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औराई अग्निकांड: दो ने तोड़ा दम, मृतकों की संख्या 12 पहुंची
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औराई अग्निकांड में मृत प्रियल निवासी पुरुषोत्तमपुर के घर पर रोते-बिलखते परिजन। संवाद
- फोटो : BHADOHI
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ज्ञानपुर। औराई के नरथुआं पूजा पंडाल में आग लगने से झुलसी दो किशोरियों की उपचार के दौरान रविवार को मौत हो गई। इसके साथ मृतकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई। पूर्व प्रधान रमापति के घर पांचवीं मौत हो गई। उनकी पौत्री प्रियल भी जिंदगी की जंग हार गई। बीएचयू और ट्रामा सेंटर में अब भी 10 की हालत चिंताजनक बनी हुई है। दो अक्तूबर की रात में औराई के नरथुआं स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में आग लगने से 80 से अधिक लोग झुलस गए थे। पहले दिन चार लोगों की मौत के बाद झुलसे लोगों का सर सुंदर अस्पताल, बीएचयू ट्रामा सेंटर, औराई के सूर्या ट्रामा सेंटर, भदोही के जीवनदीप और जीवनधारा में उपचार चल रहा है। 50 से 80 फीसदी तक झुलसे लोगों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। रविवार शाम चार बजे बारीपुर के पूर्व प्रधान रमापति की पौत्री प्रियल (16) पुत्री स्व. अवधेश की मौत हो गई। उसकी मां और भाई सुजल की पहले ही मौत हो चुकी है। घर में पांचवीं मौत होने से परिवार वाले बेहाल हो गए हैं। शाम पांच बजे प्रीती (16) पुत्री नंदलाल निवासी राजापुर औराई की ट्रामा सेंटर में उपचार के दौरान मौत हो गई। दो और मौत होने से मृतकों की संख्या 12 हो गई है। अलग-अलग अस्पतालों में 10 की हालत चिंताजनक बनी हुई है। बीएचयू में मौजूद मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि सभी का बेहतर उपचार हो रहा है, हालांकि अधिक जलने से मौत हो रही है। डीएम गौरांग राठी ने मृतकों के प्रति संवेदना जताई।
हर एक दोषी पर होगी कार्रवाई
औराई में पूजा पंडाल में आग की घटना ने न सिर्फ जिले के लोगों को झकझोर दिया है, बल्कि आयोजनों में होने वाले सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी की पोल भी खोल दी है। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने साफ कर दिया है कि हादसे के एक-एक दोषी पर कार्रवाई की जाएगी। चाहे वह आयोजक मंडल से हो या प्रशासनिक अधिकारी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा। घटना के एक सप्ताह बाद भी पूजा समिति के अध्यक्ष को छोड़ कर अभी किसी अन्य का नाम सामने नहीं आया है। हालांकि जिलाधिकारी का कहना है कि हादसे के लिए गठित जांच समिति की रिपोर्ट आनी है। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
क्या सिर्फ आयोजक ही दोषी
इस घटना में एसआईटी ने जो अंतरिम रिपोर्ट सौंपी है, उसके अनुसार पूजा पंडाल में आग हाइलोजन के गर्म होने से लगी है। ऐसे में प्रथम दृष्टया आयोजक को ही दोषी पाया गया है। लेकिन, बड़ा सवाल है कि क्या इस पूरी घटना में सिर्फ आयोजक ही दोषी है। पूजा पंडाल से 100 मीटर दूर स्थित थाने के पुलिस की भूमिका आखिर क्या रही। हालांकि घटना के बाद प्रशासन ने अच्छे से काम किया और लोगों तक राहत पहुंचाने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया पर स्थानीय पुलिस व प्रशासन जिसकी जिम्मेदारी घटना से पहले सबसे अधिक थी, उसने क्या किया? यह सवाल उठ रहा है।
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अग्निशमन अधिकारी भी जांच के दायरे में
अग्निकांड में अग्निशमन अधिकारी भी जांच के दायरे में रहेंगे। नियमानुसार उन्हें दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंच कर आग से बचाव की जानकारी देने के साथ ही पंडालों का निरीक्षण भी करना चाहिए था। देखना चाहिए था कि पंडाल के अंदर आग से निबटने का इंतजाम है कि नहीं। हर पंडाल में अग्निशमन यंत्र, बालू से भरी बाल्टी इत्यादि की भी पड़ताल करवानी थी। जानकारी के मुताबिक, ज्यादातर पंडालों ने एनओसी भी नहीं ली थी। घटना के बाद भले ही सारे पंडालों में समुचित इंतजाम कर दिए गए हों, लेकिन उसके पहले की जिम्मेदारी से अग्निशमन अधिकारी बच नहीं सकते।
बेसुध हो गए रमापति, पथरा गई हैं आंखें
