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देवी मंदिरों में पूजी गई चंद्रघंटा और ब्रहमचारिणी
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
Updated Mon, 23 Mar 2015 12:18 AM IST
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सुबह से ही व्रती महिलाएं एवं श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर दर्शन पूजन किया। जगह-जगह चल रहे देवी गीतों से माहौल भक्ति मय हो गया है।
चैत्र नवरात्र में रविवार को द्वितीय और तृतीया तिथि एक साथ होने से मां ब्रह्मचारिणी के साथ देवी चंद्रघंटा की पूजा भक्तों ने की। सुबह से ही देवी मंदिरों में लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो जो दिन भर चलता रहा।
पहले और अंतिम दिन व्रत रहने वाले लोगों ने रविवार को सुबह स्नान करने के बाद देवी की वंदना की और उसके बाद अपना व्रत तोड़ा जबकि नौ दिनों तक व्रत रहने वाले लोग सुबह पूजन अर्चन किया।
भिदिउरा स्थित घोपइला देवी मंदिर, सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी पर लोगों की अधिक भीड़ देखी गई। दोनो मंदिरों पर आसपास के अलावा जिले भर से लोग दर्शन पूजन करने के लिए पहुंचे।
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मान्यता है कि देवी ब्रह्मचारिणी की उत्पत्ति ब्रह्मा के कमंडल से हुई थी जिसके चलते उनका नाम ब्रह्मचारिणी रखा गया है। ब्रह्मचारिणी देवी ज्ञान, वैराग्य एवं ध्यान की अधिष्ठात्री हैं।
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चैत्र नवरात्र में रविवार को द्वितीय और तृतीया तिथि एक साथ होने से मां ब्रह्मचारिणी के साथ देवी चंद्रघंटा की पूजा भक्तों ने की। सुबह से ही देवी मंदिरों में लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो जो दिन भर चलता रहा।
पहले और अंतिम दिन व्रत रहने वाले लोगों ने रविवार को सुबह स्नान करने के बाद देवी की वंदना की और उसके बाद अपना व्रत तोड़ा जबकि नौ दिनों तक व्रत रहने वाले लोग सुबह पूजन अर्चन किया।
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भिदिउरा स्थित घोपइला देवी मंदिर, सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी पर लोगों की अधिक भीड़ देखी गई। दोनो मंदिरों पर आसपास के अलावा जिले भर से लोग दर्शन पूजन करने के लिए पहुंचे।
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मान्यता है कि देवी ब्रह्मचारिणी की उत्पत्ति ब्रह्मा के कमंडल से हुई थी जिसके चलते उनका नाम ब्रह्मचारिणी रखा गया है। ब्रह्मचारिणी देवी ज्ञान, वैराग्य एवं ध्यान की अधिष्ठात्री हैं।