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जाठी में मिले 14वीं शताब्दी के मुगलकालीन सिक्के
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औराई। औराई थाना क्षेत्र के जाठी गांव में सोमवार को एक भीठे से 14वीं शताबदी के मुगलकालीन चांदी के सैकड़ों सिक्के मिलने से कौतूहल बढ़ गया है। दो दिन पूर्व उसी स्थान पर वाराणसी का पुरातत्व विभाग सर्वे कर लौटा था। पुरातत्व विभाग की टीम के जाने के बाद ग्रामीण उसी स्थान पर एक भीठे की खुदाई करना शुरू कर दिए। जहां एक घड़े में कई चांदी के सिक्के मिले हैं।
पुरातत्व विभाग की एक टीम जाठी गांव में शनिवार को कला पहचान और इतिहास को लेकर सर्वे करने आई। जाठी में सर्वे करने के बाद एक भीठे की खुदाई भी की गई, लेकिन पुरातत्व विभाग को कुछ ऐसा नहीं मिला। पुरातत्व विभाग की टीम के लौट जाने के बाद सोमवार को ग्रामीणों ने भीठे की खुदाई शुरू कर दी। खुदाई के दौरान एक घड़ा दिखा, जिसे ग्रामीणों ने बाहर निकाला तो बड़ी संख्या में चांदी के सिक्के मिले। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वाराणसी के पुरातत्व विभाग के डॉ. रविशंकर को दी। ग्रामीणों ने पुरातत्व विभाग को इसकी फोटो भी भेजी। जहां बीएचयू के डॉ. रविशंकर ने बताया कि यह सिक्के मुगलकाल के हैं, जो 14वीं शाताब्दी के प्रतीत होते हैं, बहरहाल यह जांच का विषय है। उधर गांव के एक भीठे से मिले चांदी के सिक्के के मामले को लेकर ग्रामीणों ने पुलिस को जानकारी नहीं दी। सभी सिक्के को अपने पास सहेज कर रखा है। इस संबंध में बीएचयू के पुरातत्व विभाग के डॉ. एके सिंह ने कहा कि सिक्के मुगल शासक शाह आलम द्वितीय के जमाने के भी हो सकते हैं। डॉ. एके सिंह कहते हैं कि अगर ये मुगलकालीन सिक्के हैं तो बनारस के नए इतिहास से पर्दा उठ सकता है। इससे पता चलता है कि उस जमाने में बनारस का कितना महत्व था। बनारस में दो टकसाल हुआ करते थे। जिनसे बनने वाली मुद्राओं से आसपास का पूरा इलाका कवर होता था। हालांकि यह जांच का विषय है कि ये सिक्के किस स्पॉट से किन परिस्थितियों में मिले हैं।
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पुरातत्व विभाग की एक टीम जाठी गांव में शनिवार को कला पहचान और इतिहास को लेकर सर्वे करने आई। जाठी में सर्वे करने के बाद एक भीठे की खुदाई भी की गई, लेकिन पुरातत्व विभाग को कुछ ऐसा नहीं मिला। पुरातत्व विभाग की टीम के लौट जाने के बाद सोमवार को ग्रामीणों ने भीठे की खुदाई शुरू कर दी। खुदाई के दौरान एक घड़ा दिखा, जिसे ग्रामीणों ने बाहर निकाला तो बड़ी संख्या में चांदी के सिक्के मिले। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वाराणसी के पुरातत्व विभाग के डॉ. रविशंकर को दी। ग्रामीणों ने पुरातत्व विभाग को इसकी फोटो भी भेजी। जहां बीएचयू के डॉ. रविशंकर ने बताया कि यह सिक्के मुगलकाल के हैं, जो 14वीं शाताब्दी के प्रतीत होते हैं, बहरहाल यह जांच का विषय है। उधर गांव के एक भीठे से मिले चांदी के सिक्के के मामले को लेकर ग्रामीणों ने पुलिस को जानकारी नहीं दी। सभी सिक्के को अपने पास सहेज कर रखा है। इस संबंध में बीएचयू के पुरातत्व विभाग के डॉ. एके सिंह ने कहा कि सिक्के मुगल शासक शाह आलम द्वितीय के जमाने के भी हो सकते हैं। डॉ. एके सिंह कहते हैं कि अगर ये मुगलकालीन सिक्के हैं तो बनारस के नए इतिहास से पर्दा उठ सकता है। इससे पता चलता है कि उस जमाने में बनारस का कितना महत्व था। बनारस में दो टकसाल हुआ करते थे। जिनसे बनने वाली मुद्राओं से आसपास का पूरा इलाका कवर होता था। हालांकि यह जांच का विषय है कि ये सिक्के किस स्पॉट से किन परिस्थितियों में मिले हैं।
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