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Bhadohi News: चौरा माता की कालिमामय है प्रतिमा, मन मांगी मुरादें होती हैं पूरी
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नगर के पड़ाव स्थित अति प्राचीन चौरा माता मन्दिर में भक्तों की अपार आस्था है। मां की प्राचीन मूर्ति का तेज ऐसा है कि दर्शन मात्र से ही भक्तों की मुराद पूरी हो जाती है।
स्थानीय निवासी परमात्मा सिंह ने बताया कि प्राचीन चौरा माता की मूर्ति की स्थापना कब और किसने की थी। इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। मां की यह प्रतिमा काले पत्थर की है। पीपल के पेड़ के नीचे स्थित इस अति प्राचीन मंदिर में श्रद्धालु माता रानी से मनचाही मुराद मांगते हैं। पूरे जिले के भक्तों की आस्था मातारानी के ऊपर है। बताया कि कुछ साल पहले ही नगरवासियों के सहयोग से चौरा माता का भव्य मन्दिर बनवा दिया गया है। साल के दोनों नवरात्रि में माता रानी का भव्य श्रंगार और भजन-कीर्तन पूरे नौ दिनों तक चलता है। नवमी के दिन पुजारी अशोक महाराज अपने हाथ मे ढेर सारा कपूर जलाकर माता रानी की आरती करते हैं। इसके बाद भंडारे होता है।
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चेहरा जला, पति ने छोड़ा, सफल शिक्षिका व धाविका के रूप बनाई पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। कहते हैं अगर जज्बा हो तो राह में आने वाली मुश्किलें कभी भी रास्ता नहीं रोक सकती। राह में कितनी भी मुश्किलें आएं हम अपनी मंजिल पा ही लेते हैं। औराई ब्लॉक के सम्हईभटानी, देवनाथपुर निवासी उर्मिला देवी पर ये पंक्तियां बिल्कुल सटीक बैठती हैं। इन्होंने अपने जीवन में काफी कठिनाईयां देखी, लेकिन उसके बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज वे न सिर्फ एक सफल शिक्षिका हैं, बल्कि जिले की पहली पैदल चाल धाविका हैं। जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। अमर उजाला के साथ बातचीत में उर्मिला ने बताया कि उनका जन्म सात महीने में ही हो गया था। जिसके कारण उनकी आंखे नहीं खुल पाई थी और वे काफी कमजोर भी थीं। किसी तरह संघर्ष कर अपनी पढ़ाई पूरी की। जब 17 साल की थी तो शादी तय हुई। लेकिन शादी के कुछ महीने पहले ही एक हादसे में उनका चेहरा बुरी तरह जल गया। जिससे शादी टूट गई। इस घटना के बाद वे बूरी तरह से टूट गईं।
परिवार वालों ने हौसलों बढ़ाया तो नई सिरे से जिंदगी शुरू की। इसके बाद प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के रूप में नौकरी मिली। परिवार के कहने पर ही फिर से शादी के लिए तैयार हुईं तो एक पांचवी पास व्यक्ति से शादी हुई। उन्होंने शिक्षा का महत्व समझा था, इसलिए अपने पति को पढ़ाया और कम्प्यूटर कोर्स सहित अन्य कई कोर्स कराए। हालांकि पति ने धोखा देते हुए दूसरी महिला के साथ शादी कर ली। यह घटना उनके लिए एक झटका थी। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और संघर्ष जारी रखा। 2019 में उन्होंने सिंगापुर में अंतरराष्ट्रीय पैदल चाल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वर्तमान में उर्मिला उच्च प्राथमिक विद्यालय, खेमईपुर में सहायक अध्यापिका हैं।
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नवरात्रि शुभ मुहुर्त
सुजातपुर निवासी आचार्य शरद पांडेय ने बताया कि नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी माता गाय की सवारी करती हैं। इनका वर्ण श्वेत माना जाता है। सफेद और बैगनी रंग के कपड़े पहनकर पूजन करने से मां प्रसन्न होती हैं। भक्त मां को नारियल का भोग लगाएं।
