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अमृत सरोवर बनेगा दुर्गागंज का 200 साल पुराना तालाब

Tue, 24 May 2022 12:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 24 May 2022 12:18 AM IST
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Amrit Sarovar will become 200 years old pond of Durgaganj
दुर्गागंज। एक जमाना था जब तालाब में गंदगी करना, उसे पाटना पाप माना जाता है। तालाबों का पानी इतना निर्मल होता था कि बिल्कुल शीशे की तरह पानी चमकता था। पानी में अंदर के भी जलीय जीव स्पष्ट दिखते थे, लेकिन समय के साथ रातोरात अमीर बनने की इच्छा ने जिले के कई तालाबों का अस्तित्व ही मिटा दिया। उसी में से एक है दुर्गागंज बाजार के मध्य बना 200 साल पुराना तालाब। हालांकि सरकार के निर्देशानुसार इस अति प्राचीन तालाब को पुन: उसका अस्तित्व वापस दिलाया जाएगा। अमृत सरोवर बनाकर यहां हरियाली को भी बढ़ावा मिलेगा। यहां चार हजार मानव दिवस रोजगार भी सृजित होगा। 15 अगस्त तक काम पूरा करने का लक्ष्य है।
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सोमवार को जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध तिवारी और अभोली की ब्लाक प्रमुख प्रियंका बिंद, सीडीओ भानु प्रताप सिंह ने पूजन कर के सुंदरीकरण कार्य का आरंभ किया। आसपास के करीब छह-सात गांवों में जलस्तर को मेंटेन करने वाले इस तालाब पर कभी दुर्गागंज बाजार के लोग भी निर्भर रहते थे। तालाब के सुंदरीकरण कार्य का श्रीगणेश करने पहुंचे जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी ने कहा कि तालाब जब अपने पहले वाले अस्तित्व में आएगा तो न सिर्फ जल संरक्षण की मुहिम को बल मिलेगा बल्कि यहां किनारे पर लगने वाले पौधों से पर्यावरण संरक्षण भी होगा। इसकी खोदाई में जो मजदूर लगेंगे उन्हें काम भी मिलेगा। इसपर करीब 50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। ब्लाक प्रमुख, सीडीओ ने भी संबोधित किया। इस मौके पर डीसी मनरेगा राजाराम, ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि राकेश बिंद, प्रधान प्रतिनिधि विंध्यवासिनी पांडेय, तकनीकी सहायक अक्षय बिंद आदि मौजूद थे। अध्यक्षता ग्राम प्रधान निर्मला देवी व संचालन अशोक ने किया।
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यहां कराए जाएंगे ये कार्य
- तालाब की खुदाई कराई जाएगी, जिससे तालाब में पानी ज्यादा इकट्ठा हो।
- तालाब पर छोटे पार्क भी बनाए जाएंगे, बैठने लिए बेंच आदि का इंतजाम होगा।
- पेयजल का भी इंतजाम होगा, पौधे भी तालाब के किनारे लगाए जाएंगे।
- सुंदरीकरण के लिए तालाब के किनारे-किनारे जन सहयोग से भी कुछ कार्य होंगे।
दो सौ वर्ष पुराना है तालाब
ग्रामीण शिव शंकर प्रजापति बताते हैं कि तालाब करीब 200 साल पुराना है। इस तालाब में कभी इतनी सफाई रहती थी कि लोग देखने के लिए आते थे। इस तालाब में बड़े-बड़े कछुए हुआ करते थे। ग्रामीण विनोद कुमार मौर्य ने बताया कि इस तालाब में इतनी सफाई रहती थी कि मसूधी व आसपास के गांव के घरों में दाल व चावल इसी पानी से पकता था। तालाब का सुंदरीकरण होगा तो फिर से पुराने अस्तित्व में आ जाएगा।
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