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बाउंड्री विहीन 204 स्कूल, खतरे में मासूम
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ज्ञानपुर। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा पर जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। बेपरवाही यह है कि तालाब-पोखरे और सड़क के किनारे स्थित सैकड़ों स्कूलों की अब तक बाउंड्री भी नहीं कराई गई है। स्कूल की छुट्टी या मध्यावकाश के समय बाउंड्री विहीन स्कूलों में खेलते छात्र-छात्राओं की सुरक्षा खतरे में है। ऐसे स्कूलों की संख्या जिले में 204 बताई जा रही है। विभाग भी इसे स्वीकार कर रहा है, मगर बजट का अभाव बता कर चुप्पी साधे हुए है।
जिले में कुल 1116 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। सुरक्षा मानकों के तहत विद्यालय में बाउंड्रीवाल होना जरूरी है। इससे इतर जिले के 204 स्कूल ऐसे हैं, जिनकी बाउंड्री ही नहीं है। इनमें 120 प्राथमिक और 84 पूर्व माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। गौर करने वाली बात है कि बाउंड्रीवाल विहीन ज्यादातर स्कूल या तो सड़क के किनारे स्थित हैं या फिर तालाब-पोखरों से सटे हुए हैं। ऐसे में बच्चों के स्कूल आते-जाते हर वक्त भय बना रहता है। मध्यावकाश में जब छात्र एमडीएम खाने के बाद खेलने जाते हैं तो चिंता और बढ़ जाती है। शिक्षक और अभिभावक दोनों ही छात्रों की सुरक्षा को लेकर सहमे रहते हैं, जबकि विभाग इससे बेखबर चुप्पी साधे बैठा है। बताते हैं कि बाउंड्रीवाल निर्माण के लिहाज से करीब दो वर्ष पहले ऐसे स्कूलों का सर्वे कराया गया था। चिह्नित स्कूलों की सूची शासन को प्रेषित की गई, लेकिन अब तक बाउंड्रीवाल बनाने के लिए धन अवमुक्त नहीं हो पाया है। आंकड़ों पर गौर करें तो 2014 स्कूलों में करीब 25 से 30 हजार बच्चे पढ़ते हैं। बताते चलें कि भ्रष्टाचार के चलते कई स्कूलों की बाउंड्रीवाल नहीं बन सकी। अभोली के हरिकरनपुर सेमरा में बजट डेढ़ वर्ष पूर्व ही मिल गया लेकिन अब तक नहीं बन सका। तत्कालीन बीएसए आरएस द्विवेदी के कार्यकाल में 50 से अधिक बाउंड्रीवाल इसी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।
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जिले में कुल 1116 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। सुरक्षा मानकों के तहत विद्यालय में बाउंड्रीवाल होना जरूरी है। इससे इतर जिले के 204 स्कूल ऐसे हैं, जिनकी बाउंड्री ही नहीं है। इनमें 120 प्राथमिक और 84 पूर्व माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। गौर करने वाली बात है कि बाउंड्रीवाल विहीन ज्यादातर स्कूल या तो सड़क के किनारे स्थित हैं या फिर तालाब-पोखरों से सटे हुए हैं। ऐसे में बच्चों के स्कूल आते-जाते हर वक्त भय बना रहता है। मध्यावकाश में जब छात्र एमडीएम खाने के बाद खेलने जाते हैं तो चिंता और बढ़ जाती है। शिक्षक और अभिभावक दोनों ही छात्रों की सुरक्षा को लेकर सहमे रहते हैं, जबकि विभाग इससे बेखबर चुप्पी साधे बैठा है। बताते हैं कि बाउंड्रीवाल निर्माण के लिहाज से करीब दो वर्ष पहले ऐसे स्कूलों का सर्वे कराया गया था। चिह्नित स्कूलों की सूची शासन को प्रेषित की गई, लेकिन अब तक बाउंड्रीवाल बनाने के लिए धन अवमुक्त नहीं हो पाया है। आंकड़ों पर गौर करें तो 2014 स्कूलों में करीब 25 से 30 हजार बच्चे पढ़ते हैं। बताते चलें कि भ्रष्टाचार के चलते कई स्कूलों की बाउंड्रीवाल नहीं बन सकी। अभोली के हरिकरनपुर सेमरा में बजट डेढ़ वर्ष पूर्व ही मिल गया लेकिन अब तक नहीं बन सका। तत्कालीन बीएसए आरएस द्विवेदी के कार्यकाल में 50 से अधिक बाउंड्रीवाल इसी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।
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