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तीन दिन बाद खुले बैंक, उमड़ी भीड़ 111
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ज्ञानपुर। दो दिन की हड़ताल और रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को बैंक खुले तो ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ी। बैंक परिसरों में लोग घंटों तक कतारबद्ध होकर काम कराने के लिए मजबूर दिखे। किसी को लेन-देन करना था तो किसी को चेक क्लीयरेंस का काम कराना था, लेकिन एक से दो घंटे के पहले किसी को बैंक से फुरसत नहीं मिल रही थी। ग्राहकों की भीड़ से बढ़ी गहमागहमी के बीच बैंक कर्मचारियों को भी काम के दबाव का सामना करना पड़ा।
ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी, पेंशन संशोधन और पांच दिवसीय बैंकिंग समेत 12 सूत्री मांगों को लेकर 31 जनवरी और एक फरवरी को हड़ताल कर दी। बैंक कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि नवंबर 2017 से लंबित पड़े वेतन बढ़ोतरी के मामलों को सरकार संज्ञान में नहीं ले रही है। नई पेंशन स्कीम से बैंक कर्मचारियों का हक मारने का प्रयास किया जा रहा है। हड़ताल के दौरान जिले के अधिसंख्य एटीएम ड्राई हो गए। इससे तमाम लोग पैसे का लेन-देन नहीं कर पाए। इंटरनेट बैंकिंग न कर पाने वाले उपभोक्ताओं को बैंकों के खुलने का बेसब्री से इंतजार था। सोमवार को बैंक खुले तो बैंक कार्यालय ग्राहकों की भीड़ से खचाखच हो गए। इस दौरान कई बार कर्मचारियों से उपभोक्ताओं की हल्की नोकझोंक भी होती रही। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, केनरा समेत अन्य तमाम सरकारी बैंकों में लोगों की कतारें पूरे दिन लगी रहीं। लीड बैंक होने के कारण यूनियन बैंक में ग्राहकों का दबाव ज्यादा था। एलडीएम उमेेेश कुमार ने कहा कि हड़ताल के बाद बैंक खुलने से काम का दबाव ज्यादा था, मगर सब कुछ आसानी से निपटा लिया गया।
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चेक क्लीयरेंस का दबाव ज्यादा
ज्ञानपुर जिले में डेढ़ सौ से अधिक बैंक शाखाओं में प्रतिदिन लगभग 50 करोड़ के चेक क्लीयरेंस होता है। दो दिन की हड़ताल से सौ करोड़ से अधिक का चेक क्लीयरेंस ठप हो गया था। जबकि प्रतिदिन होने वाले चेक क्लीयरेंस को मिलाकर डेढ़ सौ करोड़ का केवल चेक क्लीयरेंस का काम ही सामने था। इसके अलावा लगभग इतने का ही कैश ट्रांजेक्शन भी होता है। इससे काम का दबाव बढ़ा रहा। बैंक अधिकारियों का कहना था कि कुछ काम लंबित रह गए, जिन्हें अगले कार्यदिवस में निबटाया जाएगा।
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ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी, पेंशन संशोधन और पांच दिवसीय बैंकिंग समेत 12 सूत्री मांगों को लेकर 31 जनवरी और एक फरवरी को हड़ताल कर दी। बैंक कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि नवंबर 2017 से लंबित पड़े वेतन बढ़ोतरी के मामलों को सरकार संज्ञान में नहीं ले रही है। नई पेंशन स्कीम से बैंक कर्मचारियों का हक मारने का प्रयास किया जा रहा है। हड़ताल के दौरान जिले के अधिसंख्य एटीएम ड्राई हो गए। इससे तमाम लोग पैसे का लेन-देन नहीं कर पाए। इंटरनेट बैंकिंग न कर पाने वाले उपभोक्ताओं को बैंकों के खुलने का बेसब्री से इंतजार था। सोमवार को बैंक खुले तो बैंक कार्यालय ग्राहकों की भीड़ से खचाखच हो गए। इस दौरान कई बार कर्मचारियों से उपभोक्ताओं की हल्की नोकझोंक भी होती रही। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, केनरा समेत अन्य तमाम सरकारी बैंकों में लोगों की कतारें पूरे दिन लगी रहीं। लीड बैंक होने के कारण यूनियन बैंक में ग्राहकों का दबाव ज्यादा था। एलडीएम उमेेेश कुमार ने कहा कि हड़ताल के बाद बैंक खुलने से काम का दबाव ज्यादा था, मगर सब कुछ आसानी से निपटा लिया गया।
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चेक क्लीयरेंस का दबाव ज्यादा
ज्ञानपुर जिले में डेढ़ सौ से अधिक बैंक शाखाओं में प्रतिदिन लगभग 50 करोड़ के चेक क्लीयरेंस होता है। दो दिन की हड़ताल से सौ करोड़ से अधिक का चेक क्लीयरेंस ठप हो गया था। जबकि प्रतिदिन होने वाले चेक क्लीयरेंस को मिलाकर डेढ़ सौ करोड़ का केवल चेक क्लीयरेंस का काम ही सामने था। इसके अलावा लगभग इतने का ही कैश ट्रांजेक्शन भी होता है। इससे काम का दबाव बढ़ा रहा। बैंक अधिकारियों का कहना था कि कुछ काम लंबित रह गए, जिन्हें अगले कार्यदिवस में निबटाया जाएगा।
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