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कालीन नगरी ने ठाना है, कोरोना को हराना है

Tue, 29 Mar 2022 12:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 29 Mar 2022 12:30 AM IST
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Carpet city has decided to defeat Corona
क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तर प्रदेश के सबसे छोटे जनपदों में गिने जाने वाले भदोही में प्रशासनिक प्रयास और जन जागरूकता अभियान का व्यापक असर दिखा है। यहां वैश्विक महामारी को हराने के लिए लोगों ने एक साथ कदम बढ़ाया। सभी धर्मों के धर्मगुरु एकजुट हुए और जन-जन को वैक्सीन की महत्ता के बारे में बताकर जागरूक किया गया। उसी का परिणाम है कि जिले में 96 फीसदी लोग कोरोना रोधी पहली डोज ले चुके हैं। वहीं 65 फीसदी से ज्यादा लोग दूसरे डोज ले चुके हैं। अभी 12 से 14 साल के बच्चों का टीकाकरण कराया जा रहा है। जिस रफ्तार से टीका लग रहा है, उससे यही लगता है कि जल्द ही आंकड़ा शत प्रतिशत के करीब होगा।
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कोरोना की पहली लहर इतनी तेज थी कि इसकी चपेट में आए कई लोग असमय ही दुनिया को अलविदा कह गए। इस महामारी में कितने मां की गोदें सूनी हो र्गइं, बहन का भाई हमेशा के लिए उससे दूर चला गया। जब कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन आई तो स्वास्थ्य विभाग, स्कूल प्रबंधन, धर्मगुरुओं और सामाजिक संस्थाओं आदि ने लोगों को जागरूक करने में पूरी तत्परता दिखाई। वीर एकलव्य शिक्षा समिति, लायंस क्लस, रेड क्रॉस सोसाइटी, ज्योति संस्था सहित अन्य ने लोगों के बीच जाकर मॉस्क, सैनिटाइजर वितरित किया। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से घर-घर जाकर कोरोनारोधी टीका लगाने का अभियान चलाया गया। उसी की बदौलत टीकाकरण की गति तेज हुई।
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किसी ने लगाया शिविर तो तमाम लोगों ने घर पहुंचकर किया जागरूक
ज्ञानपुर। एकलव्य एजुकेशन समिति वीरमपुर के धर्मेंद्र कुमार बिंद ने बताया कि उनकी संस्था की तरफ से 50 से अधिक शिविर लगाए गए और लोगों में सैनिटाइजर, मास्क वितरित किया गया। साथ ही कोविड वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों को प्रेरित भी किया जाता था। कई और संस्थाओं ने जगह-जगह शिविर लगाकर लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक किया। बुजुर्ग माता प्रसाद बताते हैं कि वैक्सीन लगवाने के लिए कोविड सेंटरों पर स्वयं जाते थे और वैक्सीन लगवाते थे। जागरूकता ने ही कई लोगों की जान बचाई।
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कोरोना की पहली लहर से लोग भयभीत
अभिभावक संतोष कुमार यादव बताते हैं कि कोरोना की पहली लहर से लोग भयभीत दिख रहे थे। गांव गिरांव से कुछ ही लोग वैक्सीन लगवाने जाते थे। वैक्सीन को लेकर लोगों के बीच तमाम तरह की भ्रामक जानकारी फैली हुई थी। जब वैक्सीनेशन शुरू हुआ तो शुरूआत में तो दिक्कत हुई, लेकिन बाद में लोग स्वयं केंद्रों पर पहुंचकर वैक्सीन लगवाने लगे।
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