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Bhadohi News: 846 नए समूह होंगे गठित, जुड़ेंगी 29 हजार महिलाएं
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण (एनआरएलएम) से जुड़कर महिलाएं स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बन रही हैं। 2023-24 में 846 समूह गठित कर 29 हजार महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य मिल गया है। विभाग महिलाओं के चयन की कवायद में जुट गया है।
सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। उसी में एनआरएलएम भी शामिल है। जिसमें जुड़कर महिलाएं छोटी-छोटी बचत के माध्यम से रोजगार का सृजन कर खुद स्वावलंबी बना रही हैं। शासन से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि संग बैंकों से ऋण लेकर फिनायल, दोना-पत्तल, झाड़ू निर्माण सहित कई लघु उद्यम स्थापित कर चुकी हैं। 2023-24 में शासन ने 846 नए समूह का गठन कर 29 हजार महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। डीघ, औराई, अछवर, चौरी में गठित 50 से अधिक समूह बेहतर कार्य कर पुरस्कृत भी हो चुकी है। आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक कुल 5986 समूहों का गठन किया गया है, जिसमें 63 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। उपायुक्त स्वरोजगार श्यामजी ने बताया कि 29 हजार महिलाओं को समूह से जोड़ने का लक्ष्य मिला है। जिसके लिए ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बना रही मजबूत
ज्ञानपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही हैं। उपायुक्त स्वरोजगार श्यामजी ने बताया कि एक समूह को प्रोत्साहन राशि और अनुदान सहित कुल एक लाख 25 हजार मिलता है। समूह से जुड़ी महिलाएं उसका उपयोग करती हैं। उन्होंने अनुमान जताया कि समूहों के पास 60 से 70 करोड़ रुपये रहते हैं।
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उद्योग सखी संभालेंगी बाजार
ज्ञानपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से गठित महिला समूह अब बाजार व्यवस्था की भी कमान संभालेंगी। जिले में इसकी तैयारी शुरू हो गई है। कृषि और पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने व किसानों की आमदनी दूनी करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में अब उत्पादक समूह का गठन होगा। इसी क्रम में एक उद्योग सखी भी चयनित की जाएगी। मिशन से जुड़ी महिलाएं ही इसका संचालन करेंगी। उद्योग सखी सबसे पहले अपने गांवों में खेती बाड़ी व पशुपालन से जुड़े लोगों का सर्वे करेंगी। इसके बाद उत्पादन की क्षमता का आकलन करेंगी। खेती से जुड़ी महिला अगर सब्जी की खेती कर रही हैं तो सबसे पहले उसके उपयोग के बाद बचत को सूचीबद्ध करेंगी। बाजार में बिक्री के लिए तैयार होनेे पर किसान को उत्पादक समूह से जोड़ा जाएगा।
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सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। उसी में एनआरएलएम भी शामिल है। जिसमें जुड़कर महिलाएं छोटी-छोटी बचत के माध्यम से रोजगार का सृजन कर खुद स्वावलंबी बना रही हैं। शासन से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि संग बैंकों से ऋण लेकर फिनायल, दोना-पत्तल, झाड़ू निर्माण सहित कई लघु उद्यम स्थापित कर चुकी हैं। 2023-24 में शासन ने 846 नए समूह का गठन कर 29 हजार महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। डीघ, औराई, अछवर, चौरी में गठित 50 से अधिक समूह बेहतर कार्य कर पुरस्कृत भी हो चुकी है। आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक कुल 5986 समूहों का गठन किया गया है, जिसमें 63 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। उपायुक्त स्वरोजगार श्यामजी ने बताया कि 29 हजार महिलाओं को समूह से जोड़ने का लक्ष्य मिला है। जिसके लिए ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बना रही मजबूत
ज्ञानपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही हैं। उपायुक्त स्वरोजगार श्यामजी ने बताया कि एक समूह को प्रोत्साहन राशि और अनुदान सहित कुल एक लाख 25 हजार मिलता है। समूह से जुड़ी महिलाएं उसका उपयोग करती हैं। उन्होंने अनुमान जताया कि समूहों के पास 60 से 70 करोड़ रुपये रहते हैं।
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उद्योग सखी संभालेंगी बाजार
ज्ञानपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से गठित महिला समूह अब बाजार व्यवस्था की भी कमान संभालेंगी। जिले में इसकी तैयारी शुरू हो गई है। कृषि और पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने व किसानों की आमदनी दूनी करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में अब उत्पादक समूह का गठन होगा। इसी क्रम में एक उद्योग सखी भी चयनित की जाएगी। मिशन से जुड़ी महिलाएं ही इसका संचालन करेंगी। उद्योग सखी सबसे पहले अपने गांवों में खेती बाड़ी व पशुपालन से जुड़े लोगों का सर्वे करेंगी। इसके बाद उत्पादन की क्षमता का आकलन करेंगी। खेती से जुड़ी महिला अगर सब्जी की खेती कर रही हैं तो सबसे पहले उसके उपयोग के बाद बचत को सूचीबद्ध करेंगी। बाजार में बिक्री के लिए तैयार होनेे पर किसान को उत्पादक समूह से जोड़ा जाएगा।