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अग्निकांड:नगर पालिका की व्यवस्था रही लचर,एनएचएआई को सराहा
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लालानगर। गोपीगंज नगर के सदर मोहाल में मंगलवार को फर्नीचर व्यवसायी के यहां लगी आग और नुकसान ने लोगों को जहां सकते में डाल दिया है, वहीं पानी की कमी को नगर पालिका परिषद की लचर तैयारियों की आलोचना शुरू हो गई है। अलबत्ता आग से बचाव के कार्य में एनएचएआई के संसाधनों के काम आने के चलते लोग सराहना कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि ऐसे ही पानी की कमी बनी रही तो गर्मी में अगलगी की घटनाओं को रोक पाना कठिन हो जाएगा।
गर्मी की तपिश में जल का खास महत्व होता है। कहने की जरूरत नहीं कि अगलगी की घटनाओं के समय इसका महत्व बहुत व्यापक हो जाता है। लेकिन, लालच और लापरवाही के दंश झेल रहे तालाब अतिक्रमण के चलते समय से पहले सिकुड़कर सूख जा रहे हैं। नगर समेत ग्रामीण इलाकों में लाखों खर्च कर बने जलाशय भी अभी से सूख गए हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ऐसी स्थिति में अगलगी से बचाव करने में दमकलकर्मी सफल हो पाएंगे। कुछ ऐसा ही नजारा मंगलवार को उस समय देखने को मिला, जब सदर मोहाल में फर्नीचर व्यापारी के घर में भीषण आग लगने के बाद पहुंचे दो दमकल वाहनों का पानी समाप्त हो गया और आग पर काबू नहीं पाया जा सका। इसके बाद मिर्जापुर और प्रयागराज से दमकल की गाड़ियां बुलवाई गईं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहे सिक्सलेन निर्माण कार्य के कारण राजमार्ग पर जाम भी लगा। दौरान पालिकाकर्मी अपना दायित्व भूल चुके थे कि ऐसे जटिल समय से निबटने के लिए जल निगम के पाइप लाइन में लगा सॉकेट काम आ सकता है। सॉकेट का कभी इस्तेमाल न होने से वह जाम हो चुके हैं। लिहाजा कर्मचारी सॉकेट को तलाशने के लिए खोदाई ही करते रह गए, तब तक आग ने काम तमाम कर दिया। पालिका की व्यवस्था से निराश हो चुके प्रशासन और नगरवासियों को एनएचएआई के टैंकरों ने सहारा दिया।
नहीं उठे कदम तो सड़क पर उतरेंगे
समाजसेवी धर्मेंद्र द्विवेदी, बाबा बिंद, सुशील बिंद, धर्मराज दुबे, प्रकाश सिंह आदि का कहना है कि समय रहते और गर्मी की वीभत्सता को समझकर नगर प्रशासन ने जाम पड़े पाइप लाइनों के सॉकेट को दुरुस्त कराने के साथ ही जलाशयों को नहीं भरवाया तो सड़क पर उतरना मजबूरी होगी। वहीं ग्रामीण अंचलों में नहर एवं राजकीय नलकूपों से तालाबों, पोखरों को भरवाने की मांग प्रशासन से की गई। बताया कि गर्मी के दिनों में शार्ट सर्किट और अन्य कारणों से कच्चे-पक्के रिहायशी घरों, खेत-खलिहानों, खड़ी फसलों में आग लगना स्वाभाविक हो जाता है। ऐसे में पानी की उपलब्धता बनाए रखने पर ही आग पर काबू पाया जा सकेगा।
गर्मी की तपिश में जल का खास महत्व होता है। कहने की जरूरत नहीं कि अगलगी की घटनाओं के समय इसका महत्व बहुत व्यापक हो जाता है। लेकिन, लालच और लापरवाही के दंश झेल रहे तालाब अतिक्रमण के चलते समय से पहले सिकुड़कर सूख जा रहे हैं। नगर समेत ग्रामीण इलाकों में लाखों खर्च कर बने जलाशय भी अभी से सूख गए हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ऐसी स्थिति में अगलगी से बचाव करने में दमकलकर्मी सफल हो पाएंगे। कुछ ऐसा ही नजारा मंगलवार को उस समय देखने को मिला, जब सदर मोहाल में फर्नीचर व्यापारी के घर में भीषण आग लगने के बाद पहुंचे दो दमकल वाहनों का पानी समाप्त हो गया और आग पर काबू नहीं पाया जा सका। इसके बाद मिर्जापुर और प्रयागराज से दमकल की गाड़ियां बुलवाई गईं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहे सिक्सलेन निर्माण कार्य के कारण राजमार्ग पर जाम भी लगा। दौरान पालिकाकर्मी अपना दायित्व भूल चुके थे कि ऐसे जटिल समय से निबटने के लिए जल निगम के पाइप लाइन में लगा सॉकेट काम आ सकता है। सॉकेट का कभी इस्तेमाल न होने से वह जाम हो चुके हैं। लिहाजा कर्मचारी सॉकेट को तलाशने के लिए खोदाई ही करते रह गए, तब तक आग ने काम तमाम कर दिया। पालिका की व्यवस्था से निराश हो चुके प्रशासन और नगरवासियों को एनएचएआई के टैंकरों ने सहारा दिया।
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नहीं उठे कदम तो सड़क पर उतरेंगे
समाजसेवी धर्मेंद्र द्विवेदी, बाबा बिंद, सुशील बिंद, धर्मराज दुबे, प्रकाश सिंह आदि का कहना है कि समय रहते और गर्मी की वीभत्सता को समझकर नगर प्रशासन ने जाम पड़े पाइप लाइनों के सॉकेट को दुरुस्त कराने के साथ ही जलाशयों को नहीं भरवाया तो सड़क पर उतरना मजबूरी होगी। वहीं ग्रामीण अंचलों में नहर एवं राजकीय नलकूपों से तालाबों, पोखरों को भरवाने की मांग प्रशासन से की गई। बताया कि गर्मी के दिनों में शार्ट सर्किट और अन्य कारणों से कच्चे-पक्के रिहायशी घरों, खेत-खलिहानों, खड़ी फसलों में आग लगना स्वाभाविक हो जाता है। ऐसे में पानी की उपलब्धता बनाए रखने पर ही आग पर काबू पाया जा सकेगा।
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