चौरी। क्षेत्र के भकोड़ा में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन रविवार को महराज शिवशंकराचार्य वैरागी ने भगवान श्रीकृष्ण पुत्र प्रद्युम्न कि कथा का विस्तार से वर्णन किया। कहा भगवान शंकर के श्राप से जब कामदेव भस्म हो गए तो उनकी पत्नी रति अति व्याकुल होकर पति वियोग में उन्मत्त गई। उसने अपने पति की दुबारा प्राप्ति के लिये देवी पार्वती और भगवान शंकर को तपस्या करके प्रसन्न किया। पार्वती जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि तेरा पति यदुकुल में भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लेकर शंबरासुर के यहां मिलेगा। इसीलिये रति शंबरासुर के घर मायावती के नाम से दासी का कार्य करने लगी। इधर कामदेव रुक्मणी के गर्भ में स्थित हो गए। समय आने पर रुक्मणी ने एक अति सुंदर बालक को जन्म दिया। जब शंबरासुर को पता चला कि मेरा शत्रु यदुकुल में जन्म ले चुका है।वह वेश बदल कर प्रसूतिका गृह से उसने 10 दिन के शिशु को ले आकर समुद्र में डाल दिया। समुद्र में उस शिशु को एक मछली निगल गई। उस मछली को एक मगरमच्छ ने निगल लिया। वह मगरमच्छ एक मछुआरे के जाल में आ फंस गया। जब उस मगरमच्छ का पेट फाड़ा गया तो उसमें से अति सुंदर बालक निकला। उसे देखकर शंबरासुर की दासी मायावती के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। वह उस बालक को पालने लगे। थोड़े ही काल में प्रद्युम्न युवा हो गया। यह प्रसंग सुन भक्त भाव विभोर होकर झूमने लगे। इस मौके पर संजीव दुबे, अवधेश पांडेय, अतुलकांत पांडेय, अरविंद यादव, रतन दुबे ,चंद्रेश पांडेय, विभूति नारायण तिवारी, सोनू दुबे, विशाल दुबे, गुड्डू दुबे आदि रहे।