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मोदी लहर से अधिक मतदान, किसका बढ़ेगा सम्मान
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ज्ञानपुर। भदोही के मतदाताओं ने भीषण गर्मी और उमस को भी मात दे दी। सुबह से लेकर शाम तक जमकर मतदान कर 2014 के मतदान को ध्वस्त कर दिया। 2014 में 53.54 फीसदी वोट पड़े थे, जबकि 2019 में 54.77 फीसदी मतदान हुआ, हालांकि जनपद फर्स्ट डिवीजन उत्तीर्ण होने से एक बार फिर चूक गया। बढ़े मतदान प्रतिशत से राजनीतिक पंडित भी उलझ गए हैं। सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक हुए मतदान मेें औराई और हंडिया विधानसभा टॉप पर रहे।
आजादी के बाद मिर्जापुर- भदोही संसदीय सीट रही। उसके बाद 16 से 17 संसदीय चुनाव और उप चुनाव हुए। 1951 से अब तक महज दो बार मतदाता 60 फीसद से ज्यादा मतदान कर फर्स्ट डिवीजन पास हुए हैं, जबकि इसके अलावा अन्य चुनावों में स्थिति 58 से 44 फीसद के इर्द-गिर्द ही सिमटी रही। मतदान की सबसे खराब स्थिति भदोही सीट अलग होने के बाद हुई। परिसीमन के बाद 2009 में मात्र 43.39 फीसदी मतदान हुआ जबकि 2014 में 53.54 फीसदी वोट पाकर वीरेंद्र सिंह सांसद बन गए। 2019 में मतदान प्रतिशत 54.76 के साथ ही 1.23 फीसदी बढ़ा जरूरी पर आयोग और प्रशासन की उम्मीद के हिसाब से नहीं रहा। करीब 70 वर्ष के इतिहास में दो बार 1967 में 60.49 प्रतिशत और 1998 में 64.58 प्रतिशत मतदान हुआ। माना जाता है कि कम वोटिंग बसपा के लिए मुफीद रहती है। हालांकि इस बार गठबंधन होने से मुसलमान और यादवों की वोटिंग भी जमकर हुई है। मोदी लहर से अधिक मतदान 23 मई को किसका सम्मान बढ़ाएगा यह तो आने वाला समय बताएगा पर राजनीतिक पंडित उलझ गए हैं। वहीं दूसरी और पांचों विधानसभाओं में हंडिया सबसे आगे रहा। यहां 58 प्रतिशत मतदान हुआ जबकि शुरूआती दौर में पिछड़ने के बाद भी औराई 56.86 प्रतिशत पहुंच गया।
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आजादी के बाद मिर्जापुर- भदोही संसदीय सीट रही। उसके बाद 16 से 17 संसदीय चुनाव और उप चुनाव हुए। 1951 से अब तक महज दो बार मतदाता 60 फीसद से ज्यादा मतदान कर फर्स्ट डिवीजन पास हुए हैं, जबकि इसके अलावा अन्य चुनावों में स्थिति 58 से 44 फीसद के इर्द-गिर्द ही सिमटी रही। मतदान की सबसे खराब स्थिति भदोही सीट अलग होने के बाद हुई। परिसीमन के बाद 2009 में मात्र 43.39 फीसदी मतदान हुआ जबकि 2014 में 53.54 फीसदी वोट पाकर वीरेंद्र सिंह सांसद बन गए। 2019 में मतदान प्रतिशत 54.76 के साथ ही 1.23 फीसदी बढ़ा जरूरी पर आयोग और प्रशासन की उम्मीद के हिसाब से नहीं रहा। करीब 70 वर्ष के इतिहास में दो बार 1967 में 60.49 प्रतिशत और 1998 में 64.58 प्रतिशत मतदान हुआ। माना जाता है कि कम वोटिंग बसपा के लिए मुफीद रहती है। हालांकि इस बार गठबंधन होने से मुसलमान और यादवों की वोटिंग भी जमकर हुई है। मोदी लहर से अधिक मतदान 23 मई को किसका सम्मान बढ़ाएगा यह तो आने वाला समय बताएगा पर राजनीतिक पंडित उलझ गए हैं। वहीं दूसरी और पांचों विधानसभाओं में हंडिया सबसे आगे रहा। यहां 58 प्रतिशत मतदान हुआ जबकि शुरूआती दौर में पिछड़ने के बाद भी औराई 56.86 प्रतिशत पहुंच गया।
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