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स्कूलों में मासूमों के सेहत से खिलवाड़
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ज्ञानपुर। प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले मासूमों के सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। गाय-भैंस के दूध के नाम पर उन्हें सिंथेटिक दूध परोसा जा रहा है। 50 फीसदी से अधिक स्कूलों के हेडमास्टर पाउडर दूध से ही कोरम पूरा कर रहे हैं, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक होता है।
शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए सरकारी स्कूलों में तमाम सुविधाएं दी जा रही हैं। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन योजना चल रही है। बच्चों की सेहत बेहतर करने के लिए सप्ताह में एक और महीने के अंतिम सोमवार को बच्चों को 100 से 150 ग्राम दूध देने का प्राविधान है। जिले के 1143 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले एक लाख 40 हजार बच्चों को दूध मुहैया कराना होता है। बच्चों से लगाव रखने वाले स्कूलों के हेडमास्टर पूर्व से ही दूधिये या दुकानों से व्यवस्था कर बच्चों को गाय और भैंस का दूध मुहैया कराते हैं लेकिन ज्यादातर स्कूलों में हेडमास्टर सिंथेटिक और पाउडर दूध का सहारा लेते हैं। डीघ के कोनिया, धनतुलसी, कूड़ी खुर्द समेत आसपास के दर्जन भर से अधिक स्कूल, सुरियावां, मोढ़, औराई, चौरी और अभोली के कई सीमावर्ती स्कूलों में भी बच्चों को सिंथेटिक दूध दिया जाता है। सिंथेटिक और पाउडर दूूूध बच्चों की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक होता है लेकिन शिक्षक कोरम पूरा करने के लिए उनके स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ करते हैं।
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शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए सरकारी स्कूलों में तमाम सुविधाएं दी जा रही हैं। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन योजना चल रही है। बच्चों की सेहत बेहतर करने के लिए सप्ताह में एक और महीने के अंतिम सोमवार को बच्चों को 100 से 150 ग्राम दूध देने का प्राविधान है। जिले के 1143 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले एक लाख 40 हजार बच्चों को दूध मुहैया कराना होता है। बच्चों से लगाव रखने वाले स्कूलों के हेडमास्टर पूर्व से ही दूधिये या दुकानों से व्यवस्था कर बच्चों को गाय और भैंस का दूध मुहैया कराते हैं लेकिन ज्यादातर स्कूलों में हेडमास्टर सिंथेटिक और पाउडर दूध का सहारा लेते हैं। डीघ के कोनिया, धनतुलसी, कूड़ी खुर्द समेत आसपास के दर्जन भर से अधिक स्कूल, सुरियावां, मोढ़, औराई, चौरी और अभोली के कई सीमावर्ती स्कूलों में भी बच्चों को सिंथेटिक दूध दिया जाता है। सिंथेटिक और पाउडर दूूूध बच्चों की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक होता है लेकिन शिक्षक कोरम पूरा करने के लिए उनके स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ करते हैं।
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