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बंदियों को मिलेगी नि:शुल्क कानूनी सहायता
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:39 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को जिला कारागार में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित कर बंदियों को विधिक जानकारी दी गई। साथ ही शिविर में चार पुरुष और दो महिला बंदियों को विधिक रूप से प्रशिक्षित करने के लिए चयन किया गया। जिससे वे प्रशिक्षण लेकर अन्य बंदियों को भी विधिक जानकारी दे सके। प्राधिकरण के सचिव/सिविल परवेज अख्तर ने शिविर में विविध जानकारियों को देने के साथ ही कारागार में प्रत्येक बैरक का निरीक्षण किया। बंदियों से मुलाकात कर के उनसे पूछताछ भी की। अधिवक्ता की सुविधा एवं जमानत होने के बाद भी रिहाई न हुई तो वे प्रकरण प्राधिकरण को अवगत कराए। उन्हें फौरन विधिक सहायता प्रदान की जाएगी। सचिव ने कारागार प्रशासन को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में बंदियों से प्रार्थना पत्र लेकर प्राधिकरण के पास भेजे। इससे न्यायालय और शासन के निर्देश का पूरी तरह पालन किया जा सके। कारागार अधीक्षक को निर्देश दिया कि दोषसिद्घ बंदियों की सूची उपलब्ध कराए, जिससे उन्हें प्राधिकरण की ओर से प्रशिक्षित किया जा सके। चयनित छह बंदियों के बारे में अधीक्षक को फार्म भरकर पूर्ण कराने और प्राधिकरण कार्यालय भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण की स्थापना कमजोरों की सहायता के लिए बनाया गया है। साथ ही मामलों को सुलह-समझौतों से निबटाने के लिए प्रेरित करना है। इस मौके पर कारागार अधीक्षक शशिकांत सिंह, अधिवक्ता रिंकू जायसवाल समेत अन्य लोग थे।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को जिला कारागार में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित कर बंदियों को विधिक जानकारी दी गई। साथ ही शिविर में चार पुरुष और दो महिला बंदियों को विधिक रूप से प्रशिक्षित करने के लिए चयन किया गया। जिससे वे प्रशिक्षण लेकर अन्य बंदियों को भी विधिक जानकारी दे सके। प्राधिकरण के सचिव/सिविल परवेज अख्तर ने शिविर में विविध जानकारियों को देने के साथ ही कारागार में प्रत्येक बैरक का निरीक्षण किया। बंदियों से मुलाकात कर के उनसे पूछताछ भी की। अधिवक्ता की सुविधा एवं जमानत होने के बाद भी रिहाई न हुई तो वे प्रकरण प्राधिकरण को अवगत कराए। उन्हें फौरन विधिक सहायता प्रदान की जाएगी। सचिव ने कारागार प्रशासन को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में बंदियों से प्रार्थना पत्र लेकर प्राधिकरण के पास भेजे। इससे न्यायालय और शासन के निर्देश का पूरी तरह पालन किया जा सके। कारागार अधीक्षक को निर्देश दिया कि दोषसिद्घ बंदियों की सूची उपलब्ध कराए, जिससे उन्हें प्राधिकरण की ओर से प्रशिक्षित किया जा सके। चयनित छह बंदियों के बारे में अधीक्षक को फार्म भरकर पूर्ण कराने और प्राधिकरण कार्यालय भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण की स्थापना कमजोरों की सहायता के लिए बनाया गया है। साथ ही मामलों को सुलह-समझौतों से निबटाने के लिए प्रेरित करना है। इस मौके पर कारागार अधीक्षक शशिकांत सिंह, अधिवक्ता रिंकू जायसवाल समेत अन्य लोग थे।