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कजरी के मुकाबले में भोरी-महजूदा ने परंपरा निभाई

Mon, 15 Aug 2022 12:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 15 Aug 2022 12:06 AM IST
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Bhori-Mahjuda played the tradition in the competition of Kajri
जिले की बहुचर्चित ऐतिहासिक भोरी-महजूदा की कजरी रविवार को परंपरागत तरीके से मनाई गई। इस दौरान लगे मेले का लोगों ने लुत्फ उठाया। सुरक्षा के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिस के जवान तैनात रहे। पाली चौकी प्रभारी महेंद्र कुमार के अलावा दर्जन भर से अधिक उप निरीक्षक, कांस्टेबल मेले में चक्रमण करते रहे।
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भोरी-महजूदा में ऐतिहासिक कजरी को लेकर रविवार सुबह से मेला स्थल पूरी तरह से सज गया। झूले, सर्कस के अलावा मिठाई, फलफूल और खिलौने की दुकानें सज गईं। दोपहर होते-होते मेले में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चों की भीड़ उमड़ पड़ी। करीब दो बजे से परंपरागत तरीके से कजरी की शुरुआत हुई। इसका लोगों ने खूब आनंद उठाया। मेले में आई महिलाओं ने जहां घरेलू सामान के साथ ही मिठाई आदि की खरीदारी की। वहीं बच्चों ने झूले का आनंद उठाया। चाट-पकौड़ी खाई। आयोजन समिति की ओर से लंबी कूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसमें बंजारी गोपीगंज निवासी प्रदीप यादव ने प्रथम और सुरियावां क्षेत्र के डबरिया निवासी लवकुश यादव ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। भोरी के ग्राम प्रधान विमिलेश चंद्र यादव और महजूदा के ग्राम प्रधान राजमणि पांडेय ने दोनों को पुरस्कृत किया।
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कजरी के फेर में माहौल गरमा गया
आनंद और उल्लास के माहौल में शुरू हुआ कजरी महोत्सव एकाएक तनावपूर्ण हो गया। कजरी गाते-गाते भोरी-महजूदा दोनों गांवों की महिलाएं एक दूसरे पर अपशब्द का प्रयोग करते हुए झगड़ पड़ी। संभ्रांत व्यक्तियों और महिला सिपाहियों के हस्तक्षेप से विवाद समाप्त हुआ। इससे करीब 15 मिनट तक चले विवाद के बाद मामला शांत हुआ।
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नाई की शांति के लिए चल निकली परंपरा
मान्यता है कि दशकों पूर्व एक नाई भोरी गांव में ससुराल आया था। यहां पर कजरी गाने के लिए महिलाओं ने दबाव डाला। न गाने पर उसे दबाकर मार डाला। नाई मरने के बाद दोनों गांव की महिलाओं को परेशान करने लगा। उसी की याद में यह मेला आयोजित होता चला आ रहा है। कौलापुर संवाददाता के अनुसार, धनापुर गांव में कजरी पर मेले का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे पहुंचे। सभी ने खरीदारी करने के साथ ही विभिन्न व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
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