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मस्जिदों में नहीं घरों में अता हुई ईद-उल-अजहा की नमाज

Sat, 01 Aug 2020 10:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2020 10:39 PM IST
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Bakid prayers offered from akidat
ज्ञानपुर। खुदा की राह में कुर्बानी का त्योहार बकरीद शनिवार को जिले में परंपरागत ढंग से मनाया गया। कोरोना काल में अकीदतमंदों ने घर पर रहकर ही बकरीद की नमाज अदा की। इस दौरान महामारी से निजात दिलाने के लिए दुआ की गई। सामूहिक कुर्बानी से तौबा की गई। लोगों ने घर पर ही कुर्बानी दी। नमाज के बाद फोन और सोशल मीडिया पर बधाई देने का लंबा सिलसिला चला।
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शनिवार को ईद-उल-अजहा-कुर्बानी पर्व बकरीद की नमाज कोविड-19 के कारण मस्जिदों में नहीं बल्कि घरों में अदा कर महामारी से बचने और जनसमुदाय को बचाने के लिए बारगाहे-इलाही में उठे हाथों ने दुआख्वानी की। पूर्व की अपेक्षा इस बार कोई खास उत्साह नहीं देखने को मिला। वहीं मुस्लिम समाज औपचारिकताओं तक ही सीमित बना रहा। मान्यता है कि कुर्बानी से मानवता और आपसी भाईचारा का पैगाम मिलता है। नमाज के बाद समाज के लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद देकर कुर्बानी का सिलसिला शुरू किया। कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देख शासन और प्रशासन स्तर से नमाज को घरों में पढ़कर सहयोग की अपेक्षा जताई गई थी। नगरीय और ग्रामीण अंचलों की मस्जिदों में नमाज नहीं हुई प्रशासन की गाइड लाइन पर पांच की संख्या में नमाजी मस्जिद में नमाज पढ़े। सुरक्षा की दृष्टि से ज्ञानपुर नगर, गोपीगंज नगर, खमरिया नगर, घोसिया, औराई, सूफीनगर, गोधना, दरवांसी, कुरमैचा, नवधन, ऊंज, कटरा-सीतामढ़ी, सुरियावां, सर्रोई, पाली, दुर्गागंज, चौरी, उगापुर, कठारी, माधोसिंह-राजमार्ग, नईबाजार, दानूपुर, मतेथू, अभोली आदि स्थानों पर पुलिस चक्रमण कर माहौल बिगाड़ने वालों पर विशेष नजर रखे रही। पर्व के शांति पूर्वक संपन्न हो जाने पर अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली। कुर्बानी के बाद लोग एक-दूसरे के यहां पहुंच कर सेवईं, सिरनी आदि का भी लुत्फ उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जबह हुए बकरों की खाल संबंधित कब्रिस्तानों में दफन किया जाता रहा। क्योंकि चर्म उद्योग पर पूरी तरह से रोक लग जाने के कारण व्यापारी भी किसी तरह की आफत मोल लेना नहीं चाहते। कुछेक स्थानों पर डीएम, एसपी, एसडीएम, एएसपी जैसे अधिकारियों ने पहुंच कर समाज के लोगों से मिलकर भाईचारों को बढ़ावा दिया गया।
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