्ञानपुर के चार कॉलेजों में यह गड़बड़ी की गई है। फर्जी ई-मेल आईडी तैयार करने में कॉलेज छात्रों के भविष्य से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। बोर्ड ने छात्रों को उनसे संबंधित विभिन्न सूचनाएं ऑनलाइन देने के लिए अच्छा कदम उठाया है, मगर स्कूलों ने बोर्ड के निर्देशों को भी दरकिनार करते हुए फर्जी आईडी बना दी है। इस संबंध में डीआईओएस एनएल गुप्ता का कहना है कि बोर्ड के निर्देश पर छात्र-छात्राओं की ई-मेल आईडी बनाई गई है। कुछ स्कूलों को छोड़कर सभी में सही ई-मेल आईडी बनाई गई है। जिसके कारण बोर्ड को सूचना देने में विलंब हुआ। जिन कॉलेजों में ऐसा मामला सामने आया है, उनका सत्यापन कराया जा रहा है।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कक्षा नौ से लेकर 12 वीं तक के छात्रों की ई-मेल आईडी बनाने के निर्देश दिया है। छात्रों को प्रवेश, परीक्षा परिणाम, पाठ्यक्रम एवं परीक्षा संबंधित सभी जानकारियां ई-मेल पर दी जानी हैं। महीने भर पूर्व से छात्रों की आईडी बनाने का काम चल रहा है। शुरूआत में कॉलेजों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई, लेकिन जब विभागीय सख्ती बढ़ी तो कुछ कॉलेजों ने फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड कर दिया। वह आईडी अब कार्य नहीं कर रही है। जिले में कुल 183 राजकीय, वित्तपोषित और वित्तविहीन विद्यालय संचालित हैं। जिसमें एक लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। वर्ष 2022 की बोर्ड परीक्षा में 49 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विभागीय दबाव के कारण डीघ, सुरियावां, अभोली और ज्ञानपुर के चार कॉलेजों में यह गड़बड़ी की गई है। फर्जी ई-मेल आईडी तैयार करने में कॉलेज छात्रों के भविष्य से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। बोर्ड ने छात्रों को उनसे संबंधित विभिन्न सूचनाएं ऑनलाइन देने के लिए अच्छा कदम उठाया है, मगर स्कूलों ने बोर्ड के निर्देशों को भी दरकिनार करते हुए फर्जी आईडी बना दी है। इस संबंध में डीआईओएस एनएल गुप्ता का कहना है कि बोर्ड के निर्देश पर छात्र-छात्राओं की ई-मेल आईडी बनाई गई है। कुछ स्कूलों को छोड़कर सभी में सही ई-मेल आईडी बनाई गई है। जिसके कारण बोर्ड को सूचना देने में विलंब हुआ। जिन कॉलेजों में ऐसा मामला सामने आया है, उनका सत्यापन कराया जा रहा है।
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