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...आरवीएनएल की अनदेखी पड़ सकती है भारी
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जंगीगंज। पूर्वोत्तर रेलवे के माधोसिंह-इलाहाबाद सिटी सेक्शन पर रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल ) की अनदेखी कभी भी भारी पड़ सकती है। बिना फुट ओवरब्रिज के ही सुरक्षा और संरक्षा को ताक पर रख इलेक्ट्रिक इंजनों का संचालन यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बनकर रह गई है।
बताते चलें कि सेक्शन को करोड़ों की सौगात देकर विद्युतीकरण और दोहरीकरण का कार्य जीडीसीएल नामक कार्यदायी संस्था से कराया जा रहा है। इस निमित्त संस्था ने अपने अधीन कुछ अन्य ठेकेदारों में स्टेशन भवन, प्लेटफार्म विस्तारीकरण, फुट ओवरब्रिज जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। विद्युतीकरण का कार्य तीन माह पहले ही केपीटीएल संस्था ने पूर्ण कर वाराणसी रेल मंडल को हैंडओवर करा दिया गया, लेकिन स्टेशनों पर फुट ओवरब्रिज का कार्य बिना हुए ही पहले ट्रायल बाद में नईदिल्ली आदि क्षेत्रों को जोड़ने वालीं ट्रेनों को इलेक्ट्रिक इंजनों से संचालन नियमित कराने का फरमान जारी हो गया।
अहम बात तो यह कि स्टेशनों पर बने दोनों प्लेटफार्मों पर 25 हजार वोल्ट के ओएचई तारों से लैस कर दिया जाना बड़ी लापरवाही को प्रदर्शित कर रहा है। क्षेत्रीय स्टेशन होने के चलते यात्रियों का आवागमन भी बड़े पैमाने पर होता है। उन्हें इस बात का हमेशा भय सताता रहता है कि कहीं ट्रैक पार करते समय ट्रेन आ गई तो क्या होगा। ओवरब्रिज रहता तो उसके रास्ते यात्री आर-पार होते। इतना ही नहीं जटिल समस्या तो उस समय बढ़ जाती है जब एक साथ तीन ट्रेनों का एक साथ स्टेशनों पर क्रासिंग करा दी जाती है। ऐसे में ब्रिज की उपयोगिता यात्रियों को खलने लगती है। यह स्थिति जंगीगंज हो अहिमनपुर, भीटी आदि स्टेशन हर जगह बनी हुई है। इस संबंध में पीआरओ वाराणसी जोन अशोक कुमार का कहना रहा है कि समस्या का निवारण जांच कराकर कराई जाएगी।
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नहीं बन सका दूसरा ब्रिज
लालानगर। वैसे तो ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन माधोसिंह सेक्शन का सबसे अधिक राजस्व देने वाला माना जाता है। बावजूद इसके यहां भी यात्री सुविधाओं के साथ विभागीय सौतेला व्यवहार लोगों को रास नहीं आ रहा है। यहां तो एकमात्र ब्रिज का निर्माण कराकर रेल प्रशासन दूसरे के निर्माण की ओर कदम ही नहीं बढ़ा सका। जबकि दूसरे फुट ओवरब्रिज की आवश्यकता यात्रियों को अब और होने भी लगी है। ट्रेनों के आवागमन करते समय यात्री न चाहकर भी ट्रैक पर उतर कर दूसरे प्लेटफार्म पर पहुंचने को मजबूर हैं।
बताते चलें कि सेक्शन को करोड़ों की सौगात देकर विद्युतीकरण और दोहरीकरण का कार्य जीडीसीएल नामक कार्यदायी संस्था से कराया जा रहा है। इस निमित्त संस्था ने अपने अधीन कुछ अन्य ठेकेदारों में स्टेशन भवन, प्लेटफार्म विस्तारीकरण, फुट ओवरब्रिज जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। विद्युतीकरण का कार्य तीन माह पहले ही केपीटीएल संस्था ने पूर्ण कर वाराणसी रेल मंडल को हैंडओवर करा दिया गया, लेकिन स्टेशनों पर फुट ओवरब्रिज का कार्य बिना हुए ही पहले ट्रायल बाद में नईदिल्ली आदि क्षेत्रों को जोड़ने वालीं ट्रेनों को इलेक्ट्रिक इंजनों से संचालन नियमित कराने का फरमान जारी हो गया।
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अहम बात तो यह कि स्टेशनों पर बने दोनों प्लेटफार्मों पर 25 हजार वोल्ट के ओएचई तारों से लैस कर दिया जाना बड़ी लापरवाही को प्रदर्शित कर रहा है। क्षेत्रीय स्टेशन होने के चलते यात्रियों का आवागमन भी बड़े पैमाने पर होता है। उन्हें इस बात का हमेशा भय सताता रहता है कि कहीं ट्रैक पार करते समय ट्रेन आ गई तो क्या होगा। ओवरब्रिज रहता तो उसके रास्ते यात्री आर-पार होते। इतना ही नहीं जटिल समस्या तो उस समय बढ़ जाती है जब एक साथ तीन ट्रेनों का एक साथ स्टेशनों पर क्रासिंग करा दी जाती है। ऐसे में ब्रिज की उपयोगिता यात्रियों को खलने लगती है। यह स्थिति जंगीगंज हो अहिमनपुर, भीटी आदि स्टेशन हर जगह बनी हुई है। इस संबंध में पीआरओ वाराणसी जोन अशोक कुमार का कहना रहा है कि समस्या का निवारण जांच कराकर कराई जाएगी।
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नहीं बन सका दूसरा ब्रिज
लालानगर। वैसे तो ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन माधोसिंह सेक्शन का सबसे अधिक राजस्व देने वाला माना जाता है। बावजूद इसके यहां भी यात्री सुविधाओं के साथ विभागीय सौतेला व्यवहार लोगों को रास नहीं आ रहा है। यहां तो एकमात्र ब्रिज का निर्माण कराकर रेल प्रशासन दूसरे के निर्माण की ओर कदम ही नहीं बढ़ा सका। जबकि दूसरे फुट ओवरब्रिज की आवश्यकता यात्रियों को अब और होने भी लगी है। ट्रेनों के आवागमन करते समय यात्री न चाहकर भी ट्रैक पर उतर कर दूसरे प्लेटफार्म पर पहुंचने को मजबूर हैं।