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बुझाऊंगा हिंदू भाइयों की प्यास जमजम से..
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
Updated Tue, 24 Nov 2015 01:45 AM IST
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सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन के अवसर पर रविवार की रात
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अजिमुल्लाह चौराहे पर मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इसमें शायरों ने अपने कलाम से न केवल मुलायम के दीर्घायु की कामना की बल्कि समाज में व्याप्त बुराइयों पर भी प्रहार किया। मुशायरे में शकील फूलपूरी ने गंगा जमुनी तहजीब एकता का संदेश देते हुए कहा- बुझाउंगा हिंदू भाइयों की प्यास जमजम से, मुसलमानों को गंगा में वजू करना सिखा दूंगा...।
मुशायरे का आगाज मशहूर शायर शकील फूलपुरी ने करते हुए कहा- बोरियां जिसका बिछौना चटाई टूटी है, है वही अर्श का मेहमान कसम अल्लाह की... सुनाकर मुहब्बते रसूल पेश की तो श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया।
कवि अजय प्रेमी इलाहाबादी ने फिरका परस्त ताकतों को नसीहत देते हुए पढ़ा- सभी रहमान वाले हैं, सभी भगवान वाले हैं। हमे गीता भी प्यारी है हमीं कुरआन वाले हैं। मुकामी शायर आकिल नक्शबंदी ने पढ़ा कि- खुदा परस्त भी बन, पारसा बन। लेकिन, गुमान होने से पहले कोई खता कर।
गौहर इलाहाबादी ने पढ़ा कि- उम्र को मैंने खुद ही छोड़ दिया गौहर, आगे का हर रास्ता पत्थर जैसा था...। हास्य व्यंग्य कवि विक्टर सुल्तानपूरी ने पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम को खिराजे अकीदत पेश करते हुए सुनाया- लेकर मेरा सुबह और शाम चला गया, हर दिल को एक नया पैगाम दे गया।
उस दिन हर हिंदुस्तानी की आंखे रोईं, जिस दिन अब्दुल कलाम चला गया...। सदारत गुलाम सर्फुद्दीन अंसारी ने की और निजाम कैसर जौनपुरी ने की।
इसके अलावा हाजी आसिम असरी, लालजी देहाती, ऊरूशा अर्शी, फैज भदोहवी ने भी अपनी-अपनी गजलें सुनाईं। इससे पूर्व मुशायरे की शुरुआत सपा विधायक जाहिद बेग ने केक काटकर की। मुशायरे के कन्वीनर इस्तियाक डायर ने कहा कि नेताजी गरीबों के मसीहा हैं।
इस मौके पर विधायक का लोगों ने 52 किलो की माला पहनाकर स्वागत किया। लोगों ने मुशायरे का आनंद लिया। सम्मलेन कास्वागत करने वालों में हाजी फिरोज वजीरी, असलम महबूब, विकास यादव, रामजस यादव, लल्ला मौर्य, हसनैन अंसारी, मुख्तार हाशमी, श्रीराम मौर्य, अख्तर खां, अलीशेर खां, कन्हैया मौर्य, मनोज यादव, राशिद बेग आदि रहे।
इसमें शायरों ने अपने कलाम से न केवल मुलायम के दीर्घायु की कामना की बल्कि समाज में व्याप्त बुराइयों पर भी प्रहार किया। मुशायरे में शकील फूलपूरी ने गंगा जमुनी तहजीब एकता का संदेश देते हुए कहा- बुझाउंगा हिंदू भाइयों की प्यास जमजम से, मुसलमानों को गंगा में वजू करना सिखा दूंगा...।
मुशायरे का आगाज मशहूर शायर शकील फूलपुरी ने करते हुए कहा- बोरियां जिसका बिछौना चटाई टूटी है, है वही अर्श का मेहमान कसम अल्लाह की... सुनाकर मुहब्बते रसूल पेश की तो श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया।
कवि अजय प्रेमी इलाहाबादी ने फिरका परस्त ताकतों को नसीहत देते हुए पढ़ा- सभी रहमान वाले हैं, सभी भगवान वाले हैं। हमे गीता भी प्यारी है हमीं कुरआन वाले हैं। मुकामी शायर आकिल नक्शबंदी ने पढ़ा कि- खुदा परस्त भी बन, पारसा बन। लेकिन, गुमान होने से पहले कोई खता कर।
गौहर इलाहाबादी ने पढ़ा कि- उम्र को मैंने खुद ही छोड़ दिया गौहर, आगे का हर रास्ता पत्थर जैसा था...। हास्य व्यंग्य कवि विक्टर सुल्तानपूरी ने पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम को खिराजे अकीदत पेश करते हुए सुनाया- लेकर मेरा सुबह और शाम चला गया, हर दिल को एक नया पैगाम दे गया।
उस दिन हर हिंदुस्तानी की आंखे रोईं, जिस दिन अब्दुल कलाम चला गया...। सदारत गुलाम सर्फुद्दीन अंसारी ने की और निजाम कैसर जौनपुरी ने की।
इसके अलावा हाजी आसिम असरी, लालजी देहाती, ऊरूशा अर्शी, फैज भदोहवी ने भी अपनी-अपनी गजलें सुनाईं। इससे पूर्व मुशायरे की शुरुआत सपा विधायक जाहिद बेग ने केक काटकर की। मुशायरे के कन्वीनर इस्तियाक डायर ने कहा कि नेताजी गरीबों के मसीहा हैं।
इस मौके पर विधायक का लोगों ने 52 किलो की माला पहनाकर स्वागत किया। लोगों ने मुशायरे का आनंद लिया। सम्मलेन कास्वागत करने वालों में हाजी फिरोज वजीरी, असलम महबूब, विकास यादव, रामजस यादव, लल्ला मौर्य, हसनैन अंसारी, मुख्तार हाशमी, श्रीराम मौर्य, अख्तर खां, अलीशेर खां, कन्हैया मौर्य, मनोज यादव, राशिद बेग आदि रहे।