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नहाय-खाय के साथ डाला छठ शुरू

Thu, 31 Oct 2019 11:09 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 31 Oct 2019 11:09 PM IST
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Chhath starts with Nahay-Khay.
ज्ञानपुर। लोक आस्था का महापर्व डाला छठ बृहस्पतिवार को नहाय-खाय के साथ आरंभ हो गया। चार दिवसीय अनुष्ठान के पहले दिन व्रत वाले घरों में चावल और शाकाहार बनाकर लोगों ने ग्रहण किया। सबसे पहले व्रत रखने वाली महिलाओं ने भोजन किया। उसके बाद घर के अन्य सदस्यों ने भोजन ग्रहण किया। सात्विकता और शाकाहार से छठ पूजा वाले घरों में वातावरण भक्तिमय हो उठा।
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सूर्योपासना का पर्व सूर्य षष्ठी अथवा डाला छठ का पहला अर्घ्य दो नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जाएगा। इसके लिए बृहस्पतिवार को चार दिवसीय अनुष्ठान के पहले दिन गंगा घाटों से लेकर सरोवरों और नहरों-कृत्रिम जलाशयों तक श्रद्धालुओं ने वेदियां बनाईं। रामपुर गंगा घाट के अलावा आसपास के अन्य घाटों और सरोवरों पर वेदियां बनाकर जगह पक्की करने की होड़ मची थी। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए व्रत वाले घरों के लोग घाटों पर पहुंचकर स्थान तलाश कर साफ-सफाई करते दिखे। उसी स्थान पर अगले दिन यानी कि सप्तमी तिथि पर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। बृहस्पतिवार को पूजा वाले घरों में चावल और शाकाहार ग्रहण करने के साथ ही प्रसाद बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई। मुख्य रूप से स्वच्छता पर फोकस करने वाले छठ पर्व के मौके के लिए व्रती महिलाएं अलग से गेहूं की धुलाई कर उसे सुखाती हैं और उसके आटे से ठेकुआ का प्रसाद बनाकर छठी मइया को अर्पित करती हैं। पूजा वाले घरों में गेहूं की सफाई का काम दिनभर चला। उधर छठ पर्व के मद्देनजर बाजार में भी रौनक बढ़ चली है। सूप, दौरी और पूजा के अन्य सामान की खरीदारी के लिए बाजारों में दिनभर रौनक बनी रही। फल के बाजार में भी छठ पूजा का असर देखा जा रहा है। यही वजह है कि फलों के दाम में उछाल आ गया है। फल दुकानदार स्थानीय स्तर पर अपने हिसाब से भी फलों का भाव घटा-बढ़ा लेते हैं। छठ पूजा की तैयारी में जुटे ज्ञानपुर के अभय गोयल ने बताया कि शुक्रवार को खरना होगा। चार दिनी छठ पूजा के दूसरे दिन शाम को खरना में गुड़ और दूध से बनी खीर का प्रसाद चढ़ाया जाता है। इस प्रसाद का वितरण भी किया जाता है। इसका सेवन करने के बाद छठ का व्रत आरंभ हो जाता है। अगले दिन अस्ताचलगामी सूर्य को जलाशयों के पानी में खड़े होकर व्रती महिलाएं अर्घ्य देती हैं। अगली सुबह उदित होते सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।
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बाजे-गाजे के साथ घाटों पर पहुंचते हैं श्रद्धालु
ज्ञानपुर। छठ पर्व में आस्था का आलम यह है कि बड़ी तादाद में श्रद्धालु सपरिवार बाजे-गाजे के साथ घाटों पर पहुंचते हैं। बड़े बड़े दौरे में प्रसाद को घर के पुरुष सिर पर उठाकर घाट तक पहुंचाते हैं। उसके बाद सूर्यदेव एवं छठी देवी का आह्वान किया जाता है। सप्तमी पर श्रद्धा में लीन श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देने के लिए ठंडे पानी में खड़े होकर सूर्योदय का इंतजार करती हैं।
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