इन मंत्रों से करें मां की अराधना
ओम् देवी महागौर्ये नम:।
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स्थानीय निवासी परमात्मा सिंह ने बताया कि प्राचीन चौरा माता की मूर्ति की स्थापना कब और किसने की थी। इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। मां की यह प्रतिमा काले पत्थर की है। पीपल के पेड़ के नीचे स्थित इस अति प्राचीन मंदिर में श्रद्धालु माता रानी से मनचाही मुराद मांगते हैं। पूरे जिले के भक्तों की आस्था मातारानी के ऊपर है। बताया कि कुछ साल पहले ही नगरवासियों के सहयोग से चौरा माता का भव्य मन्दिर बनवा दिया गया है। साल के दोनों नवरात्रि में माता रानी का भव्य श्रंगार और भजन-कीर्तन पूरे नौ दिनों तक चलता है। नवमी के दिन पुजारी अशोक महाराज अपने हाथ मे ढेर सारा कपूर जलाकर माता रानी की आरती करते हैं। इसके बाद भंडारे होता है।
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चेहरा जला, पति ने छोड़ा, सफल शिक्षिका व धाविका के रूप बनाई पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। कहते हैं अगर जज्बा हो तो राह में आने वाली मुश्किलें कभी भी रास्ता नहीं रोक सकती। राह में कितनी भी मुश्किलें आएं हम अपनी मंजिल पा ही लेते हैं। औराई ब्लॉक के सम्हईभटानी, देवनाथपुर निवासी उर्मिला देवी पर ये पंक्तियां बिल्कुल सटीक बैठती हैं। इन्होंने अपने जीवन में काफी कठिनाईयां देखी, लेकिन उसके बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज वे न सिर्फ एक सफल शिक्षिका हैं, बल्कि जिले की पहली पैदल चाल धाविका हैं। जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। अमर उजाला के साथ बातचीत में उर्मिला ने बताया कि उनका जन्म सात महीने में ही हो गया था। जिसके कारण उनकी आंखे नहीं खुल पाई थी और वे काफी कमजोर भी थीं। किसी तरह संघर्ष कर अपनी पढ़ाई पूरी की। जब 17 साल की थी तो शादी तय हुई। लेकिन शादी के कुछ महीने पहले ही एक हादसे में उनका चेहरा बुरी तरह जल गया। जिससे शादी टूट गई। इस घटना के बाद वे बूरी तरह से टूट गईं।
परिवार वालों ने हौसलों बढ़ाया तो नई सिरे से जिंदगी शुरू की। इसके बाद प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के रूप में नौकरी मिली। परिवार के कहने पर ही फिर से शादी के लिए तैयार हुईं तो एक पांचवी पास व्यक्ति से शादी हुई। उन्होंने शिक्षा का महत्व समझा था, इसलिए अपने पति को पढ़ाया और कम्प्यूटर कोर्स सहित अन्य कई कोर्स कराए। हालांकि पति ने धोखा देते हुए दूसरी महिला के साथ शादी कर ली। यह घटना उनके लिए एक झटका थी। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और संघर्ष जारी रखा। 2019 में उन्होंने सिंगापुर में अंतरराष्ट्रीय पैदल चाल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वर्तमान में उर्मिला उच्च प्राथमिक विद्यालय, खेमईपुर में सहायक अध्यापिका हैं।
नवरात्रि शुभ मुहुर्त
सुजातपुर निवासी आचार्य शरद पांडेय ने बताया कि नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी माता गाय की सवारी करती हैं। इनका वर्ण श्वेत माना जाता है। सफेद और बैगनी रंग के कपड़े पहनकर पूजन करने से मां प्रसन्न होती हैं। भक्त मां को नारियल का भोग लगाएं।
इन मंत्रों से करें मां की अराधना
ओम् देवी महागौर्ये नम:।