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1.47 लाख बच्चों को यूनिफार्म का इंतजार
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ज्ञानपुर। शिक्षा सत्र का पांचवां माह भी खत्म होने को है लेकिन जिले के प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ रहे एक लाख 47 हजार बच्चों को यूनिफार्म नहीं मिल सका। करीब साढ़े पांच करोड़ बजट आने के बाद भी वितरण में लेटलतीफी से तमाम सवाल खड़े होने लगे हैं। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के सत्यापन, जांच के चक्कर में बच्चों को फटे-पुराने ड्रेस पहन कर ही स्कूल जाना पड़ रहा है।
जिले के 1143 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय में एक लाख 47 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। सरकार की ओर से हर वर्ष दो-दो जोड़ी नि:शुल्क यूनिफार्म उपलब्ध कराया जाता है। 15 जुलाई तक हर हाल में यूनिफार्म का वितरण करना होता है लेकिन 25 अगस्त तक जिले में यूनिफार्म वितरित नहीं हो सका है। अप्रैल से शुरू हुए नए शिक्षा सत्र को करीब पांच माह गुजरने को हैं। नि:शुल्क किताबों, स्वेटर, जूता-मोजा के बाद अब दो जोड़ी यूनिफार्म के लिए भी मासूमों को इंतजार करना पड़ रहा है। अभिभावक रमेश, कालू, वनीता का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बच्चों को यूनिफार्म नहीं बनवा पा रहे हैं। बजट होने के बाद भी ड्रेस न बनने से बच्चों को पुराने कपड़ों में ही स्कूल भेजना पड़ रहा है। यूनिफार्म वितरण में देरी के पीछे फर्मों के चयन को लेकर आ रही है। पूर्व के वर्षों में जून में ही फर्मों का चयन हो जाता था लेकिन इस बार कपड़ों की जांच के बाद अन्य सत्यापन होने से फर्मों के चयन में देरी हो रही है।
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जिले के 1143 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय में एक लाख 47 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। सरकार की ओर से हर वर्ष दो-दो जोड़ी नि:शुल्क यूनिफार्म उपलब्ध कराया जाता है। 15 जुलाई तक हर हाल में यूनिफार्म का वितरण करना होता है लेकिन 25 अगस्त तक जिले में यूनिफार्म वितरित नहीं हो सका है। अप्रैल से शुरू हुए नए शिक्षा सत्र को करीब पांच माह गुजरने को हैं। नि:शुल्क किताबों, स्वेटर, जूता-मोजा के बाद अब दो जोड़ी यूनिफार्म के लिए भी मासूमों को इंतजार करना पड़ रहा है। अभिभावक रमेश, कालू, वनीता का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बच्चों को यूनिफार्म नहीं बनवा पा रहे हैं। बजट होने के बाद भी ड्रेस न बनने से बच्चों को पुराने कपड़ों में ही स्कूल भेजना पड़ रहा है। यूनिफार्म वितरण में देरी के पीछे फर्मों के चयन को लेकर आ रही है। पूर्व के वर्षों में जून में ही फर्मों का चयन हो जाता था लेकिन इस बार कपड़ों की जांच के बाद अन्य सत्यापन होने से फर्मों के चयन में देरी हो रही है।
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