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Bhadohi News: चार महीने में 5677 बच्चे मिले कुपोषित, डेढ़ फीसदी ही पहुंचे पुनर्वास केंद्र

Tue, 12 May 2026 01:28 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2026 01:28 AM IST
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5677 children found malnourished in four months, only 1.5% reached rehabilitation centers
जिला अस्पताल के एनआरसी में भर्ती बच्चें। संवाद
जिले में कुपोषण उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग सजग नहीं है। चार महीने में 5677 बच्चे कुपोषित और अति कुपोषित की श्रेणी में दर्ज हुए। वहीं जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में डेढ़ फीसदी बच्चे ही पहुंचे। यह केंद्र खासतौर पर गंभीर कुपोषित बच्चों के इलाज, पोषणयुक्त आहार और नियमित चिकित्सकीय निगरानी के लिए बनाया गया है, जहां 14 दिन तक कुपोषित बच्चों की विशेष देखभाल की जाती है।
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जिले में 1496 आंगनबाड़ी केंद्र है। यहां पर 1.25 लाख से ज्यादा बच्चे पंजीकृत हैं। जीरो से छह वर्ष के बच्चों का हर महीने वजन किया जाता है। लंबाई, वजन आदि के आधार पर बच्चों को अति कुपोषित (सैम ) और कुपोषित (मैम) की श्रेणी रखा जाता है। अप्रैल 2026 में अति कुपोषित 69 और कुपोषित 437 बच्चे चिह्नित किए गए। जनवरी से अप्रैल तक सेम 870 तो मैम 4807 बच्चे मिले। चार महीने में मात्र 74 बच्चे ही उपचार के लिए जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) आए। सोमवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पुनर्वास केंद्र की पड़ताल की। 10 बेड वाले केंद्र में छह बच्चे भर्ती मिले। हालांकि पूर्व के महीनों में तीन से पांच बच्चे ही भर्ती हुए। जमीनी स्तर पर रेफरल और जागरूकता की प्रक्रिया कमजोर होने से व्यवस्था रास्ते से भटक जाती है। अति कुपोषित बच्चों की बड़ी संख्या गांवों और घरों तक सीमित है। उन्हें अस्पताल तक नहीं लाया जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम स्तर पर बच्चों की पहचान तो हो रही है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्हें एनआरसी भेजने की प्रक्रिया बेहद धीमी है। इसके पीछे जागरूकता की कमी भी बड़ी वजह है। मई में एनआरसी पहुंचे बच्चों में सिर्फ सुरियावां ब्लॉक के ही बच्चे पहुंचे। डीघ, औराई, ज्ञानपुर, भदोही और अभोली ब्लॉक से एक भी बच्चा केंद्र नहीं पहुंचे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि अभिभावक बच्चे को पुनर्वास केंद्र ले जाने को तैयार नहीं होते हैं।कुपोषित बच्चा पहचान में आते ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उसे टीकाकरण दिवस पर एएनएम को दिखाती हैं। यदि एएनएम को लगता है कि खानपान सुधार, स्वच्छता और कुछ दवाओं से बच्चा ठीक हो सकता है तो वह आंगनबाड़ी को इसकी जानकारी देकर सामुदायिक स्तर पर सुधार की प्रक्रिया करती हैं। वहीं अगर बच्चा अति कुपोषण की स्थिति में है और सामान्य उपायों से सुधार संभव नहीं दिखता तो एएनएम उसे डॉक्टर के पास रेफर करती हैं। यहां से बच्चे को एनआरसी में भर्ती किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती बच्चों को नाश्ता, भोजन के साथ पौष्टिक आहार दिए जाते हैं। जो सामान हर महीने आता है। इसके अलावा बच्चे की मां को 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिलता है। इसमें 50 रुपये में दोनों समय भोजन व नाश्ता दिया जाता है। इसके अलावा 14 दिन का 700 रूपये बच्चे की मां के बैंक खाते में भेजा जाता है। महीने में चार बार मरीज को फॉलोअप के लिए बुलाया जाता है। इसमें एक बार 100 रुपये किराया के रूप में मिलता है। संवाद
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दिनेश मिश्रा, डीपीओ ने कहा कि बेहतर निगरानी एवं मॉनीटरिंग से कुपोषित बच्चों की संख्या में काफी कमी आई है। एक दशक पहले यह संख्या 30 से 35 हजार तक रहती थी, लेकिन अभी काफी कम है। इसको और भी कम करने का प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. संतोष कुमार चक, सीएमओ ने कहा कि
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पोषण पुनर्वास केंद्र में जो भी बच्चा पहुंचता है, उसका गंभीरता से इलाज किया जाता है, ताकि बच्चों को जल्द से जल्द सामान्य श्रेणी में लाया जा सके।
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