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स्कूल में 1306 शिक्षक कम, पढ़ाई प्रभावित- संशोधित खबर
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ज्ञानपुर। जिले के परिषदीय स्कूलों में 30 फीसदी शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन प्रभावित हो गया है। 4500 के सापेक्ष 3200 के करीब ही शिक्षक हैं। 1306 शिक्षकों कमी से छात्र-छात्राओं को कक्षा संचालन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दो वर्षों से शिक्षकों की नई नियुक्ति न होने से शिक्षकों की संख्या में कमी हो रही है। जल्द ही नये शिक्षक नहीं आए तो आने वाले सत्र में यह संख्या और भी कम हो सकती है।
जिले में 752 प्राथमिक और 364 पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। आरटीई के मुताबिक 1116 स्कूलों में 4500 शिक्षक होने चाहिए। तीन वर्ष पूर्व शिक्षकों की संख्या और जरूरत का आंकड़ा 100 से 200 के मध्य रहा लेकिन तीन साल के दौरान करीब 250 से अधिक शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए साथ ही अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से 350 शिक्षक अपने गृह जनपद में चले गए। जरूरत के सापेक्ष नियुक्तियां कम होने से शिक्षकों की कमी का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया।
शिक्षकों की कमी से 200 विद्यालयों में दो शिक्षक होने से पठन-पाठन बाधित हो रहा है। करीब 100 विद्यालय एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। स्थानांतरण के बाद एकल विद्यालयों की संख्या बढ़ गई है। नई नियुक्तियां न होने से विद्यालयों के पठन-पाठन में सुधार नहीं हो रहा है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो प्राथमिक विद्यालयों में 3390 शिक्षकों की जरूरत है जबकि 2213 शिक्षक पढ़ा रहे हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 1296 के सापेक्ष 1167 शिक्षक हैं। कमोबेश यही हाल नगरीय इलाकों का है। सूत्र बताते हैं कि औराई, सुरियावां, डीघ के सीमावर्ती स्कूलों में शिक्षक जाना पसंद नहीं करते। येन-केन प्रकारेण वह हाईवे और प्रमुख मार्गों के किनारे पड़ने वाले स्कूलों में अपनी तैनाती कराते हैं, जिससे शिक्षकों की कमी से जूझ रहे विद्यालयों में सुधार नहीं हो पाता। बताते चलें कि 1116 सरकारी स्कूलों में एक लाख 55 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत है। शिक्षकों की कमी से उन्हें पठन-पाठन में दिक्कत हो रही है।
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जिले में 752 प्राथमिक और 364 पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। आरटीई के मुताबिक 1116 स्कूलों में 4500 शिक्षक होने चाहिए। तीन वर्ष पूर्व शिक्षकों की संख्या और जरूरत का आंकड़ा 100 से 200 के मध्य रहा लेकिन तीन साल के दौरान करीब 250 से अधिक शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए साथ ही अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से 350 शिक्षक अपने गृह जनपद में चले गए। जरूरत के सापेक्ष नियुक्तियां कम होने से शिक्षकों की कमी का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया।
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शिक्षकों की कमी से 200 विद्यालयों में दो शिक्षक होने से पठन-पाठन बाधित हो रहा है। करीब 100 विद्यालय एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। स्थानांतरण के बाद एकल विद्यालयों की संख्या बढ़ गई है। नई नियुक्तियां न होने से विद्यालयों के पठन-पाठन में सुधार नहीं हो रहा है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो प्राथमिक विद्यालयों में 3390 शिक्षकों की जरूरत है जबकि 2213 शिक्षक पढ़ा रहे हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 1296 के सापेक्ष 1167 शिक्षक हैं। कमोबेश यही हाल नगरीय इलाकों का है। सूत्र बताते हैं कि औराई, सुरियावां, डीघ के सीमावर्ती स्कूलों में शिक्षक जाना पसंद नहीं करते। येन-केन प्रकारेण वह हाईवे और प्रमुख मार्गों के किनारे पड़ने वाले स्कूलों में अपनी तैनाती कराते हैं, जिससे शिक्षकों की कमी से जूझ रहे विद्यालयों में सुधार नहीं हो पाता। बताते चलें कि 1116 सरकारी स्कूलों में एक लाख 55 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत है। शिक्षकों की कमी से उन्हें पठन-पाठन में दिक्कत हो रही है।
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