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आठ सौ से अधिक हैंडपंप का मिला है लक्ष्य
Bhadohi
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
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ज्ञानपुर। जिले में हैंडपंपों की रिबोरिंग का कार्य करीब तीन माह से ठप पड़ गया है। इसके कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में मौजूदा समय में एक हजार से अधिक हैंडपंप खराब हैं। विभिन्न विकास खंडों से 500 आवेदन पत्र रिबोरिंग के लिए जल निगम में पहुंचे हैं। रिबोरिंग के योग्य हैंडपंपों का सर्वे पूरे जिले में कराया जा रहा है।
जनपद के विभिन्न विकास खंडों के अधिसंख्य गांवों में तमाम हैंडपंप रिबोरिंग न होने के कारण शो पीस साबित हो रहे हैं। इसके लिए पानी के अभाव में लोगों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। जिले के अधिसंख्य गांवों में कुछ न कुछ हैंडपंप खराब पड़े हैं, जो रिबोर की बाट जोह रहे हैं। इसी तरह नगरीय क्षेत्र ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही, सुरियावां, खमरिया, घोसिया, नई बाजार आदि बाजारों में भी बड़ी संख्या में हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। शासन से हर वर्ष रिबोरिंग के लिए धन भेजा जाता है, लेकिन इस वर्ष तीन-चार माह पहले ही कुछ हैंडपंपों के लिए रिबोरिंग का धन आया था। उसके बाद नहीं आया। इसके चलते बड़ी तादाद में हैंडपंप रिबोरिंग से वंचित रह गए हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो 800 हैंडपंपों को रिबोर कराने के लिए धन की मांग की गई है। अब तक विभिन्न गांवों से 500 से अधिक आवेदन पत्र हैंडपंप रिबोर करने के लिए आए हैं। रिबोरिंग के लिए धन की व्यवस्था न होने के कारण खराब हैंडपंपों की दशा नहीं सुधर पा रही है। ऐसे में लोग पेयजल के लिए परेशान हैं। फिलहाल रिबोरिंग के लिए विभाग की ओर से सर्वे का कार्य चल रहा है।
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जनपद के विभिन्न विकास खंडों के अधिसंख्य गांवों में तमाम हैंडपंप रिबोरिंग न होने के कारण शो पीस साबित हो रहे हैं। इसके लिए पानी के अभाव में लोगों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। जिले के अधिसंख्य गांवों में कुछ न कुछ हैंडपंप खराब पड़े हैं, जो रिबोर की बाट जोह रहे हैं। इसी तरह नगरीय क्षेत्र ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही, सुरियावां, खमरिया, घोसिया, नई बाजार आदि बाजारों में भी बड़ी संख्या में हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। शासन से हर वर्ष रिबोरिंग के लिए धन भेजा जाता है, लेकिन इस वर्ष तीन-चार माह पहले ही कुछ हैंडपंपों के लिए रिबोरिंग का धन आया था। उसके बाद नहीं आया। इसके चलते बड़ी तादाद में हैंडपंप रिबोरिंग से वंचित रह गए हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो 800 हैंडपंपों को रिबोर कराने के लिए धन की मांग की गई है। अब तक विभिन्न गांवों से 500 से अधिक आवेदन पत्र हैंडपंप रिबोर करने के लिए आए हैं। रिबोरिंग के लिए धन की व्यवस्था न होने के कारण खराब हैंडपंपों की दशा नहीं सुधर पा रही है। ऐसे में लोग पेयजल के लिए परेशान हैं। फिलहाल रिबोरिंग के लिए विभाग की ओर से सर्वे का कार्य चल रहा है।
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