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निर्मला के ‘निर्मल मन’ से कालीन उद्योग को मिलेगा जीवन!

Sat, 01 Feb 2020 11:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2020 11:18 PM IST
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Carpet industry will get life in bhadohi
ज्ञानपुर। आम बजट में छोटे निर्यातकों के लिए निर्विक और एक जिला-एक उत्पाद योजना के लिए धन का प्रावधान किए जाने से कालीन कारोबार जगत ने राहत की सांस ली है। यद्यपि पूरे बजटीय प्रावधान का इस आलोक में आकलन अभी किया जाना बाकी है, मगर अर्थशास्त्री इसे उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत मानकर चल रहे हैं।
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भदोही के कालीन कारोबार की सेहत अंदर से कुछ ठीक नहीं है। मर्ज बढ़ता जा रहा है, मगर कारोबार के झंडाबरदार बने लोग न जाने क्यों जानबूझ कर कमजोर हो रहे उद्योग को दिखावे का मीठा जहर देकर शूल शैया की तरफ बढ़ने देना चाहते हैं। मगर दूसरी ओर उद्योग पर असर पड़ रहा है। भदोही के हैंडनॉटेड कालीनों पर विदेेशी मशीनमेड कालीन भारी पड़ने लगे हैं। डोमोटेक्स में इस हकीकत का कड़वा घूंट यहां के कारोबारियों को पीना पड़ा है। माना जा रहा है कि पूरे कारोबार की सेहत सुधारने की दिशा में कारगर पहल न की गई तो मुश्किलें और बढ़ेंगी। इस बार आम बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई तो कारोबार जगत में आस जगी है, लेकिन निर्विक योजना को पुरानी बोतल में नई शराब के रूप में ही देखा जा रहा है। कालीन उद्योग जगत का कहना है कि ड्रॉ-बैक तो पहले से ही लगातार कम हो रहा था, अब उसी को दूसरे रूप में देने की तैयारी का नाम भी निर्विक हो सकता है। हालांकि योजना की पूरी जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।
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जर्मनी में गत दिनों संपन्न हुए डोमोटेक्स कालीन मेले में जिले की हैंडनॉटेड कालीनों को विदेशी मशीनमेड कालीनों से कड़ी टक्कर मिली है। तमाम कारोबारियों और निर्यातकों को अपेक्षाकृत ऑर्डर भी नहीं मिले। दूसरी ओर कारोबार की असलियत स्वीकार करने का साहस उद्योग जगत से जुड़े लोग नहीं करना चाहते। डोमोटेक्स से लौटे जिले के एक बड़े कालीन कारोबारी ने बताया कि कारोबार की आंतरिक हालत ठीक नहीं है। हैंडनॉटेड के कच्चे माल मशीन मेड की तुलना में महंगे आ रहे हैं। इसके अलावा बीविंग पर भारी खर्च के चलते महंगे हो चुके भदोही के हैंडमेड कालीनों को सस्ते विदेशी मशीनमेड कालीनों के आगे कम तरजीह मिल रही है। इस तरफ सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। वरना कारोबार पर असर पड़ना तय है। अब बजट में उद्योग जगत को लेकर वित्तमंत्री का ‘निर्मल मन’ दिखा है तो आस जग गई है। हालांकि व्यवसाय में इसका कितना और कैसा असर पड़ता है, यह समय बताएगा।
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हिस्सेदारी का ओहदा डगमगाया
ज्ञानपुर। देश भर के लगभग 10 हजार करोड़ के कालीन निर्यात में भदोही परिक्षेत्र की अकेले की हिस्सेदारी 60 फीसदी के आसपास की रही है। लेकिन, अब यह ओहदा डगमगा रहा है। वजह दोयम दर्जे के कच्चे माल का उपयोग और कम लागत में ज्यादा मुनाफे की लालच माना जा रहा है। इसके अलावा यहां के स्थानीय कारोबार के नाम पर कारोबार में बाहरी ट्रेडरों की घुसपैठ भी बड़ी वजह बन चली है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन, तुर्की, पाकिस्तान आदि के कालीन भदोही के कालीनों के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा करने लगे हैं।
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