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ई-पास मशीनें दे रहीं दगा,कोटेदार छोड़ रहे पसीना
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ज्ञानपुर। जनपद के 561 गांवों में लगीं ई-पास मशीनों के दगा दे जाने से अब तक 60 फीसद भी खाद्यान्न का वितरण नहीं हो सका है। जबकि वितरण कार्य में लगे कोटेदार सुबह से शाम तक पसीने छोड़ने को मजबूर हैं। वितरण व्यवस्था अधर में लटक जाने के विरोध में अब मैनुअल स्तर पर वितरण कराने की आवाज जोर पकड़ने लगी है।
बताते चलें कि गत तीन माह पूर्व जिलापूर्ति विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर सभी ब्लाक क्षेत्रों के गांवों में संचालित हो रहीं कोटे की दुकानों पर कालाबाजारी और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ई-पॉश मशीनों के जरिए वितरण कराने का फरमान तो जारी कर दिया गया, लेकिन नेटवर्क के अभाव में मशीनों का न चल पाना कोटेदारों के लिए बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। प्रत्येक माह की छह तारीख से अंतिम दिन कोटेदार पात्रों के अंगूठे लगवाने और पात्रों के दुकानों पर देर रात तक दस्तक देने का क्रम अनवरत चलना समस्या का विषय सबब बन गया है। ज्ञात हो कि सभी ब्लाक क्षेत्रों में तैनात आपूर्ति निरीक्षकों के अधीन एक-एक तकनीशियनों की भी तैनाती मशीनों के बेहतर ढंग से संचालन कराने में तरह-तरह के अटकलें पैदा कर रही हैं। वितरण व्यवस्था से तंग आकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मैनुअल व्यवस्था के तहत खाद्यान्न को वितरित कराने की आवाज बुलंद की है।
बताते चलें कि गत तीन माह पूर्व जिलापूर्ति विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर सभी ब्लाक क्षेत्रों के गांवों में संचालित हो रहीं कोटे की दुकानों पर कालाबाजारी और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ई-पॉश मशीनों के जरिए वितरण कराने का फरमान तो जारी कर दिया गया, लेकिन नेटवर्क के अभाव में मशीनों का न चल पाना कोटेदारों के लिए बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। प्रत्येक माह की छह तारीख से अंतिम दिन कोटेदार पात्रों के अंगूठे लगवाने और पात्रों के दुकानों पर देर रात तक दस्तक देने का क्रम अनवरत चलना समस्या का विषय सबब बन गया है। ज्ञात हो कि सभी ब्लाक क्षेत्रों में तैनात आपूर्ति निरीक्षकों के अधीन एक-एक तकनीशियनों की भी तैनाती मशीनों के बेहतर ढंग से संचालन कराने में तरह-तरह के अटकलें पैदा कर रही हैं। वितरण व्यवस्था से तंग आकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मैनुअल व्यवस्था के तहत खाद्यान्न को वितरित कराने की आवाज बुलंद की है।
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