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88 करोड़ की कार्ययोजना, मिला धेला नहीं
Updated Fri, 25 Aug 2017 12:51 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
जिला योजना समिति ने 2017-18 के लिए जिले में विकास कार्यों के लिए 188 करोड़ की कार्ययोजना बनाई है, लेकिन अब तक इस मद में एक रुपये भी जारी नहीं हुए हैं। इससे विकास कार्यों को गति नहीं मिल पा रही है। सूबे में नई सरकार बनने के बाद जिले में ज्यादातर कार्य धनाभाव में रुके हुए हैं। पिछले दिनों प्रभारी मंत्री ओम प्रकाश राजभर की मौजूदगी में कार्ययोजना पर अंतिम मुहर लगी थी।
गांव के विकास से देश विकसित होने की ओर बढ़ेगा। केंद्र और प्रदेश सरकार जिला प्रशासन से समन्वयक बनाकर तमाम कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। शिक्षा-स्वास्थ्य, आवास, सड़क समेत अन्य कार्यों के माध्यम से लोगों को बेहतर सुविधाएं देने की कवायद की जाती है। जिले में होने वाले कार्यों की रूपरेखा बनाने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में एक वित्तीय वर्ष में खर्च होने वाले बजट को अनुमोदित किया जाता है। उसके बाद, प्रभारी मंत्री की देखरेख में उसे हरी झंडी देकर आगे बढ़ाया जाता है। 26 जून को प्रभारी मंत्री ओम प्रकाश राजभर की मौजूदगी में जिले के विकास को लेकर 188 करोड़ की कार्ययोजना शासन को भेजी गई। करीब दो माह का समय गुजरने वाला है लेकिन अब तक शासन से बजट नहीं भेजा गया। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, लोक निर्माण समेत अन्य विभागों के विकास कार्य बाधित हो गए हैं। जिला योजना समिति की ओर से जो कार्ययोजना बनाई गई है, उसमें गांव के विकास और किसान की बेहतरी पर विशेष जोर दिया गया है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी आरएन यादव ने कहा कि 26 जून को प्रभारी मंत्री की उपस्थिति में जिला योजना समिति की बैठक में 188 करोड़ की कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी गई थी। कार्ययोजना पर धनराशि तय करने के लिए शासन स्तर पर भी बैठक होती है। वह बैठक अब तक नहीं होने से बजट नहीं भेजा जा सका है।
कहां के लिए कितना रखा परिव्यय
ज्ञानपुर। जिला योजना समिति की ओर से शासन को जो कार्ययोजना भेजी गई है, उसमें सभी विभागों को कुछ न कुछ दिया गया है। ग्रामीण विकास, स्वच्छता, समाज कल्याण, किसान की बेहतरी पर विशेष ध्यान दिया गया है। ग्रामीण विकास 5407 लाख, स्वच्छता 1206 लाख, रोजगार सृजन 2627 लाख, पर्यटन 170 लाख, प्राथमिक शिक्षा 328 लाख, माध्यमिक शिक्षा 700 लाख, वन विभाग 117 लाख, पशुपालन 125 लाख, चिकित्सा पर 225 लाख, समाज कल्याण 3922 लाख, विकलांग कल्याण 465 लाख और महिला एवं बाल कल्याण पर 915 लाख परिव्यय तय किया गया है।
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जिला योजना समिति ने 2017-18 के लिए जिले में विकास कार्यों के लिए 188 करोड़ की कार्ययोजना बनाई है, लेकिन अब तक इस मद में एक रुपये भी जारी नहीं हुए हैं। इससे विकास कार्यों को गति नहीं मिल पा रही है। सूबे में नई सरकार बनने के बाद जिले में ज्यादातर कार्य धनाभाव में रुके हुए हैं। पिछले दिनों प्रभारी मंत्री ओम प्रकाश राजभर की मौजूदगी में कार्ययोजना पर अंतिम मुहर लगी थी।
गांव के विकास से देश विकसित होने की ओर बढ़ेगा। केंद्र और प्रदेश सरकार जिला प्रशासन से समन्वयक बनाकर तमाम कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। शिक्षा-स्वास्थ्य, आवास, सड़क समेत अन्य कार्यों के माध्यम से लोगों को बेहतर सुविधाएं देने की कवायद की जाती है। जिले में होने वाले कार्यों की रूपरेखा बनाने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में एक वित्तीय वर्ष में खर्च होने वाले बजट को अनुमोदित किया जाता है। उसके बाद, प्रभारी मंत्री की देखरेख में उसे हरी झंडी देकर आगे बढ़ाया जाता है। 26 जून को प्रभारी मंत्री ओम प्रकाश राजभर की मौजूदगी में जिले के विकास को लेकर 188 करोड़ की कार्ययोजना शासन को भेजी गई। करीब दो माह का समय गुजरने वाला है लेकिन अब तक शासन से बजट नहीं भेजा गया। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, लोक निर्माण समेत अन्य विभागों के विकास कार्य बाधित हो गए हैं। जिला योजना समिति की ओर से जो कार्ययोजना बनाई गई है, उसमें गांव के विकास और किसान की बेहतरी पर विशेष जोर दिया गया है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी आरएन यादव ने कहा कि 26 जून को प्रभारी मंत्री की उपस्थिति में जिला योजना समिति की बैठक में 188 करोड़ की कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी गई थी। कार्ययोजना पर धनराशि तय करने के लिए शासन स्तर पर भी बैठक होती है। वह बैठक अब तक नहीं होने से बजट नहीं भेजा जा सका है।
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कहां के लिए कितना रखा परिव्यय
ज्ञानपुर। जिला योजना समिति की ओर से शासन को जो कार्ययोजना भेजी गई है, उसमें सभी विभागों को कुछ न कुछ दिया गया है। ग्रामीण विकास, स्वच्छता, समाज कल्याण, किसान की बेहतरी पर विशेष ध्यान दिया गया है। ग्रामीण विकास 5407 लाख, स्वच्छता 1206 लाख, रोजगार सृजन 2627 लाख, पर्यटन 170 लाख, प्राथमिक शिक्षा 328 लाख, माध्यमिक शिक्षा 700 लाख, वन विभाग 117 लाख, पशुपालन 125 लाख, चिकित्सा पर 225 लाख, समाज कल्याण 3922 लाख, विकलांग कल्याण 465 लाख और महिला एवं बाल कल्याण पर 915 लाख परिव्यय तय किया गया है।
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