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अगस्त क्रांति: क्रांतिकारियों ने फूंक दिए तीन स्टेशन

Tue, 09 Aug 2022 12:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 09 Aug 2022 12:21 AM IST
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August Revolution: Revolutionaries burnt three stations
अगस्त क्रांति में कटका स्टेशन। संवाद - फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर। कालीन नगरी भी अगस्त क्रांति से अछूती नहीं रही। महराजा काशी नरेश के अधीन भदोही में भी भारत छोड़ो आंदोलन की चिंगारी पहुंची। क्रांतिकारियों ने एक, दो नहीं बल्कि तीन स्टेशनों को आग के हवाले कर दिया। जिससे अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिल गईं। आलम यह रहा कि चौरी के भकोड़ा गांव को बागी घोषित कर दिया। आंदोलनकारी रात गांव में पहुंचकर लोगों को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ भड़का रहे थे।
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केबी पीजी कॉलेज मिर्जापुर के पूर्व इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र दूबे ने बताया कि गांधी जी ने जब करो या मरो का नारा दिया तो हर वर्ग आंदोलन में शामिल होने के लिए उत्साहित हो गया। देश में अगस्त क्रांति की ज्वाला तेजी से धधक रही थी, तब अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का जवाब देने के लिए क्रांतिकारियों ने रणनीति बनानी शुरू की। महाराजा काशी नरेश के अधीन भदोही में पुलिस सख्ती भी काफी रही, लेकिन क्रांतिकारी खमरिया के अहिमनपुर और कटका स्टेशन को निशाना बनाने की योजना बनाई। 10 अगस्त 1942 की दोपहर सैकड़ों लोगों की भीड़ स्टेशन पहुंच गई और पूरे परिसर को आग के हवाले कर दिया। इस घटना ने ब्रिटिश सरकार को हिला कर रख दिया। दिल्ली तक इसकी गूंज सुनाई दी। साहित्यकार एवं पुराने मामलों के जानकार डॉ. राजकुमार पाठक ने बताया कि अगस्त क्रांति के आंदोलन में चौरी के रोटहां निवासी श्रीराम दूबे ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने क्रांतिकारियों के साथ मिलकर परसीपुर स्टेशन को आग के हवाले कर दिया। क्रांतिकारी रात में गांव में पहुंचकर लोगों को अंग्रेजों के खिलाफ भड़का रहे थे। इस दौरान अंग्रेजी हुकूमत ने भकोड़ा गांव को बागी घोषित कर दिया। खमरिया निवासी नरेश चंद्र श्रीवास्तव बीएनजे कॉलेज मिर्जापुर के छात्र रहे। कटका, अहिमनपुर स्टेशन फूंकने के बाद वह अन्य के साथ पहाड़ा स्टेशन फूंकने गए। उसी दौरान एक साथी को बचाने में शहीद हो गए। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद जब सरकार ने श्रीराम दूबे को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को पेंशन देनी चाही तो उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि वह देशभक्ति की कीमत नहीं लेंगे।
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