औराई। नरथुआं अग्निकांड में सबसे अधिक नुकसान बारीगांव के पूर्व प्रधान रमापति के परिवार को हुई है। पत्नी, बहू, दो पौत्र और एक पौत्री की मौत हो चुकी है। एक के बाद एक मौत से वह बेसुध हो गए हैं। रोते-रोते आंखे पथरा गई है। तीन बच्चों का अब भी अस्पताल में उपचार चल रहा है।
वैसे तो यह हादसा क्षेत्र के छह गांवों उपरौठ, औराई ,बारी गांव, पुरुषोत्तमपुर, जेठू पुर और सेउर पर कहर बनकर टूटा है। लेकिन इसने रमापति के परिवार को झकझोर दिया है। उनके घर के पांच सदस्यों की जान जा चुकी है, जबकि तीन का उपचार चल रहा है। रमापति अपनी पत्नी, एक बहू, दो पौत्र और एक पौत्री को खो चुके हैं। एक सप्ताह पहले तक हंसते-खेलते घर में आज मातम पसरा हुआ है। घर के सदस्यों की चीख किसी को भी व्यथित कर देती है। अभी उनके पौत्र यश कुमार पुत्र पवन कुमार, पौत्री प्रतिमा पुत्री स्व. अवधेश, शिवांगी पुत्री उमेश कुमार और तीन माह की पौत्री कुहू का उपचार चल रहा है।
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हर एक दोषी पर होगी कार्रवाई
औराई में पूजा पंडाल में आग की घटना ने न सिर्फ जिले के लोगों को झकझोर दिया है, बल्कि आयोजनों में होने वाले सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी की पोल भी खोल दी है। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने साफ कर दिया है कि हादसे के एक-एक दोषी पर कार्रवाई की जाएगी। चाहे वह आयोजक मंडल से हो या प्रशासनिक अधिकारी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा। घटना के एक सप्ताह बाद भी पूजा समिति के अध्यक्ष को छोड़ कर अभी किसी अन्य का नाम सामने नहीं आया है। हालांकि जिलाधिकारी का कहना है कि हादसे के लिए गठित जांच समिति की रिपोर्ट आनी है। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
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क्या सिर्फ आयोजक ही दोषी
इस घटना में एसआईटी ने जो अंतरिम रिपोर्ट सौंपी है, उसके अनुसार पूजा पंडाल में आग हाइलोजन के गर्म होने से लगी है। ऐसे में प्रथम दृष्टया आयोजक को ही दोषी पाया गया है। लेकिन, बड़ा सवाल है कि क्या इस पूरी घटना में सिर्फ आयोजक ही दोषी है। पूजा पंडाल से 100 मीटर दूर स्थित थाने के पुलिस की भूमिका आखिर क्या रही। हालांकि घटना के बाद प्रशासन ने अच्छे से काम किया और लोगों तक राहत पहुंचाने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया पर स्थानीय पुलिस व प्रशासन जिसकी जिम्मेदारी घटना से पहले सबसे अधिक थी, उसने क्या किया? यह सवाल उठ रहा है।
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अग्निशमन अधिकारी भी जांच के दायरे में
अग्निकांड में अग्निशमन अधिकारी भी जांच के दायरे में रहेंगे। नियमानुसार उन्हें दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंच कर आग से बचाव की जानकारी देने के साथ ही पंडालों का निरीक्षण भी करना चाहिए था। देखना चाहिए था कि पंडाल के अंदर आग से निबटने का इंतजाम है कि नहीं। हर पंडाल में अग्निशमन यंत्र, बालू से भरी बाल्टी इत्यादि की भी पड़ताल करवानी थी। जानकारी के मुताबिक, ज्यादातर पंडालों ने एनओसी भी नहीं ली थी। घटना के बाद भले ही सारे पंडालों में समुचित इंतजाम कर दिए गए हों, लेकिन उसके पहले की जिम्मेदारी से अग्निशमन अधिकारी बच नहीं सकते।
बेसुध हो गए रमापति, पथरा गई हैं आंखें
औराई। नरथुआं अग्निकांड में सबसे अधिक नुकसान बारीगांव के पूर्व प्रधान रमापति के परिवार को हुई है। पत्नी, बहू, दो पौत्र और एक पौत्री की मौत हो चुकी है। एक के बाद एक मौत से वह बेसुध हो गए हैं। रोते-रोते आंखे पथरा गई है। तीन बच्चों का अब भी अस्पताल में उपचार चल रहा है।
वैसे तो यह हादसा क्षेत्र के छह गांवों उपरौठ, औराई ,बारी गांव, पुरुषोत्तमपुर, जेठू पुर और सेउर पर कहर बनकर टूटा है। लेकिन इसने रमापति के परिवार को झकझोर दिया है। उनके घर के पांच सदस्यों की जान जा चुकी है, जबकि तीन का उपचार चल रहा है। रमापति अपनी पत्नी, एक बहू, दो पौत्र और एक पौत्री को खो चुके हैं। एक सप्ताह पहले तक हंसते-खेलते घर में आज मातम पसरा हुआ है। घर के सदस्यों की चीख किसी को भी व्यथित कर देती है। अभी उनके पौत्र यश कुमार पुत्र पवन कुमार, पौत्री प्रतिमा पुत्री स्व. अवधेश, शिवांगी पुत्री उमेश कुमार और तीन माह की पौत्री कुहू का उपचार चल रहा है।