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समाज को बदलना है तो खुद को बदलो
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
Updated Wed, 27 Apr 2016 07:44 PM IST
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डॉ. धम्म वीरियो महाथेरो।
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आल इंडिया भिक्षु संघ के संघ नायक पूर्व राज्य सभा सांसद डॉ. धम्म वीरियो महाथेरो ने कहा कि समाज को बदलना है तो अपने मन को बदलना होगा। संसार परिवर्तनशील है, इसे स्वीकार करो। बुद्ध का मतलब है प्यार। सभी से प्यार करो।
बाबा भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती के मौके पर सारनाथ से लखनऊ तक धम्म चेतना यात्रा (धर्म चेतना यात्रा) पर निकले श्री वीरियो ने सीतामढ़ी में अमर उजाला से ख़ास बातचीत में कहा कि यात्रा का उद्देश्य बौद्ध, दलित, शोषित समाज में धार्मिक, आर्थिक, शैक्षणिक, सामाजिक और राजनैतिक चेतना पैदा करना है। कहा की जातिविहीन समाज बनाने के लिए बाबा साहब के मिशन को घर-घर पहुंचाना है। महाराष्ट्र में जाति विहीन समाज बनाने का कार्य चल रहा है। कहा कि बाबा साहब को मानना है तो जातिवाद मिटाना होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे पूछा कि बाबा साहब को कैसे जानते हो, तब मैंने बताया कि 1955 में रंगून (वर्मा) में अंतर्जातीय सम्मेलन में बाबा साहब से मुलाक़ात हुई थी।
बताया कि मैं मूलरूप से रंगून का निवासी हूं। उन्होंनेे कहा कि विश्व शांति, मानव कल्याण के साथ समता, बंधुता की भावना होनी चाहिए। एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि राजनीति में विपक्ष ताकतवर होना चाहिए नहीं तो देश के अंदर सुंदर राजनीति पनप नहीं सकती। कहा कि सरकार को राष्ट्रहित में सोच विचार कर काम करना चाहिए। कहा आज कि राजनीति स्वार्थ की हो गई है। पुत्र मुख्यमंत्री है तो पिता सुप्रीमो। यह कैसी राजनीति है।
बाबा भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती के मौके पर सारनाथ से लखनऊ तक धम्म चेतना यात्रा (धर्म चेतना यात्रा) पर निकले श्री वीरियो ने सीतामढ़ी में अमर उजाला से ख़ास बातचीत में कहा कि यात्रा का उद्देश्य बौद्ध, दलित, शोषित समाज में धार्मिक, आर्थिक, शैक्षणिक, सामाजिक और राजनैतिक चेतना पैदा करना है। कहा की जातिविहीन समाज बनाने के लिए बाबा साहब के मिशन को घर-घर पहुंचाना है। महाराष्ट्र में जाति विहीन समाज बनाने का कार्य चल रहा है। कहा कि बाबा साहब को मानना है तो जातिवाद मिटाना होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे पूछा कि बाबा साहब को कैसे जानते हो, तब मैंने बताया कि 1955 में रंगून (वर्मा) में अंतर्जातीय सम्मेलन में बाबा साहब से मुलाक़ात हुई थी।
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बताया कि मैं मूलरूप से रंगून का निवासी हूं। उन्होंनेे कहा कि विश्व शांति, मानव कल्याण के साथ समता, बंधुता की भावना होनी चाहिए। एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि राजनीति में विपक्ष ताकतवर होना चाहिए नहीं तो देश के अंदर सुंदर राजनीति पनप नहीं सकती। कहा कि सरकार को राष्ट्रहित में सोच विचार कर काम करना चाहिए। कहा आज कि राजनीति स्वार्थ की हो गई है। पुत्र मुख्यमंत्री है तो पिता सुप्रीमो। यह कैसी राजनीति है।
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