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जिले में धूमधाम से मना विजयदशमी का पर्व

Sun, 17 Oct 2021 12:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 17 Oct 2021 12:30 AM IST
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Celebration of Vijayadashami with pomp
गोपीगंज में विजयदशमी के दिन राम-रावण युद्ध में अट्ठहास लगाता दशानन। संवाद - फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर। असत्य पर सत्य की जीत का पर्व विजयदशमी शुक्रवार को जिले में धूमधाम से मनाया गया। जगह-जगह आयोजित विजय दशमी मेले में राम-रावण युद्ध का सांकेतिक प्रदर्शन किया गया। अंतत: रावण का वध कर प्रतीक पुतला फूंककर अहंकार का नाश करने का संकल्प लिया गया। कई स्थानों पर लगे मेले में लोगों ने खरीदारी की।
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कोविड- 19 को लेकर लगातार दूसरे साल कई स्थानों पर रामलीला संग मेला नहीं लगा, हालांकि बाजारों में भीड़ भाड़ रही। दोपहर बाद प्रतीकात्मक रावण का वध किया गया। इस दौरान जय श्रीराम के जयघोष से पूरा नगर गूंज उठा। गोपीगंज : विजयदशमी मेले को लेकर सुबह से ही रामलीला मैदान भीड़ पहुंच गई। रामलीला मैदान में सांकेतिक युद्ध होने के पश्चात मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर दिया। इसके साथ ही रावण के पुतले का दहन किया गया। रावण वध होते ही जय श्रीराम के नारे से पूरा नगर गूंज उठा। सुरक्षा के मद्देनजर डीएम आर्यका अखौरी, एसपी डॉ. अनिल कुमार, एसओ अभिनव कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। शनिवार को सीता की अग्नि परीक्षा हुई। रविवार को भरत भगवान राम को अयोध्या का राज सिंहासन सौंपेंगे। मेला संपन्न कराने में चेयरमैन प्रहलाद दास गुप्त, उमेश सिंह बघेल, अखिलेंद्र प्रताप उर्फ चिटू सिंह बघेल, संतोष सिंह बघेल, कृष्ण कुमार खटाई आदि रहे। इसी तरह कानूनगोयान का विजयदशमी मेला शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। दोपहर बाद राम-रावण के बीच युद्ध का प्रदर्शन हुआ। अंत में असत्य पर सत्य की जीत के रूप में रावण का वध किया गया। ऊंज : क्षेत्र के छतमी, सेमराध, सोनैचा, मोन, डगडगपुर, नवधन, कुरमैचा, बिछियां, बरईपुर आदि स्थानों पर विजय दशमी मेले का आयोजन किया गया। औराई : औराई के अमीरपट्टी में राम-रावण का युद्ध हुआ। जिसमें राम ने रावण का वध किया। 14 वर्ष का वनवास खत्म करने के बाद प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण संग अयोध्या आए। वनवास समाप्त होने के बाद प्रभु श्री राम, मातेश्वरी सीता और लक्ष्मण अयोध्या वापस आए। जहां रामराज्य की स्थापना की। इसी तरह घोसिया, खमरिया, उगापुर, महराजगंज, बाबूसरांय, गिर्दबड़गांव, अर्जुनपट्टी, माधोसिंह, पुरूषोत्तमपुर, कठारी, कैयरमउ, महदेपुर आदि स्थानों पर रावण का प्रतीकात्मक पुतला जलाया गया।
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