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पांच करोड़ खर्च कर बनेगा केएनपीजी कॉलेज में नया छात्रावास
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काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर के निष्प्रयोज्य हो चुके आर्यभट्ट और भाष्कर छात्रावास की जमीन पर नया भवन बनाया जाएगा। कॉलेज प्रशासन की तरफ से नए छात्रावास भवन के निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपये की कार्ययोजना शासन को प्रस्तावित की गई है। मंजूरी मिलने पर छात्रावास भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सूबे के नामी-गिरामी महाविद्यालयों में शामिल काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना आजादी के बाद 1952 हुई थी। उस दौरान पूर्वांचल में गिने-चुने ही कॉलेज थे। इस कॉलेज में मिर्जापुर, सोनभद्र तक के विद्यार्थी पढ़ने के लिए आते थे। कॉलेज के छात्र-छात्राओं की सहूलियत के लिए ज्ञानपुर के हास्टल चौराहे के समीप भाष्कर और आर्यभट्ट छात्रावास बनाए गए थे। करीब तीन से चार दशक गुजर गए, लेकिन इनकी मरम्मत नहीं की गई। इससे छात्रावास भवन जर्जर हो गए हैं। इसके चलते कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को किराए के कमरे में रहना पड़ता है। छात्रावास की टूटी खिड़की, दरवाजे और गंदगी के कारण अब उधर कोई रुख नहीं करता है। स्थिति यह है कि वहां कोई दिन में भी जाने से कतराता है। तीन साल पूर्व कॉलेज प्रशासन ने उसे निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया था। अब नए सिरे से छात्रावास भवन के निर्माण के लिए कॉलेज प्रशासन की तरफ से पांच करोड़ रुपये की कार्ययोजना शासन को प्रस्तावित की गई है। इससे छात्रों को कम दर पर ठहरने की व्यवस्था होने की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।
केएनपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीएन डोंगरे ने बताया कि आर्यभट्ट और भाष्कर छात्रावास परिसर में एक तीन मंजिला छात्रावास भवन बनाने का प्रस्ताव है। जिसमें 50-50 कमरे हर मंजिल पर होंगे। जिससे उन कमरों में करीब 900 छात्रों के ठहरने की व्यवस्था होगी। उन्होंने बताया कि अगर प्रस्ताव मंजूर हो गया तो जुलाई-अगस्त तक कार्यदायी संस्था नामित कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। उधर, काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्नातक, परास्नातक, बीएड के कुल नौ हजार से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। कॉलेज परिसर में छात्राओं के लिए आंबेडकर छात्रावास बना है। हालांकि उसकी क्षमता कम है। छात्रों के लिए कॉलेज का छात्रावास नहीं होने से यहां पढ़ने वाले छात्रों को किराए के कमरों में रहना पड़ता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बजट का समायोजन करने में काफी दिक्कत होती है। प्राचार्य डॉ.पीएन डोंगरे का कहना है कि नए छात्रावास के निर्माण के लिए पांच करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। ज्ञानपुर विधायक से मिलकर भी छात्रावास निर्माण पर चर्चा की जाएगी। ताकि शासन तक बात पहुंचे। छात्रावास बनने से छात्रों को काफी सहूलियत मिलेगी।
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सूबे के नामी-गिरामी महाविद्यालयों में शामिल काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना आजादी के बाद 1952 हुई थी। उस दौरान पूर्वांचल में गिने-चुने ही कॉलेज थे। इस कॉलेज में मिर्जापुर, सोनभद्र तक के विद्यार्थी पढ़ने के लिए आते थे। कॉलेज के छात्र-छात्राओं की सहूलियत के लिए ज्ञानपुर के हास्टल चौराहे के समीप भाष्कर और आर्यभट्ट छात्रावास बनाए गए थे। करीब तीन से चार दशक गुजर गए, लेकिन इनकी मरम्मत नहीं की गई। इससे छात्रावास भवन जर्जर हो गए हैं। इसके चलते कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को किराए के कमरे में रहना पड़ता है। छात्रावास की टूटी खिड़की, दरवाजे और गंदगी के कारण अब उधर कोई रुख नहीं करता है। स्थिति यह है कि वहां कोई दिन में भी जाने से कतराता है। तीन साल पूर्व कॉलेज प्रशासन ने उसे निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया था। अब नए सिरे से छात्रावास भवन के निर्माण के लिए कॉलेज प्रशासन की तरफ से पांच करोड़ रुपये की कार्ययोजना शासन को प्रस्तावित की गई है। इससे छात्रों को कम दर पर ठहरने की व्यवस्था होने की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।
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केएनपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीएन डोंगरे ने बताया कि आर्यभट्ट और भाष्कर छात्रावास परिसर में एक तीन मंजिला छात्रावास भवन बनाने का प्रस्ताव है। जिसमें 50-50 कमरे हर मंजिल पर होंगे। जिससे उन कमरों में करीब 900 छात्रों के ठहरने की व्यवस्था होगी। उन्होंने बताया कि अगर प्रस्ताव मंजूर हो गया तो जुलाई-अगस्त तक कार्यदायी संस्था नामित कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। उधर, काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्नातक, परास्नातक, बीएड के कुल नौ हजार से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। कॉलेज परिसर में छात्राओं के लिए आंबेडकर छात्रावास बना है। हालांकि उसकी क्षमता कम है। छात्रों के लिए कॉलेज का छात्रावास नहीं होने से यहां पढ़ने वाले छात्रों को किराए के कमरों में रहना पड़ता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बजट का समायोजन करने में काफी दिक्कत होती है। प्राचार्य डॉ.पीएन डोंगरे का कहना है कि नए छात्रावास के निर्माण के लिए पांच करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। ज्ञानपुर विधायक से मिलकर भी छात्रावास निर्माण पर चर्चा की जाएगी। ताकि शासन तक बात पहुंचे। छात्रावास बनने से छात्रों को काफी सहूलियत मिलेगी।
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