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तीन साल में नहीं बन सकी एक किमी सड़क
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चौरी। मखमली कालीनों के शहर में विदेशी आयातकों को बेहतर सुविधा देने का दावा हकीकत नहीं हो पा रहा है। भदोही-बाबतपुर फोरलेन पर एक किमी तक चांद में दाग के मानिंद अधूरा रह गया है। मुआवजे की मांग को लेकर 2015 से रूकी सड़क 2018 तक पूरी नहीं हो सकी। इससे उस स्थान पर दुर्घटनाएं बढ़ने के साथ जाम लग जाता है। प्रशासन की ओर से कई बार किसानों से वार्ता भी हुई पर वह बेनतीजा ही रही। अब एक बार फिर उसके निदान को लेकर आवाज उठने लगी है।
कालीन निर्यातकों की मांग पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट वाराणसी- भदोही फोरलेन सड़क का निर्माण 2015 में आरंभ हुआ। दो साल के अंदर उक्त सड़क को पूरा कर लिया गया, लेकिन किसानों ने मुआवजे की मांग को लेकर एक किमी तक सड़क को रोक दिया। पूरी सड़क बन गई, लेकिन चौरी के पास एक किमी तक सड़क अब तक नहीं बन सकी। इस दौरान जिला प्रशासन और किसानों के बीच कई बार वार्ता हुई पर वह सफल नहीं हो सकी। जैसे- तैसे जिला प्रशासन ने किसानों से वार्ता कर दोनों तरफ से रोटहा और ब्रह्माश्रम तक सड़क को चौड़ा कर दिया और 30 जून 2016 को तत्कालीनमुख्यमंत्री ने उद्घाटन कर दिया, लेकिन एक किमी सड़क पूरी नहीं हो सकी। चौरी बाजार में सड़क चौड़ीकरण न होने से जाम की समस्या खत्म नहीं हो रही है। इस जाम में फंसने से विदेशी आयातकों के भी पसीने छूटने लगते है। इलाके के कालीराम दुबे, जावेद अंसारी, विनोद द्विवेदी, रामसागर मौर्या ने कहा कि जिला प्रशासन पहल करे तो समस्या का निदान हो सकता है। बताया कि सड़क की समस्या केवल राहगीरों का ही नहीं बल्कि इससे उद्योग धंधों पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
कालीन निर्यातकों की मांग पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट वाराणसी- भदोही फोरलेन सड़क का निर्माण 2015 में आरंभ हुआ। दो साल के अंदर उक्त सड़क को पूरा कर लिया गया, लेकिन किसानों ने मुआवजे की मांग को लेकर एक किमी तक सड़क को रोक दिया। पूरी सड़क बन गई, लेकिन चौरी के पास एक किमी तक सड़क अब तक नहीं बन सकी। इस दौरान जिला प्रशासन और किसानों के बीच कई बार वार्ता हुई पर वह सफल नहीं हो सकी। जैसे- तैसे जिला प्रशासन ने किसानों से वार्ता कर दोनों तरफ से रोटहा और ब्रह्माश्रम तक सड़क को चौड़ा कर दिया और 30 जून 2016 को तत्कालीनमुख्यमंत्री ने उद्घाटन कर दिया, लेकिन एक किमी सड़क पूरी नहीं हो सकी। चौरी बाजार में सड़क चौड़ीकरण न होने से जाम की समस्या खत्म नहीं हो रही है। इस जाम में फंसने से विदेशी आयातकों के भी पसीने छूटने लगते है। इलाके के कालीराम दुबे, जावेद अंसारी, विनोद द्विवेदी, रामसागर मौर्या ने कहा कि जिला प्रशासन पहल करे तो समस्या का निदान हो सकता है। बताया कि सड़क की समस्या केवल राहगीरों का ही नहीं बल्कि इससे उद्योग धंधों पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
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