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क्रैश क्रॉप से दोहरा मुनाफा कमा रहे किसान
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पाली। किसानों ने खेती की तकनीकी पर संजीदगी दिखानी शुरू कर दी है। मोढ़, पाली क्षेत्र के कई किसान एक ही खेत में केले के साथ ही आलू की खेती कर दोहरा मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसी खेती करने वाले प्रगतिशील किसान अन्य के लिए नजीर बने हैं। केले की खेती में किसानों को सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जा रहा है।
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। कुछ किसान आधुनिक एवं औषधीय खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं तो कुछ किसान परंपरागत खेती से ही परिवार की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। इंटर कॉपी सिस्टम से केले के खेत में आलू की बुवाई किसान कर रहे हैं। इससे एक साथ उन्हें दो मुनाफा मिल रहा है। एक तरफ खेत में केले के पौधे लगाकर व्यावसायिक खेती हो रही है तो दूसरी तरफ आलू की नगदी फसल तैयार की जा रही है, जिसे कैश क्रॉप भी कहा जाता है। सुरियावां क्षेत्र के जमुनीपुर अठगवां के गौरव सिंह समेत कई किसान इस विधि से खेती कर दूसरे किसानों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। गौरव ने बताया कि जब वह केले के पौधे को लगाए थे, तो उस समय मक्का, बाजरा, सब्जी उगाया था। अब आलू लगा कर नकदी खेती कर रहे हैं। इजराइली वेरायटी के केले के पौधे में उद्यान विभाग की ओर से 100 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। छोटा भुसावल के नाम से जाना जाने वाला जमुनीपुर अठगवां गांव के करीब 30 किसान 20 बीघे में ऐसी खेती कर रहे हैं। किसान चंद्रभान सिंह की मानें तो शुरुआत में एक बीघे में केले को लगाया गया। लाभ समझ में आया तो खेती का रकबा बढ़ाया गया। उन्होंने बताया कि एक बीघे में 1200 केले के पेड़ लगाए जाते हैं। 25 हजार की लागत लगा कर किसान डेढ़ लाख तक कमा लेता है। बताया कि इजराइल की जी-नाइन वेरायटी नौ माह में ही तैयार हो जाती है।
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किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। कुछ किसान आधुनिक एवं औषधीय खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं तो कुछ किसान परंपरागत खेती से ही परिवार की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। इंटर कॉपी सिस्टम से केले के खेत में आलू की बुवाई किसान कर रहे हैं। इससे एक साथ उन्हें दो मुनाफा मिल रहा है। एक तरफ खेत में केले के पौधे लगाकर व्यावसायिक खेती हो रही है तो दूसरी तरफ आलू की नगदी फसल तैयार की जा रही है, जिसे कैश क्रॉप भी कहा जाता है। सुरियावां क्षेत्र के जमुनीपुर अठगवां के गौरव सिंह समेत कई किसान इस विधि से खेती कर दूसरे किसानों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। गौरव ने बताया कि जब वह केले के पौधे को लगाए थे, तो उस समय मक्का, बाजरा, सब्जी उगाया था। अब आलू लगा कर नकदी खेती कर रहे हैं। इजराइली वेरायटी के केले के पौधे में उद्यान विभाग की ओर से 100 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। छोटा भुसावल के नाम से जाना जाने वाला जमुनीपुर अठगवां गांव के करीब 30 किसान 20 बीघे में ऐसी खेती कर रहे हैं। किसान चंद्रभान सिंह की मानें तो शुरुआत में एक बीघे में केले को लगाया गया। लाभ समझ में आया तो खेती का रकबा बढ़ाया गया। उन्होंने बताया कि एक बीघे में 1200 केले के पेड़ लगाए जाते हैं। 25 हजार की लागत लगा कर किसान डेढ़ लाख तक कमा लेता है। बताया कि इजराइल की जी-नाइन वेरायटी नौ माह में ही तैयार हो जाती है।
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