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पठन-पाठन बाधित हो रहा है प्राचार्य जी
Bhadohi
Updated Mon, 30 Sep 2013 05:38 AM IST
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ज्ञानपुर। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राजनीतिक उठापटक से तार-तार हो रहे पठन-पाठन के विरोध में बृहस्पतिवार को छात्राओं को आगे आना पड़ा। प्राचार्य से मुलाकात कर छात्राओं ने आंदोलन के चलते पढ़ाई बाधित होने से अंधकारमय हो रहे भविष्य की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। छात्राओं ने कहा कि किसी भी तरह का आंदोलन कक्षाओं से बाहर किया जाना चाहिए। ताकि पठन-पाठन में दिक्कत न हो।
छात्राओं की बात पर प्राचार्य और शिक्षकों ने सहमति जताई। बृहस्पतिवार को छात्रनेताओं ने लखनऊ में लाठीचार्ज के विरोध में कालेज में प्रवेश कार्य के साथ पठन-पाठन भी बंद करा दिया। इससे कई दिन से कालेज आने के बाद वापस लौट जा रहीं छात्राएं नाराज हो गईं। इसके बाद छात्रा सुमन तिवारी के नेतृत्व में लामबंद होकर प्राचार्य के पास पहुंचीं बीए द्वितीय वर्ष की छात्राओं ने विरोध जताया।
उन्होंने कॉलेज में व्याप्त दुर्व्यवस्था के लिए प्राचार्य को भी जिम्मेदार ठहराया। छात्राओं ने कहा कि आए दिन कॉलेज परिसर में आंदोलन होने से पढ़ाई की बलि चढ़ गई है। ऐसे में छात्र-छात्राओं का भविष्य कैसा होगा? विरोध को देखकर दर्जन भर छात्रनेता भी पहुंच गए। छात्राओं ने पढ़ाई प्रभावित होने के पीछे अपने तर्क देकर उनकी भी बोलती बंद कर दी। कहा कि छात्रहित में आंदोलन की बात करते हैं। जबकि इससे छात्रों को ही नुकसान होता है। इसलिए आंदोलन पठन-पाठन से न जोड़ा जाए। उसे कक्षाओं के बाहर किया जाए। छात्राओं ने छात्रनेताओं को सामान्य विद्यार्थियों की समस्याएं समझने की नसीहत दी। छात्राओं की पहल को जहां शिक्षकों का समर्थन मिला, वहीं बाद में कई छात्रनेता भी सहमत नजर आए।
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छात्राओं की बात पर प्राचार्य और शिक्षकों ने सहमति जताई। बृहस्पतिवार को छात्रनेताओं ने लखनऊ में लाठीचार्ज के विरोध में कालेज में प्रवेश कार्य के साथ पठन-पाठन भी बंद करा दिया। इससे कई दिन से कालेज आने के बाद वापस लौट जा रहीं छात्राएं नाराज हो गईं। इसके बाद छात्रा सुमन तिवारी के नेतृत्व में लामबंद होकर प्राचार्य के पास पहुंचीं बीए द्वितीय वर्ष की छात्राओं ने विरोध जताया।
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उन्होंने कॉलेज में व्याप्त दुर्व्यवस्था के लिए प्राचार्य को भी जिम्मेदार ठहराया। छात्राओं ने कहा कि आए दिन कॉलेज परिसर में आंदोलन होने से पढ़ाई की बलि चढ़ गई है। ऐसे में छात्र-छात्राओं का भविष्य कैसा होगा? विरोध को देखकर दर्जन भर छात्रनेता भी पहुंच गए। छात्राओं ने पढ़ाई प्रभावित होने के पीछे अपने तर्क देकर उनकी भी बोलती बंद कर दी। कहा कि छात्रहित में आंदोलन की बात करते हैं। जबकि इससे छात्रों को ही नुकसान होता है। इसलिए आंदोलन पठन-पाठन से न जोड़ा जाए। उसे कक्षाओं के बाहर किया जाए। छात्राओं ने छात्रनेताओं को सामान्य विद्यार्थियों की समस्याएं समझने की नसीहत दी। छात्राओं की पहल को जहां शिक्षकों का समर्थन मिला, वहीं बाद में कई छात्रनेता भी सहमत नजर आए।
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